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निजी क्षेत्र से आ सकते हैं सरकारी बैंकों में ईडी

बजट में किया गया है बैंकों में कार्यकारी निदेशक बढ़ाने का प्रस्ताव
सोमेश झा / नई दिल्ली 07 15, 2019

बैंकिंग प्रशासन में सुधार

बैंक बोर्ड ब्यूरो की सिफारिश

कम से कम एक कार्यकारी निदेशक संगठन के भीतर का होना चाहिए
ईडी और एमडी व सीईओ पदों की अन्य रिक्तियों के लिए निजी क्षेत्र से आवेदन करने की दी जा सकती है अनुमति

अब तक बैंकों में लेटरल एंट्री

निजी क्षेत्र के दो अधिकारियों पीएस जयकुमार और राकेश शर्मा को क्रमश: बैंक आफ बड़ौदा और केनरा बैंंक का प्रमुख बनाया गया था
अगस्त 2018 और दिसंबर 2018 में दो बार केनरा बैंक के एमडी व सीईओ पद के लिए लेटरल एंट्री के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए, लेकिन मिली सुस्त प्रतिक्रिया

बिजनेस स्टैंडर्ड निजी क्षेत्र से आ सकते हैं सरकारी बैंकों में ईडीप्रशासन में सुधार की पहल के तहत पहली बार केंद्र सरकार निजी क्षेत्र के पेशेवरों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) के बोर्ड में कार्यकारी निदेशकों (ईडी) के रूप में शामिल करने की संभावना तलाश रही है। पहले कदम के रूप में सरकार ने बड़े सरकारी बैंकों में पूर्णकालिक निदेशकों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई को 2019-20 का केंद्रीय बजट पेश करते समय वित्त विधेयक 2019 में किया।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकारी बैंकों में पूर्णकालिक निदेशकों के पद पर विशेषीकृत पदों के सृजन का विचार है। अधिकारी ने कहा कि एक ईडी तकनीक के लिए पदासीन किया जा सकता है और एक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए रखा जा सकता है। यह सरकारी बैंकों को लेकर सरकार के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की नीति के तहत नजर आता है, जिसके तहत एमएसएमई को प्राथमिकता के आधार पर कर्ज देना और ग्राहकोंं की जरूरतों के आधार पर व्यवस्था को मुख्यधारा में लाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शामिल है।

अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'सरकार की योजना एमएसएमई या खुदरा, तकनीक, जोखिम, खजाने व क्रेडिट के लिए समर्पित ईडी की नियुक्ति के माध्यम से सरकारी बैंकों के बोर्ड को मजबूत करने की है। तकनीक के लिए निजी क्षेत्र से विशेषज्ञ लेने को लेकर हमारे विकल्प खुले हैं।'

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पदों पर लेटरल एंट्री के माध्यम से पेशेवरों की नियुक्ति की है। 2015 में सरकार ने निजी क्षेत्र के दो पेशेवरों पीएस जयकुमार और और राकेश शर्मा को सरकारी बैंकों के प्रमुख के रूप में चुना था। जयकुमार दो दशक तक सिटी ग्रुप से जुड़े थे और उन्हें बैंक आफ बड़ौदा का मुख्य कार्यकारी बनाया था। वहीं लक्ष्मी विलास बैंक के मुख्य कार्यकारी राकेश शर्मा को केनरा बैंक का प्रमुख बनाया गया था। उस समय सरकार को 9 आवेदन मिले थे, लेकिन 2 अभ्यर्थियों को ही योग्य पाया गया था।

केनरा बैंक में एमडी और सीईओ पद पर लेटरल भर्ती के लिए सरकार ने 2018 में दो बार विज्ञापन दिए। बहरहाल यह पाया गया कि दोनों मौकों पर उम्मीद से कम प्रतिक्रिया मिली। इसकी वजह से निजी क्षेत्र के पेशेवरों की भर्ती का विचार छोड़ दिया गया। अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख ने कहा, 'सरकारी बैंकों में लेटरल भर्ती स्वागत योग्य कदम है। बहरहाल सरकार को निजी क्षेत्र से प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए आकर्षक पैकेज की पेशकश करनी होगी, साथ ही उन्हें बगैर डर भय के फैसले करने का अधिकार देना होगा, जिससे वे जांच एजेंसियों के शिकार न बनने पाएं।'  उन्होंने कहा कि सरकार को टुकड़ों में कदम उठाने के बजाय प्रशासन की पूरी गतिविधियोंं की समीक्षा करनी चाहिए।

इस माह की शुरुआत में अपने लंबे बजट भाषण में सीतारमण ने कहा था कि सरकारी बैंकों में प्रशासनिक सुधार के लिए सरकार सुधार की पहल करेगी। मुंबई के एक सरकारी बैंंक के कार्यकारी निदेशक ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'पीएसबी बोर्ड का आकार बढ़ाना बेहतर विचार है क्योंकि इससे विशेषज्ञ पूर्णकालिक निदेशक शामिल होंगे और इससे निजी क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। ऐसे में यह और अहम है, जब सरकार विलय के माध्मय से बड़े बैंक बनाने पर काम कर रही है।'  बहरहाल उन्होंने ईडी पद पर लेटरल एंट्री के विचार का विरोध किया और तर्क दिया कि 'सरकारी बैंकों में योग्य अधिकारियों की कोई कमी नहीं है।' 

बैंकिंग कंपनी अधिनियम 1970 और 1980 के मुताबिक सरकारी बैंकों के बोर्ड में 11 निदेशक रखे जाने की अनुमति है। सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक इसका अपवाद है, जो एसबीआई ऐक्ट 1955 के मुताबिक चलता है और उसमें कुल 14 बोर्ड सदस्य हो सकते हैं। बैंक्स बोर्ड ब्यूरो की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार पूर्णकालिक निदेशकों की नियुक्ति करती है। सरकारी बैंक के बोर्डों में सरकार और रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि व एक चार्टर्ड एकाउंटेंड व कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

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