बिजनेस स्टैंडर्ड - दोनों तरह के लेनदारों को समान मानने पर बैंकों को चिंता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, December 06, 2019 04:14 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

दोनों तरह के लेनदारों को समान मानने पर बैंकों को चिंता

ईशिता आयान दत्त और नम्रता आचार्य / कोलकाता July 15, 2019

नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के आदेश से बैंकरों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। इस आदेश में एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल की बोली को हरी झंडी दी गई है और वित्तीय तथा परिचालन बकाएदारों को समान रखा गया है जिससे बैंक इसे लेकर आशंकित हैं कि ऋण के समाधान के लिए इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) का इस्तेमाल किया जाए या नहीं। एस्सार के लिए लगभग दो वर्षीय कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया को सीमित करने के बजाय आईबीसी व्यवस्था को विभाजित करने और ऋणदाताओं को सर्वोच्च न्यायालय के पास भेजने का आदेश दिया गया। 
 
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय आईबीसी के लिए काफी हद तक नकारात्मक था।  एस्सार में सबसे ज्यादा निवेश वाले एसबीआई ने लेनदारों की समिति की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। अन्य बैंक एसबीआई का अनुकरण कर रहे हैं। सिंडिकेट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी मृत्युंजय महापात्र ने कहा, 'बैंकरों के तौर पर, हम सब एसबीआई की याचिका का समर्थन कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने शुरू में वित्तीय लेनदारों के समान दर्जा मांगने के लिए परिचालन लेनदारों द्वारा दायर की गई याचिका को ठुकरा दिया था।'
 
यूको बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी ए के गोयल ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा, 'बैंक के तौर पर, हम चाहेंगे कि परिचालन और वित्तीय लेनदारों के साथ समान व्यवहार किया जाए।' एस्सार के लिए प्रमुख ऋणदाताओं में से एक ने इस बारे में ज्यादा टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, '5 जून के आरबीआई सर्कुलर के अनुसार वसूली के लिए कई विकल्प हैं- परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों को ऋण बेचना, पुनर्गठन और प्रबंधन में बदलाव लाना। तो फिर बैंकों को आईबीसी का चयन क्यों करना चाहिए? यदि सर्वोच्च न्यायालय यह आदेश देता है तो आईबीसी प्रवर्तकों के लिए महज एक खबरा बना रहेगा।' एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने हाल में कहा कि एनसीएलएटी का फैसला बैंकों को दिवालिया प्रक्रिया के लिए फंसे कर्ज के मामलों को लेने से हतोत्साहित करेगा।
 
उन्होंने यह भी कहा कि लेनदारों के दो अलग अलग वर्गों को कंपनीज ऐक्ट और धारा 230 के तहत मान्यता मिलेगी। मतदान लेनदारों के अलग अलग वर्गों के लिए एक समान नहीं है। एलऐंडएल पार्टनस में वरिष्ठï पार्टनर मोहित सराफ का मानना है कि इस आदेश से भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह अस्पष्टï होगी। उन्होंने कहा कि इस आदेश से सुरक्षित लेनदारों के अधिकारों पर खतरा पैदा हुआ है, जो भारत की कानून व्यवस्था के विरुद्घ है, और कई विदेशी बैंक विभिन्न परियोजनाओं के वित्त पोषण को पहले ही टाल चुके हैं।
 
सराफ का कहना है, 'वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में यह स्वीकार किया था कि 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। अक्सर किसी परियोजना का वित्त पोषण 70 प्रतिशत डेट और 30 प्रतिशत इक्विटी के जरिये होता है। नए आदेश को लेकर सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारत में कंपनियां 70 प्रतिशत कर्ज जुटाने में सक्षम नहीं होगी, क्योंकि सुरक्षित लेनदार तब तक पैसा नहीं लगाएंगे जब तक कि उनकी प्राथमिकता को सुरक्षित नहीं बनाया जाए।'
Keyword: NCLAT, essar steel,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

लागत दबाव से वेदांत की समस्याएं बरकरार

Investmentsधातु कीमतों पर दबाव की वजह से पिछले एक साल के दौरान प्रमुख सूचकांकों से

आईसीआईसीआई बैंक की स्थिति में सुधार

निवेशकों को भा रहा इंडसइंड बैंक

मजबूत रियल्टी शेयरों में आएगी तेजी

एमएमसीजी शेयरों से न रखें अधिक आस

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.