बिजनेस स्टैंडर्ड - बीओटी में बदलाव कर राहत की तैयारी
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बीओटी में बदलाव कर राहत की तैयारी

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली July 15, 2019

मौजूदा ढांचा

बीओटी में कंपनी को पूर्व निर्धारित परियोजना लागत पर 20 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के साथ रिटर्न लेने की है अनुमति
अधिकांश मामलों में यह अवधि 30 साल की है
अगर कंपनी पूर्व निर्धारित परियोजना लागत निकालने में नाकाम रहती है तो इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है
अवधि बढ़ाए जाने के बाद भी कंपनी का राजस्व कम रहता है तो उसे परियोजना के आसपास विकास का मिलता है अधिकार

बिजनेस स्टैंडर्ड बीओटी में बदलाव कर राहत की तैयारीकेंद्र सरकार बनाओ-चलाओ-लौटाओ (बीओटी) परियोजनाओं के लिए नए नियम बनाने की तैयारी कर रही है। इनके तहत निर्माण कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कुछ राहत दी जा सकती है जिनमें दो साल बाद परियोजना से बाहर निकलने का प्रावधान शामिल है। सूत्रों के मुताबिक निर्माण कंपनियों को परियोजना पूरी होने और दो साल चलाने के बाद इसे दूसरी कंपनी को बेचने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को आकर्षित करने के लिए मौजूदा प्रावधानों में संशोधन पर विचार किया जा रहा है। परियोजना से निकलने के प्रावधान से निर्माण कंपनियों को परियोजना पूरी होने के बाद विदेशी निवेशक लाने की अनुमति मिलेगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के बीच कैबिनेट नोट तैयार करने से पहले बीओटी नियमों में संशोधन के मुद्दे पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है। एक अधिकारी के मुताबिक 2009 के मॉडल कंसेसियनार एग्रीमेंट में प्रस्तावित 'सांमजस्यपूर्ण प्रतिस्थापन'  प्रावधान पर नए बीओटी परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है।

आदर्श समझौते के तहत राजमार्ग निर्माण कंपनी दो साल के लिए निर्माण और संचालन जोखिम लेगी और उसके बाद परियोजना को विदेशी पेंशन फंड या निवेश फंड को हस्तांतरित किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा, 'इन वैश्विक पेंशन फंडों या निवेश फंडों की  परियोजनाओं के निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे केवल पूरी तरह तैयार और चालू परियोजनाओं में निवेश करना चाहते हैं। वे केवल इन परियोजनाओं का संचालन और मरम्मत करना चाहते हैं।'  राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कई बार कह चुके हैं कि बीओटी देश में सड़क निर्माण के लिए सबसे पसंदीदा माध्यम होगा।

राजमार्ग बनाने के लिए फिर से बीओटी का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए जल्दी ही कुल 3,000 किमी की सड़क परियोजनाओं की निविदा जारी की जाएगी। गडकरी के मुताबिक राजमार्ग निर्माण में निजी क्षेत्र को लाने के लिए सरकार ने 3,000 किमी राजमार्ग को चिह्निïत किया है जिसमें 17,000 पीसीयू (यात्री कार यूनिट) यातायात है। इसे बीओटी के तहत दिया जाएगा।

क्रिसिल इन्फ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में कहा कि बुनियादी ढांचे में सरकारी-निजी भागीदारी को बहाल करना और इसमें तेजी लाना वक्त की जरूरत है और निजी निवेश का रास्ता साफ करने के लिए पीपीपी ढांचे पर नए सिरे से काम करना होगा।क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक बुनियादी क्षेत्र में कई परियोजनाएं रुकी हुई हैं जिसके कारण इसमें निवेशकों की दिलचस्पी कम हो गई है। इस वजह से पिछले दशक के दौरान इसमें निजी निवेश में काफी कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी निवेश लाना समय की जरूरत है और इस लक्ष्य को बीओटी से हासिल किया जा सकता है।

बीओटी में यातायात बढऩे से राजस्व बढ़ता है और यह ऐसा नपातुला जोखिम है जिसे निजी क्षेत्र उठाना चाहता है। बुनियादी परियोजनाओं के निर्माण, वित्तपोषण और संचालन के लिए बीओटी व्यवस्था खासकर सड़क परियोजनाओं के अनुकूल है क्योंकि इसमें मुख्य परिसंपत्तियों जैसे सड़क, पुल और राजमार्ग का मालिकाना हक निजी कंपनी के पास नहीं रहता है। पहले बीओटी के जरिये निजी भागीदारी इसलिए प्रभावित हुई क्योंकि निजी कंपनियों ने इसमें निवेश की दिलचस्पी नहीं दिखाई। साथ ही भूमि अधिग्रहण और नियामकीय मंजूरियां मिलने में देरी हुई।

Keyword: Foreign Investors, BOT, Projects, Road, Transport, बीओटी, परियोजना, राजस्व, एनएचएआई, कैबिनेट नोट, सड़क निर्माण,
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