बिजनेस स्टैंडर्ड - जेवर हवाई अड्डे में देरी क्यों?
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जेवर हवाई अड्डे में देरी क्यों?

सुरजीत दास गुप्ता /  July 14, 2019

उत्तर प्रदेश के जेवर में नए हवाई अड्डे के लिए संभावित बोलीदाताओं को बोली से पहले की बैठक के लिए 15 जुलाई को बुलाया गया है ताकि उनके संदेह दूर किए जा सकें। यह हवाई अड्डा सार्वजनिक-निजी भागीदारी में बनेगा। इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और मथुरा, मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर जैसे पड़ोसी शहरों के लोगों के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, जिनके पास अभी केवल तीन टर्मिनलों वाले दिल्ली हवाई अड्डे का ही विकल्प है। दिल्ली हवाई अड्डा जेवर से करीब 80 किलोमीटर दूर है। 

 
दिल्ली में यात्री भार बढ़ता जा रहा है और महज तीन रनवे होने से इसकी क्षमता पर दबाव है। इस हवाई अड्डे पर वित्त वर्ष 2019 में करीब 7 करोड़ यात्रियों की आवाजाही हुई।  जेवर हवाई अड्डा परियोजना का कामकाज नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) देख रही है। नायल ने प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) द्वारा सुझाई गई तारीख के आधार पर शुरुआत में अप्रैल 2023 तक हवाई अड्डे का काम पूरा होने की बात कही थी। पीडब्ल्यूसी ने परियोजना के लिए तकनीकी-आर्थिक सर्वेक्षण किया है। लेकिन अब ज्यादातर सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस तारीख को आगे बढ़ाकर 2024 किया जाएगा क्योंकि भूमि अधिग्रहण का काम अभी चल ही रहा है। इसके अलावा 31 मार्च, 2019 तक परियोजना के फाइनैंशियल क्लोजर की अंतिम तिथि को निकले काफी समय बीत चुका है। हालांकि नायल तेजी से आगे बढ़ रही है। यह नवंबर तक बोलियों का काम निपटाने और जनवरी, 2020 तक परियोजना को आवंटित करना चाहती है। 
 
बोली लगाने में रुचि रखने वाली संभावित बुनियादी ढांचा कंपनियां जिस असमंजस में फंसी हुई हैं, वह यह है कि क्या जेवर हवाई अड्डा 2024 तक व्यावहारिक होगा। बहुत से लोगों का कहना है कि यह हवाई अड्डा तभी बनना चाहिए, जब दिल्ली हवाई की क्षमता में की गई भारी बढ़ोतरी का पूरा इस्तेमाल होने लगे। एक हवाई अड्ड़ा बुनियादी ढांचा कंपनी के एक शीर्ष कार्याधिकारी ने कहा, 'इस बारे में विचार नहीं किया जा रहा है कि दिल्ली को दूसरे हवाई अड्डे की जरूरत है या नहीं। लेकिन मुद्दा यह है कि क्या यह 2024 तक चालू हो जाना चाहिए या कम से कम तीन से पांच साल बाद चालू होना चाहिए, जब दिल्ली हवाई अड्डे की पूरी क्षमता होने के कारण पर्याप्त मांग हो। अन्यथा बड़ा निवेश अनुपयोगी बना रहेगा, इसलिए जल्दबाजी की क्या जरूरत है?'
 
उनकी बात में दम है। दरअसल दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) अपनी क्षमता प्रति वर्ष 7 करोड़ यात्रियों से बढ़ाकर 13 करोड़ (दोनों-आगमन एवं प्रस्थान) करने के लिए व्यापक विस्तार कर रही है। डायल ने सरकार से कहा है कि इतनी क्षमता वर्ष 2034 तक दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों के यात्री भार को संभालने के लिए पर्याप्त है। कंपनी का यह कहना इस तथ्य पर आधारित है कि दिल्ली में पिछले पांच वर्षों के दौरान यात्रियों की संख्या में सालाना वृद्धि 10 से 11 फीसदी रही है और यात्री आधार बढऩे पर वृद्धि में कमी आने के आसार हैं। 
 
