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आपूर्ति घटने लगी तो महंगी हुईं सब्जियां

दिलीप कुमार झा / मुंबई July 18, 2019

पश्चिमी भारतीय राज्यों में वर्षा की कमी और उत्तर-पूर्व में बाढ़ के बाद सब्जियों की कीमतें जुलाई में असामान्य रूप से काफी बढ़ गई हैं। बुधवार को मुंबई की थोक मंडी में हाइब्रिड टमाटर 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बेचा जा रहा था। इसमें 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस महीने की शुरुआत में इसके दाम 12 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इसी तरह दिल्ली की मंडी में टमाटर की स्थानीय किस्म के दाम बुधवार को आश्चर्यजनक रूप से 82 प्रतिशत तक उछलकर 30.50 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए, जबकि 1 जुलाई को इसके दाम 16.75 रुपये प्रति किलोग्राम थे।
 
केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि बंदगोभी, फूलगोभी और बैंगन के दामों में भी जुलाई के दौरान तेज इजाफा दिखाई दिया है। सब्जियां पूरी तरह से आपूर्ति पर निर्भर करती हैं इसलिए बड़ा मसला होने की वजह से इनकी कीमतों में तेज वृद्धि ने नीति निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को समान रूप से चिंतित कर दिया है। मुंबई की कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के सचिव अनिल चव्हाण ने कहा कि हालांकि मॉनसून के इस सीजन में महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन नासिक सहित कई प्रमुख सब्जी आपूर्ति क्षेत्रों में बारिश की कमी रही है। इस वर्ष मॉनसूनी बारिश की शुरुआत में लगभग तीन सप्ताह की देरी के बाद किसानों ने तुरंत ही बारिश में कमी का आकलन कर लिया था। इस तरह किसानों ने कम रकबे में सब्जी की बुआई की और इसके परिणामस्वरूप इस सीजन में अब तक आपूर्ति कम रही है। जब तक प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मॉनसूनी बारिश शुरू नहीं हो जाती, तब तक उपभोक्ताओं को सब्जियों के ज्यादा दामों से कोई राहत नहीं मिलेगी।
 
जानकार सूत्रों ने कहा कि किसान कम उपज के डर से इस सीजन में सब्जियों की बुआई शुरू करने में हिचक रहे हैं। पिछले साल कम बारिश की वजह से महाराष्ट्र के कुछ भागों में किसानों ने पूरी फसल गंवा दी, जबकि राज्य के दूसरे भागों में किसान पहले दौर की तुड़ाई के बाद फसल एकत्रित नहीं कर सके जिस वजह से 50-60 प्रतिशत से ज्यादा फसल खराब हो गई। सब्जी किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाला पुणे स्थित संगठन सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे ने कहा कि उपभोक्ताओं को एक महीने तक सब्जियों की अधिक कीमतों से राहत मिलने की संभावना नहीं है। मॉनसूनी बारिश की शुरुआत के साथ बीज बोने वाले किसानों को 90 दिनों के औसत फसल चक्र के साथ अगले 45 दिनों में पहली उपज मिलेगी। इसलिए सब्जी की आपूर्ति में 30-45 दिनों में ही इजाफा होगा। 
 
मुंबई के अलावा दिल्ली सहित अन्य शहरों में सब्जियां महंगी हो गई हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आपूर्ति भारी वर्षा और बाढ़ के कारण प्रभावित हुई थी। उदाहरण के लिए फूलगोभी की कुल आवक 17 जुलाई को लुढ़ककर 18.2 टन रह गई है जो महीने की शुरुआत में 22.5 टन थी। इस समीक्षाधीन अवधि के दौरान करेले की आवक गिरकर केवल 2.6 टन रह गई जो पहले 6.1 टन थी। हालांकि खुदरा बाजार अभी तक लचीले रहे हैं क्योंकि थोक बाजार में तेजी से बढ़ रहे दामों का असर वहां तक पहुंचने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है। इस बीच आपूर्ति की चिंताओं के बीच श्रावण के इस पवित्र महीने में सब्जियों की मांग बढऩे वाली है।
 
भारतीय मौसम विभाग द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि 1 जून से 10 जुलाई के बीच की अवधि के दौरान कुल बारिश में 14 प्रतिशत की कमी रही है। बारिश में धीरे-धीरे सुधार शुरू हो गया है, इसलिए आने वाले सप्ताहों में सब्जियों की कुल बुआई में इजाफा होने की संभावना है।
Keyword: agri, farmer, crop, vegetable,,
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