बिजनेस स्टैंडर्ड - सीओसी की मंजूर योजना क्या एनसीएलएटी बदल सकता है?
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सीओसी की मंजूर योजना क्या एनसीएलएटी बदल सकता है?

आशिष आर्यन / नई दिल्ली July 16, 2019

क्या नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) लेनदारों की समिति की तरफ से किसी कर्जदार के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया के मामले में लिए गए वाणिज्यिक फैसले में हस्तक्षेप कर सकता है? क्या एनसीएलएटी या एनसीएलटी के पास लेनदारों की तरफ से मंजूर योजना की समीक्षा या इस फैसला बदलने का न्यायाधिकार क्षेत्र है? भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले एस्सार स्टील के लेनदारों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिका में ये सवाल उठाए हैं। अपनी याचिका में एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल की बोली को मंजूरी देने के एनसीएलएटी के फैसले को चुनौती दी गई है और सीओसी ने कहा है कि अपील ट्रिब्यूनल के फैसले ने एस्सार स्टील की पूरी कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया पर संकट के घेरे में ला दिया और यह फैसला झटका देने वाला है।
 
लेनदारों ने अपनी याचिका में कहा है, यह फैसला दिवालिया संहिता के प्रावधानों की इस हद तक गलत व्याख्या करता है कि मानो वह खुद ही नए सिरे से कानून लिख रहा हो। इस तरह दोषपूर्ण क्षेत्राधिकार की समस्या पैदा होती है। 4 जुलाई को एनसीएलएटी ने शर्तों के साथ एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल की योजना को मंजूरी दी थी। अपने फैसले में अपील ट्रिब्यूनल ने कहा था कि आर्सेलरमित्तल की तरफ से सौंपी गई 42,000 करोड़ रुपये की योजना में वित्तीय लेनदारों को करीब 30,030 करोड़ रुपये मिलेंगे, वहीं परिचालक लेनदारों को 12,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दोनोंं तरह के लेनदारोंं को उनके स्वीकार्य दावे का 60.7 फीसदी मिलेगा।
 
ट्रिब्यूनल में न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अगुआई वाले दो सदस्यीय पीठ ने तब सीओसी को परिचालक लेनदारों और अन्य वित्तीय लेनदारों मसलन स्टैंडर्ड चार्टर्ड के बीच विभेद पर फटकार लगाई थी। एनसीएलएटी ने कहा था, सीओसी के पास यह फैसला लेने का अधिकार नहीं है कि एक व अन्य लेनदारों के बीच वितरण किस तरह से होगा।  एनसीएलएटी की इस राय को चुनौती देते हुए लेनदारों ने अपनी याचिका में कहा है कि अगर उनके पास बोलीदाताओं की तरफ से जमा कराई गई योजना पर फैसला लेने की शक्ति नहीं है तो यह किसी समाधान योजना की मंजूरी के मामले में उनकी भूमिका व शक्ति को प्रभावी तौर से अलग कर देगा।
 
सीओसी ने कहा, परिचालक लेनदारों व वित्तीय लेनदारों को समान मानने के अपील ट्रिब्यूनल के फैसले से कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में बैंकों व वित्तीय संस्थानों की रिकवरी दर में भारी गिरावट लाएगा और इससे वे वित्तीय दबाव में आ सकते हैं। इसके अलावा सीओसी ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा है कि क्या लेनदारों की तरफ से मंजूर समाधान योजना में एनसीएलएटी एकपक्षीय बदलाव कर सकता हैय यानी सीओसी या समाधान आवेदक की मंजूरी के बिना क्या वह ऐसा कर सकता है। लेनदारों ने सर्वोच्च न्यायालय से यह भी जानना चाहा है कि क्या उनके पास समाधान योजना से मिलने वाली रकम के वितरण पर फैसला लेने का विशेष अधिकार है, जिस योजना को उन्होंने मंजूरी दी है।
Keyword: COC, NCLT, essar steel,,
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