बिजनेस स्टैंडर्ड - इस्पात उद्योग नहीं एकमत
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इस्पात उद्योग नहीं एकमत

सुशील मिश्र / मुंबई July 12, 2019

इस्पात उद्योग को बचाने के लिए सेफगार्ड ड्यूटी (संरक्षण शुल्क) लगाए जाने की संभावना पर इस्पात उद्योग में अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। छोटी कंपनियां और संगठन इस शुल्क का विरोध कर रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियों का मानना है कि आयात घटने का फायदा भारतीय इस्पात उद्योग को मिलेगा। छोटे संगठनों का मानना है कि इससे कीमतों में इजाफा होगा और देश में कुछ ही कंपनियों का पूरे इस्पात उद्योग पर दबदबा कायम हो जाएगा। इंडियन स्टील अलायंस (आईएसए) ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (डीजीटीआर) से यह शुल्क लगाने की अपील की है। उसकी अपील के बाद इस्पात उद्योग में बेचैनी बढ़ गई है। 
 
महाराष्ट्र, गुजरात, कोलकाता के एक दर्जन से अधिक इस्पात संगठनों ने सेफगार्ड ड्यूटी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। मेटल ऐंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र शाह कहते हैं कि सेफगार्ड ड्यूटी लगने की अफवाह मात्र से इस्पात के दाम तीन रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए हैं। सरकार को सेफगार्ड ड्यूटी लगानी है तो तैयार माल पर लगाए, कच्चे माल पर ड्यूटी लगाने का कोई औचित्य नहीं है। इससे छोटे कारोबारी और संयंत्रों को परेशानी होगी। देश में महज एक कंपनी का स्वामित्व होगा।    
 
इस्पात उद्योग को लामबंद करने में जुटे सिटीजन सिविक सॉल्युशंस फाउंडेशन के प्रवक्ता वैभव पुरोहित कहते हैं कि हम इस दलील का पूरी तरह से विरोध करते हैं कि आयात करने से अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी। इसके उलट, इस्पात के आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी लगने से दाम बढ़ जाएंगे और ऐसे में कुछ स्टील कंपनियों का बाज़ार में दबदबा बन जाएगा। इसकी वजह से इस्पात उपभोक्ताओं, व्यापारियों, एसएमई और एमएसएमई में नाराजगी बढ़ेगी। स्टील उद्योग से जुड़े संगठनों ने मिलकर प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, इस्पात मंत्री और एमएसएमई मंत्री को पत्र लिखकर मसले को समझाते हुए मांग की है कि इस्पात के आयात पर शुल्क न लगाया जाए। 
 
आयातकों का कहना है कि इस तरह के बड़े व्यापारिक अवरोधक लगाने से पहले सभी जरूरी पहलुओं पर विचार करना बेहद जरूरी है।  आपूर्ति में निरंतरता के लिए एसएमई और एमएसएमई सेक्टर इस तरह के आयात पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उत्पादों के उपलब्ध नहीं होने सें उन्हें अपना उत्पादन घटाना होगा या फिर अपना कारोबार बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इससे देश में बेरोजगारी की समस्या गहरा सकती है। 
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