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निवेश से उबरेगा इस्पात उद्योग

जयजित दास / मुंबई July 14, 2019

आम बजट में 2024 तक 100 लाख करोड़ रुपये के महत्त्वाकांक्षी निवेश से घरेलू इस्पात की खपत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा रिसर्च ने अपने बजट विश्लेषण में कहा है कि बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश के अलावा अगले तीन वर्षों में 1.95 करोड़ ग्रामीण मकानों के निर्माण की योजना से इस्पात खपत को मजबूती मिलेगी। इक्रा का विश्लेषण इस तथ्य पर आधारित है कि घरेलू इस्पात की खपत में 50-60 प्रतिशत योगदान निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र का रहता है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, 'सस्ते मकानों की खरीद के लिए कर प्रोत्साहन बढ़ाना लंबे इस्पात की मांग के लिए सकारात्मक है। सरकार ने प्रमुख कार्यक्रम हर घर जल मिशन के तहत अपने लिए 2024 तक सभी घरों में पीने का पानी मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है जिससे घरेलू इस्पात पाइप निर्माताओं को फायदा पहुंचेगा।' सड़कों, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे की ओर अधिक पूंजीगत परिव्यय से मध्य अवधि के दौरान घरेलू इस्पात की खपत में 7-7.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। केंद्र के हर घर जल मिशन के तहत पीने के पानी की ग्रामीण परियोजनाओं के लिए बजट में इस वित्त वर्ष के लिए आवंटन में 82 प्रतिशत इजाफे की घोषणा की गई है। रेलवे और सड़कों के पूंजीगत परिव्यय में क्रमश: 15 और 12 प्रतिशत का इजाफा नजर आया है। मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन में 16 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। टाटा स्टील के वैश्विक प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी टीवी नरेंद्रन ने एक बयान में कहा है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर जोर देने के साथ-साथ बुनियादी ढांचा व्यय पर ध्यान केंद्रित करने का सरकार का इरादा महत्त्वपूर्ण है। 
 
इसके अलावा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए तंत्र स्थापित करने का लक्ष्य महत्त्वपूर्ण बदलाव है। नरेंद्रन का मानना ​​है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश तथा रेलवे और जलमार्ग में निजी पूंजी आकर्षित करने के कदमों से विकास और वृद्धि के सभी क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधि में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण भारत को भौतिक और डिजिटल दोनों तरह से जोडऩा अर्थव्यवस्था के लिए एक और सकारात्मक कदम है। कई श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं के एक समूह मे व्यवस्थित करने की घोषणा एक प्रगतिशील कदम है। बुनियादी ढांचे के लिए आवंटन बढ़ाने के अलावा बजट में कुछ स्टेनलेस और मिश्र धातु इस्पात उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर पांच प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस कदम से उन घरेलू इस्पात कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी जिन पर सस्ते आयात की मार पड़ी थी।
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