बिजनेस स्टैंडर्ड - समस्याओं में फंसे जौहरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 24, 2019 11:42 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

समस्याओं में फंसे जौहरी

राजेश भयानी / मुंबई July 14, 2019

पिछले पांच सालों से देश में गहनों के लिए सोने की कमजोर मांग अकारण नहीं है। आभूषण उद्योग ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सोने के विपणन पर नहीं, केवल छूट देकर गहनों की बिक्री और प्रोत्साहनों पर ही ध्यान केंद्रित किया है। फिलहाल अधिक दामों की वजह से भारत में सोने की मांग लगभग समाप्त हो चुकी है। मध्य अवधि की मांग में बनी लगातार स्थिरता जौहरियों के लिए चिंता का कारण है क्योंकि चीन में उसके जौहरियों द्वारा नए उत्पादों की शृंखला पेश किए जाने के कारण मांग बढ़ रही है।
 
पिछले पांच सालों के दौरान गहनों के लिए भारत की सोने की मांग लगभग 600 टन रही है, जबकि निवेश मांग घटी है। आईबीजेए के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि स्वर्ण उद्योग को दूसरे उद्योगों से सीखना चाहिए है और ग्राहकों को छूट तथा मुफ्त उपहार देनेे के बजाय सोने के खरीदारों को आकर्षित करने के लिए इसका महत्त्व बताया जाना चाहिए। यह उद्योग अब भी इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि ग्राहकों को यह समझाया जा सके कि दूसरे उत्पादों के मुकाबले सोना खरीदना कितना फायदेमंद होता है। स्वर्ण उद्योग मूल रूप से निवेश उत्पाद या उपभोग उत्पाद की बिक्री करता है जिसका मूल्य समय के साथ बढ़ता है। उद्योग की तुलना हमेशा मोबाइल फोन जैसी उपभोक्ता वस्तु की तरह की गई है जिससे उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है। मेहता को और भी बड़ी चुनौती नजर आ रही है क्योंकि बड़ा खरीदार सोने से दूर भाग रहा है और युवा खरीदार सोने पर नहीं बल्कि फोन और आईपैड पर पैसा खर्च कर रहा है।
 
आईआईएम के इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर के चेयर प्रो. अरविंद सहाय ने कहा कि सोने के गहनों की खरीद को अब भी प्रमुख रूप से शादियों से बढ़ावा मिलता है। साल में इसका योगदान अनुमानित रूप से 40 प्रतिशत रहता है। युवा पीढ़ी रोजमर्रा में जो गहने पहनती है उन पर दबाव है। सोने में युवाओं की रुचि उनके माता-पिता जैसी नहीं है। अगली पीढ़ी में स्वर्णाभूषण के लिए उपभोग की राह सृजित करने के उद्देश्य से जौहरी स्वर्णाभूषण के नए उत्पाद (14 कैरट के उत्पाद समेत) तैयार कर रहे हैं जो रोजमर्रा इस्तेमाल करने में ज्यादा सस्ते होते हैं।
 
लंदन की अनुसंधान कंपनी मेटल फोकस के वरिष्ठï विश्लेषक (भारत और यूएई) चिराग शेठ ने कहा कि भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग को पिछले पांच वर्षों के दौरान विनियामक परिवर्तन के रूप में बड़ी प्रतिकूल स्थिति का सामना करना पड़ा है। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान दिए जाने वाली चीजों में शामिल है 2,00,000 से ज्यादा की खरीद पर स्थायी खाता संख्या (पैन) की अनिवार्यता, नकदी में लेनदेन पर प्रतिबंध, नोटबंदी तथा 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत। राहत की बात यह है कि दाम निचले स्तर पर रहने और कम दायरे में बढऩे के कारण इन उपायों से आभूषण मांग में और ज्यादा गिरावट नहीं आई है। अब हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया जा रहा है। हॉलमार्क के बिना आभूषण बेचने वालों को सभी अनुपालन पूरे करने होंगे और आभूषणों का लेखा-जोखा रखना होगा। मेटल फोकस के स्वर्ण सर्वेक्षण में कहा गया है कि वजन के हिसाब से शीर्ष 16-17 खुदरा विक्रेता अब 35 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी का लाभ उठा रहे हैं।
Keyword: gold, import, export, price, silver,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वित्त मंत्री की घोषणा से आर्थिक विकास को मिलेगी गति?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.