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कृत्रिम मेधा से कृषि क्षेत्र में भी हो सकता है चमत्कार

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  July 16, 2019

भारतीय कृषि क्षेत्र में कृत्रिम मेधा या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) बड़ी तेजी से अपनी जगह बनाती जा रही है। किसान जिस सहजता से इस उन्नत तकनीक को अपना रहे हैं, वह दर्शाता है कि यह बहुत जल्द किसानों के लिए एक बड़ी पेशेवर मार्गदर्शक बन जाएगी। कृत्रिम मेधा में किसानों की बढ़ती रुचि का एक प्रमुख कारण खेती के परंपरागत तरीकों के बजाय स्मार्ट कृषि की तरफ बढ़ता रुझान है। कृषि को स्मार्ट बनाने के लिए परंपरागत समझ एवं ज्ञान से अलग सूचनाओं एवं समझ की जरूरत है। किसानों को अब भरोसेमंद, आगे की तरफ देखने वाली एवं समस्या दूर करने वाली सलाह की जरूरत है और यह मकसद कृत्रिम मेधा से ही पूरा हो सकता है। ग्रामीण युवा खासकर पढ़े-लिखे युवा मशीनीकृत, तकनीक-संवद्र्धित उच्च मूल्य वाली कृषि के साथ खुद को अधिक सहज महसूस करता है। उनके पूर्वज परंपरागत ज्ञान पर आधारित खेती करते रहे हैं जो काफी थकाऊ भी होती है।

 
मोबाइल फोन की देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंच काफी अधिक हो चुकी है। करीब तीन करोड़ किसानों के पास ऐसे फोन पहले से ही मौजूद होने का अनुमान है और यह संख्या बड़ी तेजी से बढऩे वाली है। इस तरह कृत्रिम मेधा सेवा प्रदाताओं के लिए जमीनी आधार तैयार हो चुका है। कृषि शोध में लगे सरकारी संस्थान, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां और कृषि क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप परिस्थिति के मुताबिक एवं जरूरत-आधारित जानकारियां किसानों तक पहुंचा सकते हैं। आंध्र प्रदेश में फसलों की बुआई, भूमि प्रबंधन और खाद के इस्तेमाल जैसे मामलों में सलाहकारी सेवाएं देने में दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट भारतीय किसानों के साथ मिलकर काम कर रही है। एक अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनी आईबीएम इंडिया की भारतीय इकाई ने गत दिनों कृषि मंत्रालय के साथ अभिरुचि वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत कृषि में कृत्रिम मेधा एवं मौसम तकनीक पर आधारित समाधानों के उपयोग को लेकर एक पायलट परियोजना चलाई जाएगी। यह परियोजना मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के एक-एक जिले में चलाई जाएगी।
 
इसके अलावा बड़े पैमाने पर स्टार्टअप भी कृषि से जुड़े कई अहम क्षेत्रों में अगली पीढ़ी की तकनीकों को प्रसारित करने में लगे हुए हैं। कुछ स्टार्टअप सेंसर एवं सूचना प्रौद्योगिकी साधनों का इस्तेमाल कर फसलों एवं मिट्टी की सेहत पर नजर रख रही हैं जिससे किसानों को ही लाभ हो रहा है। वहीं कुछ स्टार्टअप फसलों की बुआई के सही समय के बारे में डेटा-आधारित सलाह देने और फसल से जुड़े जोखिमों के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। वहीं कृषि स्टार्टअप का एक समूह कृषि गतिविधियों की इनपुट आपूर्ति और आउटपुट मार्केटिंग शृंखलों के बारे आंकड़े जुटाने, उनके विश्लेषण और सूचनाएं देने का काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि कृषि मंत्रालय की तरह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय भी किसानों की उपज बढ़ाने और उनके मुनाफे में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ाने के लिए कृत्रिम मेधा तकनीक को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। 
 
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए साधन एवं तरीके सुझाने के मकसद से गठित की गई अंतर-मंत्रालय समिति ने इस बात पर बल दिया है कि भारतीय कृषि को लुभावना बनाने में डिजिटल तकनीक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कृषि मंत्रालय द्वारा गठित इस समिति ने यह लक्ष्य हासिल करने के लिए कृत्रिम मेधा, डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन तकनीक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) को मददगार बताया है। आईसीएआर ने हाल ही में अपने लोकप्रिय प्रकाशन 'इंडियन फार्मिंग' का एक विशेष संस्करण निकाला था जिसे खास तौर पर कृत्रिम मेधा को समर्पित किया गया था। कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की शीर्ष संस्था आईसीएआर किसानों के इस्तेमाल में आसान 100 से अधिक मोबाइल ऐप के विकास में अहम भूमिका निभाई है। इनमें से 42 मोबाइल ऐप का संबंध मुख्य रूप से कृषि, 27 ऐप का संबंध बागवानी, 10 का संबंध पशुपालन एवं पशु चिकित्सा, छह का संबंध दुग्ध उत्पादन, तीन ऐप का नाता मत्स्य-पालन, 17 का संबंध प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और 11 ऐप का नाता एकीकृत खेती प्रणालियों से है। इन सभी ऐप के जरिये किसान एवं संबद्ध गतिविधियों में लगे लोगों को उपज बढ़ाने के तौर-तरीके, विभिन्न कृषि उत्पादों की कीमतों, मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी और दूसरी तरह की सलाहकारी जानकारी मिल जाती है।
 
'किसान सुविधा' मोबाइल ऐप आधुनिक खेती के लगभग हरेक पहलू के बारे में उपयोगी सूचना मुहैया कराने वाला एक समग्र पोर्टल है। इस ऐप पर मौसम से जुड़ी जानकारी, भारी बारिश, तूफान एवं सूखे जैसे प्रतिकूल हालात के बारे में चेतावनी, बाजार में उपज की कीमत, फसल को कीट-पतंगों से बचाने के तरीके बताने वाली सामग्री उपलब्ध है। इसके अलावा बीज, कीटनाशक, उर्वरक एवं कृषि मशीनरी के वितरकों के बारे में भी जानकारी मिल जाती है। बुआई से पहले मिट्टी की सेहत जांचने, शीत भंडार गृहों एवं गोदामों की मौजूदगी और मवेशियों का इलाज करने वाले केंद्रों एवं निदान केंद्रों के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। किसान सुविधा ऐप के जरियेे किसी फसल उपज की मौजूदा कीमतों और आगे पैदा होने वाली मांग के रुझानों से संबंंधित जानकारी दी जाती है। किसान इस जानकारी के आधार पर अपनी उपज बेचने के सही समय एवं सही भाव का फैसला कर सकते हैं। इसी तरह का एक और ऐप 'एमकिसान' है जो पंजीकृत किसानों को एसएमएस और स्थानीय भाषाओं में वॉयस संदेश के जरिये कृषि से संबंधित सलाह देता है। हालांकि भारतीय कृषि क्षेत्र में कृषि मेधा के अनुप्रयोग का यह अभी शुरुआती दौर है। लेकिन इसके प्रभावी ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए यही लगता है कि कृषि में भी कृत्रिम मेधा का भविष्य उम्मीदों से भरा हुआ है। 
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, IMD, startup,,
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