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सरकार को अतिरिक्त धन देने पर सेबी को एतराज

श्रीमी चौधरी और सोमेश झा / नई दिल्ली July 17, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन अजय त्यागी ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर सरकार के उस प्रस्ताव पर आपत्ति की है, जिसमें सेबी के अतिरिक्त कोष का 75 प्रतिशत सरकार को हस्तांतरण करने का प्रावधान है। इस मामले से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सेबी प्रमुख ने सरकार को नए प्रावधान की समीक्षा करने को कहा है। हाल ही में सेबी इंप्लाइज एसोसिएशन (एसईए), ब्रोकर्स फोरम और कई अन्य बाजार हिस्सेदारों ने इस कदम का विरोध किया था क्योंकि इससे नियामक निकाय की स्वतंत्रता बाधित होती है। 
 
वित्त मंत्रालय को 10 जुलाई को लिखे पत्र में त्यागी ने कहा है कि इस कदम से सेबी की कार्यप्रणाली और यहां तक कि प्रतिभूति बाजार पर असर पड़ेगा। उन्होंने उल्लेख किया है कि कथित प्रस्ताव पर वित्तीय क्षेत्र के नियामक वित्तीय स्थायित्व एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) में चर्चा हुई थी। त्यागी ने तर्क दिया है कि वित्त विधेयक के माध्यम से सेबी ऐक्ट में संशोधन के लिए एफएसडीसी के अंतिम फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। इस सिलसिले में सेबी को भेजे गए ई-मेल का कोई उचित जवाब नहीं मिला। अजय त्यागी को भेजे गए टेक्स्ट मैसेज का भी कोई जबाव नहीं मिला। 
 
माना जा रहा है कि सेबी के चेयरमैन ने इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस मसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया है।  सरकारी अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'दो प्रावधान- एक अतिरिक्त नकदी के हस्तांतरण व दूसरा व्यय बढ़ाने के फैसले के पहले वित्त मंत्रालय की पूर्व मंजूरी- ऐसे हैं, जिन्हें बाजार नियामक ने सही नहीं माना है। इन प्रावधानों की अभी समीक्षा हो रही है।'  माना जा रहा है कि सेबी प्रमुख ने नियामक के आरक्षित निधि रखने के पीछे तर्क भी दिए हैं और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए इसके महत्त्व के बारे में बताया है। 
 
नियामक का मानना है कि नए प्रावधानों से कंसॉलिडेशन आफ इंडिया (सीओआई) में धन जाने के बाद कर के समान ही व्यवस्था हो जाएगी। इस मामले से जुड़े एक और व्यक्ति ने कहा, 'सेवाएं प्रदान करने के लिए सेबी इंडरमीडिएटरीज पर शुल्क लगाती है, लेकिन अगर इस धन का हस्तांतरण किया जाता है तो यह बाजार हिस्सेदारों पर अतिरिक्त कर बन जाएगा।'  सूत्रों के मुताबिक मार्च 2018 तक सेबी का सामान्य अनुमानित रिजर्व 3,500 करोड़ रुपये और मार्च 2019 तक 3,800 करोड़ रुपये था। वित्त विधेयक 2019 में प्रस्ताव किया गया है कि 'आरक्षित निधि' बनाने के बाद सेबी के आम कोष का 75 प्रतिशत नकदी सरकार के खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। इस हस्तांतरण का प्रस्ताव उसके बाद है, जब सेबी कानून के तहत अपने सभी अनिवार्य व्यय पूरे कर ले। अगर वित्त विधेयक 2019 के प्रावधानों को लागू किया जाता है तो सेबी को चालू वित्त वर्ष में 2,800 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को देने होंगे। कानून बनने के पहले वित्त विधेयक 2019 पर संसद में चर्चा होगी। 
 
वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि इस कदम के पीछे आर्थिक मामलों के विïभाग का यह विचार था कि सेबी में भारी मात्रा में एकतत्र अतिरिक्त कोष के  मसले का समाधान किया जाए। वित्त विभाग ने इस मसले पर कानून मंत्रालय से भी राय ली है कि 'सेबी द्वारा प्राप्त धन सार्वजनिक धन है और सरकार के हवाले से एकत्र किया गया सभी सार्वजनिक धन सार्वजनिक खाते का हिस्सा होगा'। सूत्रों ने कहा कि यह सरकार की लंबे समय से लंबित मंग है कि सार्वजनिक खाते में अतिरिक्त धन का हस्तांतरण किया जाए लेकिन सेबी में इस मामले को लेकर आम राय नहीं बन सकी। पिछले 6 महीने में आर्थिक मामलों के विभाग ने सेबी के साथ कई दौर की बातचीत की है, जिससे उसे इस मसले पर सहमत किया जा सके। बहरहाल नियामक ने सरकार का पक्ष मानने से इनकार कर दिया।
 
सेबी के अतिरिक्त नकदी का हस्तांतरण सरकार उसी तरीके के मुताबिक चाहती है, जैसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपने अतिरिक्त फंड का हस्तांतरण सरकार को लाभांश के रूप में करता है। लाभांश के हस्तांतरण को लेकर पिछले कुछ साल से रिजर्व बैंंक और सरकार के बीच विवाद रहा है।  इस समय सेबी जुर्मानों से मिली राशि केंद्र सरकार को हस्तांतरित करता है। बहरहाल अनुदानों, शुल्कों व अन्य मद से आने वाली राशि सेबी के जनरल फंड का हिसस्सा होती है और वह नियामक के पास रहती है। इस धन का इस्तेमाल सेबी कर्मचारियों के वेतन व भत्तों के भुगतान, बोर्ड के खर्च व अन्य कामों में करता है। 
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