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आईटी कंपनियों की आय पर दबाव के आसार

श्रीपाद ऑटे /  July 14, 2019

मार्जिन पर लगातार दबाव के साथ साथ गार्टनर की ताजा रिपोर्ट में वैश्विक आईटी खर्च में कमी किए जाने से घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए वृद्घि पर दबाव और आय अनुमानों में कमी के संभावित जोखिम का संकेत मिलता है।  जून तिमाही (पहली तिमाही) के नतीजों के बाद, कई विश्लेषकों ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के लिए वित्त वर्ष 2020 में अपने आय अनुमानों में 2-3 प्रतिशत तक की कटौती की है। उपयुक्त चिंताओं को देखते हुए कंपनी के आय अनुमान में यह कटौती की गई है। इलारा कैपिटल जैसी कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने टीसीएस के लिए रेटिंग 'खरीदें' से घटाकर 'एकत्रित करें' की है। 

 
हालांकि मांग से संबंधित दबाव पिछली एक या दो तिमाहियों से स्पष्ट दिखा है, लेकिन जून में इस दबाव का असर साफ तौर पर देख गया। जेएम फाइनैंशियल का कहना है कि टीसीएस ने पहली तिमाही में राजस्व वृद्घि प्रभावित होने के लिए अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) और रिटेल क्षेत्रों में समस्याओं को जिम्मेदार बताया है। टीसीएस का बीएफएसआई सेक्टर पहली तिमाही में 1.3 प्रतिशत बढ़ा, वहीं मार्च तिमाही में यह वृद्घि 3.1 प्रतिशत थी। हालांकि कंपनी ने अन्य क्षेत्रों की मदद से पहली तिमाही में कॉन्स्टैंट करेंसी (सीसी) संदर्भ में सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत की राजस्व वृद्घि दर्ज की। हालांकि इन्फोसिस की बीएफएसआई और कुल राजस्व वृद्घि पहली तिमाही में अपेक्षाकृत मजबूत रही और उसने वित्त वर्ष 2020 की राजस्व वृद्घि का अनुमान 7.5-9.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.5-10 प्रतिशत कर दिया है। कंपनी ने अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग तथा पूंजी बाजारों में नरमी का संकेत दिया है। 
 
प्रभुदास लीलाधर में विश्लेषक अनिकेत पांडे ने कहा, 'ग्राहक-केंद्रित लाभ से इन्फोसिस को पहली तिमाही में मदद मिली। हालांकि मांग संबंधित चिंताएं पूरे आईटी क्षेत्र के लिए बनी हुई हैं।' इन्फोसिस की डिपोजिटरी रिसीट में शुक्रवार को 6 प्रतिशत की तेजी आई, लेकिन उसे यह रफ्तार बरकरार रखने की जरूरत है। अमेरिका-चीन व्यापारिक युद्घ और ब्रेक्सिट से संबंधित मुद्दों जैसे कारक आईटी खर्च को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं, मुख्य तौर पर अमेरिका और यूरोप में बीएफएसआई क्षेत्र में नया खर्च प्रभावित हो रहा है। 
 
क्षेत्रवार आधार पर बीएफएसआई सेक्टर का भूभागों के संदर्भ में कई बड़ी कंपनियों की राजस्व भागीदारी में लगभग 20 से 30 प्रतिशत का योगदान है और यूरोप तथा अमेरिका का भारतीय आईटी कंपनियों के राजस्व में 80-85 प्रतिशत का योगदान है। दूरसंचार और रिटेल जैसे अन्य सेगमेंट पर भी मांग से संबंधित कुछ दबाव देखा जा रहा है। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के अनुसार, मांग परिदृश्य शेयर प्रतिफल और कीमत-आय (मूल्यांकन) मल्टीपल का बेहद महत्वपूर्ण भविष्यवक्ता है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि निफ्टी का आईटी सूचकांक पिछले तीन महीनों में 4 प्रतिशत गिरा, जबकि बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50 में इस अवधि में महज 0.8 प्रतिशत की कमी आई। घरेलू आईटी क्षेत्र के लिए अन्य प्रमुख चुनौती सख्त लागत ढांचे की वजह से मुनाफे के मोर्चे पर है। ऊंचे सब-कॉन्ट्रैक्टिंग (उप-पट्टा) शुल्कों, प्रतिभा आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं से कर्मचारी लागत बढऩे का संकेत मिलता है और प्रतिकूल मुद्रा विनिमय दरें अल्पावधि मार्जिन दबाव पैदा कर रही हैं। एक विश्लेषक ने कहा कि मुद्रा-आधारित मार्जिन दबाव की भरपाई करना मुश्किल है। 
 
शेयरखान में शोध प्रमुख संजीव होता का कहना है, 'आईटी के लिए यह चुनौतीपूर्ण वर्ष रहने की आशंका है। आईटी मार्जिन में गिरावट का रुझान बना हुआ है, जो आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता है।' दो आईटी कंपनियों - टीसीएस और इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में एबिटा मार्जिन में तिमाही आधार पर 90-94 आधार अंक की कमी दर्ज की।  आईआईएफएल के अनुसार राजस्व मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव के बावजूद, मार्जिन दबाव और कर्मचारियों को रोके रखने की चुनौती इन्फोसिस के मूल्यांकन को प्रभावित कर रही है। ताजा नियामकीय बदलाव भी आईटी शेयरों की रफ्तार प्रभावित कर रहे हैं। बजट घोषणाओं से धारणा प्रभावित हुई है। इनमें शेयर पुनर्खरीद पर 20 प्रतिशत कर और सूचीबद्घ कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया जाना मुख्य रूप से शामिल हैं।  आईआईएफएल के अनुसार, न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से मध्यावधि में आईटी शेयरों पर गतिरोध पैदा हो सकता है। टीसीएस, विप्रो और एलऐंडटी इन्फोटेक की सार्वजनिक शेयरधारिता 35 प्रतिशत से कम है। 
 
वहीं कुछ अच्छे बदलाव भी हैं जिनसे कुछ राहत मिल सकती है, जैसे मार्जिन वृद्घि और डिजिटल व्यवसायों का तेजी से बढऩा। टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों का लगभग 30-40 प्रतिशत राजस्व डिजिटल व्यवसाय से आता है। दूसरी बात, इस्पात और वाहन जैसे अन्य क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन से आईटी में निवेशक अधिक सहज स्थिति महसूस कर सकते हैं। इस प्रकार, आईटी शेयरों में निवेश की संभावना तलाश रहे निवेशकों को अच्छे शेयरों के चयन की सलाह दी जा रही है। एक विश्लेषक का कहना है कि यदि मांग और मार्जिन में सुधार नहीं दिखता है तो आईटी शेयरों की रेटिंग में और कमी आ सकती है। 
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