बिजनेस स्टैंडर्ड - 'खोखा कंपनियों के जब्त हों खाते'
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'खोखा कंपनियों के जब्त हों खाते'

सोमेश झा और रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली July 10, 2019

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने खोखा कंपनियों के बैंक खातों को शीघ्र जब्त करने को कहा है। करीब 3,50,000 निष्क्रिय कंपनियों के आधिकारिक रिकॉर्ड 2016-17 से बंद कर दिए गए थे, इसके बावजूद उनमें से कुछ के खाते चालू हालत में पाए गए हैं।  प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्र ने 23 जून को प्रमुख नौकरशाहों को पत्र लिखकर कहा है कि मानक परिचालन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए एक बैठक करें और खोखा कंपनियों के सभी बैंक खाते दो सप्ताह के भीतर बंद करें, जिससे कि धन शोधन पर लगाम लगाई जा सके। 
 
इस सिलसिले में वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की अध्यक्षता में गुरुवार को बैठक होगी, जिसमें कंपनी मामलों के सचिव इंजेति श्रीनिवास, वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार, राजस्व सचिव एबी पांडेय, सीबीडीटी के चेयरमैन सुनील मेहता के अलावा अन्य लोग शामिल होंगे और इस मसले पर चर्चा करेंगे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'बैंकों के साथ तालमेल और अनुपालन से जुड़े तमाम मसले हैं। परिणामस्वरूप इनमें से तमाम बैंक खाते अभी भी परिचालन में हैं, जो चिंता का विषय है।'
 
सूत्रों के मुताबिक सरकार के मालिकाना वाले एक बैंक ने एक कंपनी का पंजीकरण रद्द होने के बाद भी उसे 280 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज दिया है। इस तरह का लेन देन अन्य सरकारी बैंकों के  साथ भी हो सकता है, लेकिन इस तरह के सौदों के बारे में सरकार के पास विस्तृत आंकड़े नहीं हैं। सरकार को संदेह है कि इनमें से तमाम बैंक खातों का इस्तेमाल धनशोधन में किया गया था, खासकर नवंबर 2016 की नोटबंदी के बाद इनका इस्तेमाल हुआ है।  2017 में 6,000 कंपनियां पाई गईं, जिनके ऊपर नोटबंदी के बाद धनशोधन का आरोप है। जिन कंपनियों के पंजीकरण रद्द कर दिए गए, 8 नवंबर 2016 को उनके खाते में कुल 22 करोड़ रुपये थे। उसके बाद उन्होंने 4,573 करोड़ रुपये जमा किया और 4,552 करोड़ रुपये निकासी हुई। 
 
सूत्रों ने कहा कि गुरुवार को होने वाली बैठक 2 सप्ताह के भीतर ऐसी कंपनियों के खातों के परिचालन सीमित करने या बंद करने पर विचार करने के लिए होने जा रही है, जिनका पंजीकरण कंपनी पंजीयक के यहां कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 248 के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।   कंपनी मामलों के मंत्रालय की निगरानी में कंपनी पंजीयक (आरओसी) ने 2016-17 में 1986 कंपनियों को चिह्नित कर उनका नाम पंजीकरण से हटा दिया था, जिन्होंने अपना फाइनैंशियल स्टेटमेंट या सालाना रिटर्न लगातार 2 या इससे ज्यादा साल से दाखिल नहीं किया था। इसके बाद 2018-19 में 1,12,797 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया था। 
 
अगस्त 2017 में कंपनी मामलों के मंत्रालय के निर्देश में आईबीए ने बैंकों से कहा कि जिस कंपनी को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया है, उन्हें अपने बैंक खातों के माध्यम से कारोबार करने से रोका जाए।  एक दर्जन से ज्यादा बैंकों ने हजारों खातों के बारे में विस्तृत सूचना मुहैया कराई, जो कंपनियां संचालित करती थीं। ऐसे खातों से लेन देन की अनुमति सिर्फ देनदारी व इस तरह की अन्य प्रतिबद्धताओं के भुगतान के लिए दी गई। दरअसल आईबीए ने बैंकों से कहा था कि ऐसी व्यवस्था बनाएं कि इस तरह का लेन देन तभी संभव हो, जब इसके लिए अधिकृत अधिकारी लेन देन की प्रकृति से संतुष्ट हों। बैंकों को यह निर्देश भी दिया गया था कि अस्वाभाविक लेन देन व लाभार्थियों पर नजर रखी जाए और ऐसे मामलों की रिपोर्ट आयकर अधिकारियों या प्रवर्तन निदेशालय को दी जाए। 
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