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न्यूनतम शेयरधारिता बढ़ाने से सरकार को ज्यादा फायदा !

समी मोडक /  July 14, 2019

वैश्विक सूचकांकों में ज्यादा भारांक, बेहतर कीमत सुधार, अल्पांश शेयरधारकों पर अधिक नियंत्रण और प्रवर्तकों द्वारा दर्ज दीर्घावधि पूंजी लाभ (एलटीसीजी) पर अप्रत्याशित कर ऐसे लाभ में शामिल हैं जिन पर सूचीबद्घ कंपनियों में न्यूनतम शेयरधारिता 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने के प्रस्ताव में चर्चा की गई है। अधिक शेयरधारिता से छोटे शेयरधारकों का लाभ समाप्त हो सकता है, हालांकि यह पहल मौजूदा शेयर कीमतों पर सरकार के लिए भी बहुत ज्यादा कर लाभ वाली साबित नहीं हो सकती है। 

 
शेयरधारिता डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि मौजूदा समय में 65 प्रतिशत से अधिक प्रवर्तक हिस्सेदारी वाली कम से कम 1,110 सूचीबद्घ कंपनियां हैं। प्रवर्तक समूह को प्रस्तावित 35 प्रतिशत की सीमा हासिल करने के प्रयास में इन कंपनियों में मौजूदा बाजार दर पर 3.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचने होंगे। चूंकि दीर्घावधि पूंजी लाभ (एलटीसीजी) पर कर 10 प्रतिशत है, इसलिए यह पहल 3.4 लाख करोड़ रुपये की शेयर बिक्री से जुड़ी हुई है जिससे 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर एकत्रित होगा। 
 
जब एलटीसीजी को पिछले साल पेश किया गया था तो सरकार ने 31 जनवरी 2018 से पहले अर्जित लाभ पर 'ग्रांडफादरिंग' (छूट) मुहैया कराई थी। इसका मतलब यह है कि एलटीसीजी वास्तविक शेयर बिक्री कीमत और 31 जनवरी, 2018 के बंद भाव के बीच अंतर पर लागू होगाा। दिलचस्प तथ्य यह है कि जो 1,100 कंपनियां अपनी शेयरधारिता बढ़ा सकती हैं, उनमें से सिर्फ 140 के शेयर भाव 31 जनवरी के बंद भाव से ऊपर हैं।  छूट का लाभ लागू होने के बाद, प्रस्तावित शेयर बिक्री पर एलटीसीजी महज 5,900 करोड़ रुपये बैठता है जो कुल शेयर बिक्री के 2 प्रतिशत से भी कम है। न्यूनतम शेयरधारिता 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करना अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है। यदि यह मंजूर होता है तो क्रियान्वयन में कम से कम दो वर्ष लग जाएंगे, जिससे शेयर भाव मौजूदा स्तरों से चढऩे की स्थिति में एलटीसीजी गणना में बदलाव आ सकता है।
 
केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने कहा, 'हमारी गणना के अनुसार, सरकार के लिए कर लाभ पिछले सप्ताह की कीमत के आधार पर 9,000 करोड़ रुपये है जिसमें अधिभार शामिल नहीं है। हालांकि वास्तविक लाभ काफी ज्यादा हो सकता है क्योंकि ऊंची शेयरधारिता के मानक लागू होने में अभी दो या तीन साल लग सकते हैं।' प्रमुख सूचकांक बजट के बाद से तीन प्रतिशत से ज्यादा नीचे आए हैं, क्योंकि बाजार ने इस अवधि के दौरान कमजोर प्रदर्शन किया है। बाजार नियामक सेबी द्वारा जल्द ही चर्चा पत्र जारी किए जाने की संभावना है जिसमें सूचीबद्घ कंपनियों में सार्वजनिक फ्लोट बढ़ाने के प्रस्ताव पर बाजार की प्रतिक्रिया हासिल की जाएगी। विश्लेषकों का कहना है कि चर्चा पत्र में ऊंची शेयरधारिता के लाभ, अधिग्रहण संहिता और अनुपालन की समय-सीमा के साथ संभावित जटिलताओं जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
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