बिजनेस स्टैंडर्ड - एफपीआई को लक्षित कर नहीं लगाया कर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 16, 2019 10:14 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

एफपीआई को लक्षित कर नहीं लगाया कर

एजेंसियां / नई दिल्ली July 09, 2019

नई कर व्यवस्था को लेकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की कड़ी आलोचनाओं को सामना कर रही केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि अमीर व्यक्तियों पर ज्यादा कर एफपीआई को निशाना बनाने के लिए नहीं लगाए गए हैं। केंद्र के मुताबिक कम दर से कर चुकाने लिए विदेशी निवेशकों के पास कॉरपोरेट कंपनी के रूप में खुद को बदलने का विकल्प भी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई को अपने पहले बजट भाषण में अत्यधिक अमीर लोगों द्वारा दिए जाने वाले आयकर पर अधिभार बढ़ा दिया था।
 
हालांकि, 40 फीसदी एफपीआई स्वत: उच्च कर दर वाले स्लैब में आ गए हैं क्योंकि वे न्यास या व्यक्तियों के संघ (एओपी) जैसी गैर-कॉरपोरेट संस्थाओं के रूप में निवेश करते रहे हैं। आयकर कानून के मुताबिक कराधान के लिए इन्हें व्यक्ति के तौर पर ही वर्गीकृत किया गया है। सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने कहा, ऐसी तस्वीर पेश की जा रही है कि सरकार ने केवल एफपीआई पर अधिभार में वृद्धि कर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को निशाने पर लिया है। यह पूरी तरह गलत है। सभी अमीर व्यक्तियों एवं गैर-कॉरपोरेट संस्थाओं पर अधिभार में वृद्धि की गई है, चाहे वह घरेलू निवेशक हों या विदेशी, एफपीआई या एफआईआई। कंपनियों के लिए अधिभार नहीं बढ़ाया गया है, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी। सीतारामन ने अपने बजट प्रस्ताव में दो करोड़ रुपये से पांच करोड़ रुपये की सालाना आमदनी वाले व्यक्तियों पर अधिभार 15 से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा पांच करोड़ रुपये से अधिक की कमाई वालों पर अधिभार बढ़ाकर 37 फीसदी कर दिया गया है। इससे इन दोनों समूहों के लिए प्रभावी कर 39 फीसदी और 42.74 फीसदी हो गया है। सूत्र ने कहा कि सभी तरह की व्यक्तिगत आय पर अधिभार में वृद्धि की गई है, चाहे वह आमदनी वेतन के जरिए प्राप्त हो या बचत, ब्याज, म्युचुअल फंड, शेयर बाजार या एफऐंडओ, एलटीसीजी, एसटीसीजी में कारोबार या किसी अन्य माध्यम के जरिए। यह सभी व्यक्तियों पर लागू है, जो फंड या एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स या ट्रस्ट के तौर पर क्यों न हो। 
 
एक सूत्र ने कहा, एफपीआई एफडीआई नहीं है। किसी विदेशी निवेशक के पास दो विकल्प हैं - वह गैर-कॉरपोरेट इकाई मसलन ट्रस्ट, एओपी या कॉरपोरेट कंपनी के तौर पर आ सकते हैं। गैर-कॉरपोरेट इकाइयों पर भारत में व्यक्ति की तरह कर लगता है। शेयर या एफऐंडओ बाजार में लेनदेन करने वाले एफपीआई ने कंपनी मार्ग के बजाय ट्रस्ट के तौर पर आना पसंद किया है, लिहाजा इन पर स्वत: ही व्यक्ति की तरह की कर लगेगा। कंपनियों के पूंजीगत लाभ पर अधिभार कम है और इस वजह से एफपीआई कंपनी के तौर काम करना पसंद कर सकते हैं, अगर वे चाहते हैं कि उन पर कम अधिभार लगे। उन्होंने कहा कि करीब 60 फीसदी एफपीआई/एफआईआई ने कंपनी मार्ग अपनाया है और कम अधिभार चुका रहे हैं।
 
हालांकि वे दोनों विकल्प नहींं अपना सकते - व्यक्तिगत स्तर पर लाभ और कंपनी के तौर पर लाभ। 5 करोड़ रुपये से ज्यादा आय वाले व्यक्तियों पर लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर की दर 12 फीसदी से बढ़कर 14.5 फीसदी हो जाएगी, वहीं अल्पावधि वाले पूंजीगत लाभ कर की दर 17.9 फीसदी से बढ़कर 21.4 फीसदी हो जाएगी। कंपनियों के लिए अधिभार में इजाफा नहींं किया गया है। कंपनी के तौर पर निवेश का विकल्प उपलब्ध है, कई एफपीआई ने केमन द्वीप व लक्जमबर्ग की तरह कम कर या शून्य कर के लिए ट्रस्ट का मार्ग अपनाया है। उधर कई वैश्विक फंडों ने हर वर्ग के निवेशित फंडों के लिए अलग ढांचा बनाने की खातिर कॉरपोरेट इकाइयां सृजित की है और सूत्रों ने कहा कि ट्रस्ट के ढांचे के जरिये वे अपने-अपने देशों में कर परिमार्जन का फायदा उठा रहे हैं।
 
उन्होंने कहा, देसी निवेशकों के मुकाबले एफपीआई पर अधिभार की कम दर देसी निवेशकों के साथ विभेद करना होगा और जहां तक कर ढांचे का सवाल है, यह एकसमान मौका उपलब्ध कराना नहीं होगा। इससे हमारे कर ढांचे पर चोट पहुंचेगी। सूत्रों ने कहा, एफपीआई पर खास तौर से निशाना नहीं साधा गया है। व्यक्तियों, एचयूएफ व एओपी पर कर ढांचा एकसमान है। तत्काल कमाई के लिए विदेशी इकाइयां बॉन्ड, शेयर व अन्य प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश करती हैं और अल्पावधि में इसकी बिकवाली कर कमाई कर लेती हैं। यह अर्थव्यवस्था में लंबी अवधि का निवेश नहीं सृजित करता है।
Keyword: FPI, invest, equity,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

सोने में तेजी और ऊंची लागत से फीकी पड़ रही है टाइटन की चमक

Investmentsजून तिमाही में ऊंचे मूल्यांकन और धीमी वृद्घि से टाइटन कंपनी के शेयर में 12

सोने में तेजी और ऊंची लागत से फीकी पड़ रही है टाइटन की चमक

लौह अयस्क कीमतों में तेजी से एनएमडीसी को ताकत

रेटिंग में गिरावट से मारुति पर दबाव!

न्यूनतम शेयरधारिता बढ़ाने से सरकार को ज्यादा फायदा !

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.