बिजनेस स्टैंडर्ड - कारोबारी जिंदगी के दो मुकाम: बिड़ला और ऐकोका
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कारोबारी जिंदगी के दो मुकाम: बिड़ला और ऐकोका

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  July 14, 2019

कारोबार जगत के दो दिग्गजों का पिछले पखवाड़े एक दिन के अंतराल में ही निधन हो गया। ली ऐकोका का 94 साल की उम्र में 2 जुलाई को निधन हुआ और अगले ही दिन बसंत कुमार बिड़ला 98 साल की उम्र में दिवंगत हो गए। एक मशहूर उद्योगपति परिवार के उत्तराधिकारी बिड़ला जहां भारतीय कारोबारी परंपरा का प्रतिनिधित्व करते थे वहीं ऐकोका अपनी पेशेवर प्रतिभा के बल पर ग्रेट अमेरिकन ड्रीम को साकार करने में जुटे तबके के विलक्षण प्रतिनिधि थे। बिड़ला विरासत में मिली संपत्ति के दम पर विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले भारतीय उद्यमी के प्रतीक थे। वहीं ऐकोका इटली से आकर अमेरिका में बसे माता-पिता की संतान थे और उनका बचपन काफी मुश्किलों में बीता था। पारिवारिक कारोबार के नाम पर उनके पास हॉट डॉग का एक स्टैंड भर था। फिर भी ऐकोका अमेरिका के सबसे सफल प्रबंधक बनकर उभरे। उन्होंने 'मोटाउन' की तीन में से दो बड़ी कार कंपनियों का जिस तरह से कायापलट किया था उसके बारे में आज भी प्रबंध संस्थानों में पढ़ाया जाता है।

 
बिड़ला परंपरागत कारोबार करने वाले परिवार से ताल्लुक रखते थे और उस परिवार का स्वतंत्रता आंदोलन से भी करीबी संबंध रहा था। उनके मशहूर पिता घनश्यामदास बिड़ला उन भारतीय उद्योगपतियों की पहली पीढ़ी का हिस्सा थे जिन्होंने कमोडिटी की खरीद-बिक्री के बजाय कंपनी संचालित कारोबार की तरफ अपने कदम बढ़ाए। उस पीढ़ी के उद्यमियों ने विश्व युद्धों के समय मिले मौके का बखूबी फायदा उठाया और एजेंसी व्यवस्था को संभालने के गुर सीखे थे। 'बीके' के रूप में लोकप्रिय बिड़ला का जन्म उद्यमिता एïवं धन से भरे-पूरे परिवार में हुआ था और उन्हें कम उम्र से ही कारोबारी गुर सिखाए गए थे। बिज़नेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित एक लेख में कुणाल बोस ने कहा है कि बिड़ला को शेयर कारोबार में हाथ आजमाने के लिए 13 साल की उम्र में ही प्रोत्साहित किया गया था और उन्होंने पहले साल में ही 4,000 रुपये का अच्छा मुनाफा भी कमा लिया था। अपने पिता के कारोबार में प्रशिक्षु के तौर पर शामिल होने के लिए उन्होंने इच्छा न होते हुए भी प्रेसिडेंसी कॉलेज छोड़ दिया। आजादी के समय उत्तराधिकार में मिली संपत्ति ने उन्हें अपने दम पर बड़ा साम्राज्य खड़ा करने का आधार दे दिया। उन्हें देश में मिश्रित अर्थव्यवस्था स्थापित करने की नेहरू की पहल से मिले शुरुआती मौकों का भी फायदा उठाया था।
 