इसलिए डायल का क्या सुझाव है? सूत्रों के मुताबिक डायल ने पहले चरण का विस्तार शुरू कर दिया है, जिससे मार्च, 2021 तक सालाना यात्री क्षमता 7 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ हो जाएगी। यह हवाई अड्डा चौथा रनवे बना रहा है और टर्मिनल आईडी का विस्तार कर रहा है। इसके अलावा एक क्रॉस टैक्सीवे का निर्माण किया जा रहा है। इससे व्यस्त समय में प्रस्थान और आवक के लिए उपलब्ध स्लॉटों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। अगले चरण में एक चौथा टर्मिनल बनाया जाएगा, जिससे यात्री क्षमता बढ़कर 11.6 करोड़ हो जाएगी और फिर 13 करोड़ हो जाएगी। 
 
अगर यह योजना सही है तो जेवर की क्या उपयोगिता रहेगी? प्रस्ताव आग्रह (आरपीएफ) के आधार पर जेवर हवाई अड्डे के पहले चरण की क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी, जो वर्ष 2039 तक बढ़कर 7 करोड़ पर पहुंच जाएगी। नायल के मुताबिक पहले चरण की लागत 4,588 करोड़ रुपये आएगी। पीडब्ल्यूसी का मानना है कि जेवर हवाई अड्डा के वांछित नतीजे मिलेंगे। पीडब्ल्यूसी ने नायल के लिए व्यवहारिकता रिपोर्ट तैयार की है। पीडब्ल्यूसी का मानना है कि शुरुआत में दिल्ली में व्यस्त समय में ज्यादा अधिक यात्री भार होने से यह जेवर में जाएगा। इसलिए जेवर हवाई अड्डा पहले साल 49 लाख यात्री हासिल कर पाएगा, जो 2029 तक बढ़कर 1.4 करोड़ हो जाएंगे। इसका अनुमान है कि वर्ष 2029-30 तक दिल्ली हवाई अड्डे की पूरी क्षमता का इस्तेमाल होने से अतिरिक्त यात्री भार में अहम इजाफा होगा। 
 
पीडब्ल्यूसी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए जेवर नजदीकी हवाई अड्डा रहेगाा। उन्होंने दिल्ली हवाई अड्डे के यात्रियों के ब्योरों की पड़ताल की है, जिसके मुताबिक इस समय 57 फीसदी यात्री दिल्ली एनसीआर से आते हैं, जबकि 11 से 12 फीसदी उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद और आगरा जैसे जिलों से आते हैं। इसके अलावा दिल्ली आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में से 18 फीसदी आगरा जाते हैं और उनमें से 60 फीसदी चाहते हैं कि उनके गंतव्य स्थल के नजदीक कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हो। इसने यह भी कहा है कि वर्ष 2029-30 तक ग्रामीण क्षेत्रों से हवाई यात्रा की मांग सालाना 11.5 करोड़ पर पहुंच जाएगी और इन यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा जेवर के जरिये यात्रा करेगा। 
 
यहां तक कि विमानन कंपनियां, विशेष रूप से बजट विमानन कंपनियां भी व्यस्त समय में दिल्ली की तुलना में जेवर से उड़ान लेने वाले ग्राहकों को अलग दाम में टिकट देने में मौके देख रही हैं। लेकिन वे इस बात को स्वीकार करती हैं कि उन्हें इस क्षेत्र से पर्याप्त तादाद में यात्री मिलने की जरूरत होगी, तभी वे विशेष मार्गों पर उड़ान शुरू कर पाएंगी।  यह बहस जिस चीज से रोचक बन जाती है वह यह है कि यह हवाई अड्डा दिल्ली से 150 किलोमीटर से कम दूर है। इसलिए नियमों के हिसाब से डायल को यह हवाई अड्डा बनाने के लिए इनकार करने का सीमित पहला अधिकार मिलेगा। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि अगर इसकी प्रति यात्री राजस्व की बोली सबसे ऊंची बोली के 10 फीसदी के भीतर रही तो उसे अपनी बोली उस बोली के बराबर करने का मौका मिलेगा। अगर डायल बोली जीतता है तो यह सवाल पैदा होगा कि उसके लिए दिल्ली हवाई अड्डे का विस्तार करना कितना सही होगा, जो इस समय जोर-शोर से चल रहा है। अगर डायल बोली नहीं जीतता है तो यह देखना रोचक होगा कि नया खिलाड़ी कैसे जेवर को व्यावहारिक कारोबारी मॉडल बनाता है या दोनों परियोजना को वाणिज्यिक रूप से देरी से शुरू होते देखना चाहेंगे? 
Keyword: aviation, flight, airport, jewar,,
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