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एबिटा में गिरावट के हैं आसार

अमृता पिल्लई और रोमिता मजूमदार / मुंबई July 18, 2019

मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के परिचालन लाभ पर जून तिमाही में असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि कंपनी का एबिटा घटेगा। इसके अलावा कंपनी के लाभ की रफ्तार पिछली 15 तिमाहियों में सबसे कम रह सकती है। आरआईएल जून तिमाही के नतीजे शुक्रवार को घोषित करेगी। ब्लूमबर्ग की रायशुमारी में 10 विश्लेषकों ने अपने अनुमान में कहा है कि कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 9,697 करोड़ रुपये रहेगा जबकि राजस्व 1.46 लाख करोड़ रुपये। अप्रैल-जून 2018 की तिमाही में आरआईएल का एकीकृत लाभ 9,459 करोड़ रुपये रहा था। आरआईएल पर जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा है, जून तिमाही में एकीकृत एबिटा 20,200 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो तिमाही दर तिमाही 3 फीसदी कम है और कंपनी का कर पश्चात लाभ 9,500 करोड़ रुपये रह सकता है, जो क्रमिक आधार पर 9 फीसदी कम है। विश्लेषकों ने कहा कि कंपनी के मुनाफे की रफ्तार पिछली 15 तिमाहियों में सबसे कम रह सकती है क्योंकि पेट्रोकेमिकल में कमजोरी का असर इस पर पड़ेगा और निकट भविष्य में इसमें शायद ही सुधार होगा। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा कि कंपनी का एकीकृत एबिटा साल दर साल के आधार पर 3 फीसदी कम रह सकता है।
 
प्रबंधन की टिप्पणी में बाजार फाइबर टु द होम कारोबार, नेटवर्क में किसी तरह की बढ़ोतरी और फाइबर व टावर परिसंपत्तियों को इनिवट ढांचे के तहत अलग करने के बाद के परिचालन खर्च पर नजर रखेगा। इसके अतिरिक्त निवेशक दूरसंचार परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण पर टिप्पणी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की पेशकश और आगे के पूंजीगत खर्च की योजना पर भी नजर रखेंगे। आरआईएल अपने मुख्य कारोबार पेट्रोकेम व रिफाइनिंग में कमजोर मार्जिन दर्ज कर सकती है, वहीं उपभोक्ता क्षेत्र आंशिक तौर पर इस कमी की भरपाई कर सकता है। रिफाइनिंग कारोबार के मामले में विश्लेषकों का अनुमान है कि सकल रिफाइनिंग मार्जिन 8 डॉलर प्रति बैरल से 8.4 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। मार्च 2019 की तिमाही में आरआईएल का जीआरअम 8.2 डॉलर प्रति बैरल रहा था, जो अक्टूबर-दिसंबर 2014 की तिमाही के बाद का निचला स्तर है और तब यह 7.3 डॉलर प्रति बैरल रहा था।
 
आरआईएल के पेट्रोकेम की आय पर जून तिमाही में झटका लग सकता है जबकि मार्च तिमाही मेंं इसका प्रदर्शन स्थिर रहा था। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने 15 जुलाई की रिपोर्ट में कहा है, हमें लगता है कि पेट्रोकेम एबिटा इस तिमाही 9 फीसदी कम होगी (तिमाही दर तिमाही) क्योंकि क्रमिक तौर पर प्रमुख मार्जिन ज्यादातर केमिकल उत्पादों के मामले में कम रहा है। इसकी वजह व्यापार युद्ध से जुड़ी चिंता है। आरआईएल के उपभोक्ता कारोबार दूरसंचार व खुदरा की आय इसके एकीकृत प्रदर्शन में मदद कर सकता है। एचएसबीसी के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा है, एकीकृत आधार पर इस कमजोरी के आंशिक हिस्से की भरपाई उपभोक्ता कारोबार की ज्यादा आय के योगदान से हो सकती है क्योंकि हमारा मानना है कि आरआईएल दूरसंचार व खुदरा कारोबार में प्रदर्शन के मजबूत संकेतक दर्ज कर सकती है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि खुदरा कारोबार का एबिटा साल दर साल के आधार पर 41 फीसदी बढ़ेगा। हालांकि दूरसंचार कारोबार की आय मार्जिन जून तिमाही में नरम रह सकती है।
 
मॉर्गन स्टैनली के शोध विश्लेषक पराग गुप्ता ने लिखा है, परिचालन खर्च बढ़ सकता है क्योंकि नेटवर्क की लागत इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) वाले ढांचे से आएगी, ऐसे में हमारा अनुमान है कि एबिटा मार्जिन तिमाही दर तिमाही 536 आधार अंक घटकर 33.6 फीसदी रह जाएगा और तिमाही दर तिमाही आधार पर एबिटा कम रह सकता है। इसके दूरसंचार कारोबार का औसत राजस्व प्रति ग्राहक स्थिर रहने की संभावना है और यह एयरटेल से कम रहने की उम्मीद है क्योंकि ग्रामीण इलाके में यह तेजी से बढ़ी है और वह भी टैरिफ योजना में किसी तरह के बदलाव या बढ़ोतरी के बिना।
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