लेकिन अत्यधिक समृद्ध होते हुए भी बिड़ला पर इसका कोई असर नहीं दिखता था। गरिमापूर्ण आचरण एवं नरम स्वभाव वाले बिड़ला की कार्यशैली कलकत्ता के डलहौजी स्क्वेयर के आसपास के उद्यमियों से काफी जुदा थी। उनमें आर्थिक नीति में आसन्न अवसर पहचानने की समझ खूब थी। मसलन, सीमेंट पर नियंत्रण आंशिक रूप से हटाए जाने के बाद उन्होंने सीमेंट कारोबार खड़ा करने का मन बना लिया। बिड़ला एक उद्यमी के तौर पर बिड़ला सीमेंट, टायर, कपड़ा एवं चाय जैसे कमोडिटी-केंद्रित कारोबार में ही लगे रहे क्योंकि उन दिनों घरेलू बाजार काफी हद तक संरक्षित थे। विदेशों में कुछ कारोबार थे लेकिन उनमें से कोई भी पूंजीवाद के गढ़ अमेरिका और यूरोप के कड़ी प्रतिस्पद्र्धा वाले बाजारों में नहीं था। भारत की अधिकांश बड़ी कंपनियों की तरह बिड़ला भी भारत में ही कारोबार करने में सहजमहसूस करते रहे और उनकी प्रबंधकीय शैली मिलनसार एवं सहृदय होते हुए भी मूलत: केंद्रीकृत एवं विवरणोन्मुख थी।
 
बिड़ला साम्राज्य या परिवारों के स्वामित्व वाले किसी भी भारतीय समूह में ऐकोका जैसे सख्त एवं विलक्षण प्रबंधक के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था। महज मार्केटिंग रणनीति की काबिलियत ने उन्हें फोर्ड कंपनी में लंबे समय तक बचाए रखा। कंपनी के कर्ताधर्ता हेनरी फोर्ड द्वितीय अक्सर ऐकोका को यह याद दिलाते रहते थे कि मुख्यालय के बाहर उनका नाम लिखा हुआ है। आखिर में अनुचित ढंग से 1978 में ऐकोका को फोर्ड से निकाल दिया गया। उसके पहले ऐकोका ने 1964 में चार दरवाजों वाली स्पोट्र्स कार पेश कर तहलका ही मचा दिया था। इसी तरह के उनके कुछ और प्रयोगों ने फोर्ड को डेट्रायट शहर की सबसे मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में से एक बना दिया था।
 
फोर्ड से निकाले जाने के दो हफ्ते बाद ही ऐकोका खस्ताहाल कंपनी क्रिसलर के प्रेसिडेंट बनाए गए थे और उन्होंने अपनी कंपनी को मुश्किल दौर से निकालने के लिए अपने पुराने बॉस रॉबर्ट मैकनामारा का डेटा-संचालित नजरिया अपनाया। अमेरिकी संसद कांग्रेस से बेलआउट पैकेज पर चर्चा, कर्मचारियों की संख्या में कटौती और नए उत्पादों की लॉन्चिंग के जरिये ऐकोका ऐसा करने में सफल रहे। क्रिसलर के बैनर तले उन्होंने मशहूर के-कार उतारी जिसे पहले फोर्ड ने नकार दिया था। 'अगर इससे बेहतर कार तलाश सकते हैं तो उसे ही खरीदें' उक्ति के साथ उतारी गई यह कार इतनी सफल रही कि क्रिसलर ने तय समय से पहले ही अपने कर्ज उतार दिए।
 
व्यक्तिगत स्तर पर बिड़ला पारिवारिक मूल्यों को काफी अहमियत देते थे। उन्होंने एक बार कहा था, 'धन के लिए सम्मान उसे खड़ा करने में लगी कड़ी मेहनत और ईमानदारी से पैदा होता है।' बिड़ला के उलट तीन बार शादी करने वाले ऐकोका खुद को आगे बढ़ाने में थोड़ा भी संकोच नहीं करते थे और 1980 के दशक में वह क्रिसलर के कई विज्ञापनों में भी नजर आए थे। उन्होंने 1984 में प्रकाशित अपनी रोचक आत्मकथा में कहा था, 'मैं खुद को भला दिखाने में नहीं बल्कि पैसे कमाने में रुचि रखता था।' इन दोनों कारोबारी दिग्गजों की विरोधाभासी जिंदगियां बीसवीं सदी का हिस्सा होते हुए भी इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक के मुहाने पर भी प्रासंगिक बनी हुई हैं। उनके जीवन की कहानियां दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश में मौजूद अवसरों की समानता के बारे में बहुत कुछ कहती हैं। 
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