बिजनेस स्टैंडर्ड - मिलीभगत से कराई मनचाही रेटिंग
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मिलीभगत से कराई मनचाही रेटिंग

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 07 18, 2019

आईएलऐंडएफएस का धनशोधन मामला

बिजनेस स्टैंडर्ड मिलीभगत से कराई मनचाही रेटिंगआईएलऐंडएफएस से जुड़े धनशोधन मामले में रेटिंग एजेंसियों की भूमिका की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पाया कि समूह की फर्मों की रेटिंग कई बार बढ़ाई गई है। ईडी के मुताबिक आईएलऐंडएफएस के वरिष्ठ प्रबंधन ने पहले दी गई रेटिंग की समीक्षा में हस्तक्षेप कर फर्मों की रेटिंग बढ़वाई है। ईडी के अधिकारियों के अनुसार रवि पार्थसारथि, अरुण साहा, हरि शंकरण सहित समूह के वरिष्ठ प्रबंधन ने वांछित रेटिंग के लिए इक्रा के विश्लेषकों की टीम के साथ बात की थी। पार्थसारथि और शंकरण आईएलऐंडएफएस के तत्कालीन चेयरमैन और वाइस चेयरमैन थे और साहा आईएलऐंडएफ फाइनैंशियल सर्विसेज (आईफिन) के पूर्व संयुक्त निदेशक थे।

सूत्रों ने कहा कि पूछताछ के दौरान इक्रा ने दावा किया कि उन्हें तीसरे पक्ष से आईफिन और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवक्र्स (आईटीएनएल) के वित्तपोषण की जानकारी नहीं थी और न ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगाई गई बंदिशों के बारे में भी पता था। इसके अलावा रेटिंग एजेंसी के पास जमानत पर रखी गई प्रतिभूतियों को बेचने की भी सूचना नहीं थी जबकि आईफिन के प्रबंधकों ने सूचित किया था कि निवेश के एवज में उनके पास समुचित जमानत हैं। रेटिंग फर्म ने दावा किया कि उसे इस बारे में तब पता चला जब कंपनी ने वित्त वर्ष 2019 में इसे स्पष्ट किया।

सेबी के नियमों के अनुसार रेटिंग एजेंसियां पहले दी गई रेटिंग की समीक्षा उसी स्थिति में कर सकती हैं जब संबंधित कंपनी ऐसा कराना चाहे। रेटिंग समीक्षा का प्रस्ताव स्वतंत्र सदस्यों की अध्यक्षता वाली रेेटिंग समिति के पास भेजा जाता है। इसके बाद प्रासंगिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रेटिंग में बदलाव किया जाता है। इक्रा ने कहा कि जिन फर्मों की रेटिंग की समीक्षा की गई उनकी वित्तीय स्थिति के बारे में उसे जानकारी नहीं थी। समझा जाता है कि ईडी इन सूचनाओं को आगे की जांच के लिए संबंधित नियामकों को भेज सकता है।  इस बारे में पूछे जाने पर इक्रा के प्रवक्ता ने कहा कि हम आपके सवालों के जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। 

जांच अधिकारियों ने कहा कि आईफिन और आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज तथा आईटीएनएल और इसकी विशेष उद्देश्यीय इकाई की रेटिंग के लिए दो अलग-अलग टीम थीं। ईडी के एक अधिकारी ने कहा, 'हमने पाया कि आईएलऐंडएफएस के वरिष्ठ प्रबंधन ने कई दफा रेटिंग की समीक्षा करने को कहा था। 2012 और 2013 में जब आईफिन अच्छा प्रदर्शन कर रही थी तो उसकी रेटिंग एए थी और 2019 में संकट खड़ा हुआ तो रेटिंग की समीक्षा के बाद उसे एए+ कर दिया गया।'

अरुण साहा, हरि शंकरन, रमेश बावा, मिलिंद पटेल जैसे अधिकारियों ने विश्लेषक टीम से बात की थी। दूसरी ओर आईटीएनएल के लिए के रामचंद, दिलीप भाटिया, अजय मेनन, सुजॉय दास ने विश्लेषक टीम से चर्चा की थी।सूत्रों ने कहा कि ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि रेटिंग एजेंसियों को आईएलऐंडएफएस संकट के बारे में जानकारी थी या नहीं या फिर उन्होंने इस मामलेे में जुड़े लोगों के प्रभाव आकार ऐसा किया।

ईडी ने अब तक इक्रा और केयर रेटिंग्स सेे इस बारे में पूछताछ की है।तीन प्रमुख रेटिंग एजेंसियों - मूडीज की सहायक इकाई इक्रा, केयर रेटिंग्स और फिच की सहायक इकाई इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च ने आईएलऐंडएफएस को एएए रेटिंग दी थी, जिसे उच्च स्तर की रेटिंग मानी जाती है।इक्रा और केयर दोनों ने अपने प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारियों को अनिश्चितकाल तक के लिए छुट्टी पर भेज दिया है।

Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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