बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत से ईरान को बासमती निर्यात आया पटरी पर
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भारत से ईरान को बासमती निर्यात आया पटरी पर

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ July 14, 2019

व्यापारिक प्रतिबंधों के उपरांत शुरुआत में बाधाओं का सामना करने के बाद भारत से ईरान को किया जाने वाला बासमती निर्यात फिर से पटरी पर आ गया है। फिलहाल ईरान को कच्चे तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। मई में अमेरिका द्वारा ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारतीय बासमती निर्यातकों ने अनिश्चितता और भुगतान में चूक के डर से हालात पर नजर रखकर इंतजार करते हुए खेपों में मदद करने का विकल्प चुना था। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा निर्यातकों को आश्वासन दिए जाने के बाद अन्य जिंसों के साथ-साथ बासमती का द्विपक्षीय व्यापार फिर से सामान्य हो गया। केंद्र ने यह आश्वासन दिया था कि रुपये पर आधारित विशेष द्विपक्षीय वस्तु विनिमय के लिए पर्याप्त धनराशि है जो भारत को ईरान से तेल आयात और चावल निर्यात की सुविधा प्रदान करता है।
 
अमेरिका ने ईरान पर व्यापार प्रतिबंध लगाते हुए भारत सहित कुछ देशों को ईरान से कच्चे तेल के आयात की सुविधा देने के लिए छूट प्रदान की थी। चूंकि पूर्व निर्धारित शर्त के अनुसार किसी भी द्विपक्षीय व्यापार के लिए ईरान को प्रत्यक्ष धन हस्तांतरित किए जाने पर रोक थी इसलिए भारत ने रुपये के रूप में भुगतान तंत्र स्थापित किया था। इसमें ईरान से कच्चे तेल का आयात करने वाली भारतीय कंपनियों ने दो बैंकों आईडीबीआई बैंक और यूको बैंक में खोले गए विशेष खातों (एस्क्रो एकाउंट) में अपना भुगतान जमा किया था। इसके बदले में इन बैंकों ने भारतीय चावल और दवा निर्यातकों को भुगतान किया था।
 
अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के कार्यकारी निदेशक विनोद कौल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इन विशेष खातों में पर्याप्त धनराशि है। हमें नहीं लगता कि अगले 6-7 महीनों में भुगतान संबंधी कोई बड़ा मसला होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार इस मामले पर विचार कर रही है और उम्मीद है कि निर्यातकों की आशंका को दूर करने और इस मसले को हल करने के लिए कुछ कदम उठाए जाएंगे। चूंकि इस प्रतिबंध में ईरान से केवल तेल आयात पर रोक है इसलिए इस विशेष खाते में भारतीय रिफाइनरों द्वारा और नई राशि जमा नहीं होगी लेकिन उपलब्ध धन का इस्तेमाल भारतीय बासमती निर्यातकों को भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। दरअसल ईरान को किए जाने वाले बासमती निर्यात में तीव्र इजाफा हुआ है। पिछले साल मई 2018 तक लगभग 2,00,000 टन निर्यात किया गया था। इसकी तुलना में इस वर्ष इस अवधि में निर्यात 3,00,000 टन पार कर गया। इस प्रकार इस सीजन में 50 प्रतिशत का इजाफा नजर आया। वर्ष 18-19 में ईरान का निर्यात 85 प्रतिशत बढ़कर 1.56 अरब डॉलर (14 लाख टन) हो गया।
 
पिछले कुछेक सालों से ईरान औसतन 10-11 लाख टन बासमती की खरीद कर रहा है। कच्चे तेल पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ईरान द्वारा स्टॉक बढ़ाने को भी पिछले साल अधिक आयात का जिम्मेदार ठहराया गया था। इस बीच अगर ईरान का मसला गर्म रहता है और भुगतान की स्थिति मजबूत रहती है तो चावल निर्यातक भी आगे बढ़ते हुए अपनी स्थिति सुरक्षित करने के लिए अन्य बाजारों की तलाश करेंगे। कौल ने बताया कि वे संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संबंध में विश्लेषण कर रहे हैं। अगर ईरान को किए जाने वाले बासमती निर्यात में दिक्कत होती है तो निर्यात का रुख इन बाजारों की ओर किया जा सकता है। इन गंतव्यों में दक्षिण पूर्व एशियाई और अफ्रीकी बाजार भी शामिल हैं जहां भारतीय बासमती चावल काफी लोकप्रिय है। उन्होंने कहा कि नवीनतम घटनाक्रम पर नजर रखने तथा अस्पष्टï स्थिति पर और ज्यादा स्पष्टïता के लिए निर्यातक केंद्रीय वाणिज्य और वित्त मंत्रालय के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
Keyword: india, iran, basmati rice, export,,
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