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'कर्नाटक में गठबंधन सरकार उबर जाएगी मौजूदा संकट से'

अर्चिस मोहन /  July 14, 2019

आईआईएम बेंगलूर के पूर्व प्राध्यापक एवं कर्नाटक से कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य एम वी राजीव गौड़ा का मानना है कि कांगेस-जनता दल (एस) सरकार मौजूदा अस्थिरता से पार पा लेगी। बजट पर गौड़ा ने कहा कि इसमें भारत पर 'आर्थिक मंदी' हावी होने से रोकने के खास उपाय नहीं किए गए हैं। अर्चिस मोहन ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बात की। बातचीत के अंश: 

 
कर्नाटक की राजनीति में आई उथल-पुथल को आप किस तरह देखते हैं?
 
मुझे लगता है कि राज्य में मौजूदा गठबंधन सरकार इस मुसीबत से बाहर निकल जाएगी और संभवत: विश्वास मत पाने में सफल रहेगी। शुरुआत के मुकाबले अब राज्य सरकार बेहतर हालत में लग रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार गिराने में पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन राज्य में स्वयं इस पार्टी में बिखराव है। 
 
कांग्रेस-जेडीएस ने मौजूदा संकट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन गठबंधन और स्वयं कांग्रेस में गुटबाजी से भी तो इनकार नहीं किया जा सकता?
 
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कई चीजें हुई हैं। भाजपा की राज्य में जीत के बाद कुछ लोगों को लगता है कि डराने-धमकाने की उनकी ताकत अब बढ़ गई है। उन्हें लगता है कि इस्तीफा देने पर अड़े विधायकों को हथियार बना कर वे सरकार गिरा देंगे। हालांकि इन विधायकों को उनके सदस्यता के अयोग्य होने का डर भी सता रहेगा। 
 
कर्नाटक के अलावा गोवा और तेलंगाना में भी कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। क्या ये घटनाक्रम पार्टी में निराशा हावी होने के संकेत नहीं दे रहे हैं?
 
नहीं, बिल्कुल नहीं। जहां तक गोवा की बात है तो राज्य में दो लोकसभा सीटों में एक पर हम विजयी रहे। जो विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं, उनमें ज्यादातर ईसाई हैं, जिन्हें कांग्रेस के जनाधार से लाभ मिला था, लेकिन अब मंत्री बनने के लिए उन्होंने अवसरवादी रवैया अपनाया है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लगभग वजह ऐसी ही है। लोग तत्काल ओहदा (मंत्री बनने के लिए) पाने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। 
 
आपने राज्य सभा में बजट चर्चा में कहा है कि देश मंदी के मुहाने पर खड़ा है। यह तर्क कितना खड़ा है जब सरकार ने बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया है?
 
वाकई! दरअसल यह सबसे बड़ा जुमला है। जब सरकार से पूछा गया कि यह रकम कहां से आएगी तो इसके जवाब में उन्होंने इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। पिछली चार तिमाहियों से जीडीपी में लगातार गिरावट आ रही है। सभी आर्थिक संकेतक सुस्ती की ओर इशारा कर रहे हैं। इन बातों के बावजूद सरकार 8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने और देश को 5 लाख डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने जैसी बातें कर रही है। कुल मिलाकर मंदी की बात मैं नहीं कर रहा बल्कि उद्योग जगत से ऐसी चिंताएं जताई जा रही हैं।
 
संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने विनिवेश को एक बड़ा जरिया बनाने का फैसला किया है। आपको क्यों लगता है कि सरकार के पास कोई रणनीति नहीं है?
 
विनिवेश के मोर्चे पर आप इस सरकार के पुराने काम-काज को देख लें। विनिवेश के नाम पर ओएनजीसी और एलआईसी ने सरकारी उपक्रमों में हिस्सेदारी खरीद ली थी। मैं यह नहीं कहता कि यह सरकार विनिवेश करने में सक्षम नहीं है, लेकिन वे प्रभावी ढंग से कुछ नहीं कर रहे हैं। विनिवेश के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। मेरी दिलचस्पी बात इन बातों में होगी कि एयर इंडिया या जेट एयरवेज को कौन खरीदने के लिए आगे आता है। 
 
बिना पूर्व अनुमति के वित्त मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। इसे कैसे देखते हैं?
 
यह सरकार प्रेस की आजादी पर लगातार हमले कर रही है और यह हालिया कदम इसी का हिस्सा है। सरकार ने समाचार पत्रों के कागज पर शुल्क बढ़ाने के साथ ही कुछ मीडिया संस्थानों को विज्ञापन देने भी बंद कर दिए हैं। 
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