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हर स्तर पर कर चोरी रोकने की हो रही कोशिश

संजय कुमार सिंह /  July 07, 2019

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान कर के दायरे में ज्यादा लोगों को लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब कर विभाग निवेश एवं बड़े लेनदेन समेत कई स्रोतों से आंकड़े जुटाता है। इसके बाद विभाग इनका विश्लेषण करता है और यह आकलन करता है कि क्या अमुक व्यक्ति को कर चुकाना चाहिए या वह उचित कर का भुगतान कर रहा है या नहीं। इस बजट में भी कर चोरी रोकने और बेहतर अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।  

रिटर्न भरने की चार शर्तें 

अगर किसी व्यक्ति की आमदनी बुनियादी छूट सीमा से अधिक है तो उसे रिटर्न भरना चाहिए। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार ने कहा, 'लोगों के लिए बुनियादी छूट सीमा 2.5 लाख रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3 लाख रुपये है। जिन लोगों के पास विदेश में संपत्ति है, उनके लिए रिटर्न भरना जरूरी है।' इस बजट में सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 139 में संशोधन कर चार ऐसी स्थितियां जोडऩे का प्रस्ताव रखा है, जिनमें रिटर्न भरना अनिवार्य होगा, भले ही व्यक्ति की आय बुनियादी छूट सीमा से कम हो।  एनए शाह एसोसिएट्स में वरिष्ठ साझेदार अशोक शाह ने कहा, 'इससे कर विभाग रिटर्न भरने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी कर पाएगा। यह अन्य बहुत से स्रोतों और एजेंसियों से भी ब्योरे हासिल कर रहा है, जिनका इस्तेमाल वह करदाताओं के बेहतर आकलन में कर सकता है।' 

पहली स्थिति यह है कि अगर किसी व्यक्ति ने एक बैंक के एक या अधिक चालूू खातों में 1 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा कराई है तो उसके लिए रिटर्न भरना जरूरी होगा। दूसरी स्थिति यह है कि अगर कोई व्यक्ति खुद या अन्य किसी के लिए विदेशी यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करता है तो उसे रिटर्न भरना होगा। तीसरी स्थिति यह है कि अगर किसी व्यक्ति का बिजली का सालाना बिल 1 लाख रुपये से अधिक है तो उसे रिटर्न भरना होगा। 

क्लीयरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, 'सरकार उन सभी चैनलों से ब्योरे जुटाने की कोशिश कर रही है, जहां मोटी राशि खर्च होती है मगर यह राशि खर्च करने वाले लोग रिटर्न नहीं भर रहे हैं।' चौथी स्थिति यह है कि अगर कोई व्यक्ति घर बेचता है और इससे प्राप्त होने वाली रकम को दूसरे घर या बॉन्डों में निवेश करता है। लोग गलती से यह मान लेते हैं कि उन्होंने घर बेचने से प्राप्त होने वाली पूरी रकम का निवेश कर दिया है और उनकी कोई कर देनदारी नहीं है, इसलिए उनकी आगे कोई जिम्मेदारी नहीं है। गुप्ता ने कहा, 'यह सही है कि ऐसे व्यक्ति की कोई कर देनदारी नहीं है, लेकिन उसे आयकर अधिनियम के किसी प्रावधान का लाभ लेने के लिए रिटर्न भरना होगा।' 

जायदाद लेनदेन पर टीडीएस 

धारा 194-आईए के मुताबिक जब कोई खरीदार अचल संपत्ति के सौदे में विक्रेता को रकम का भुगतान करता है तो उसके लिए 1 फीसदी टीडीएस काटना जरूरी है। पहले 'कंशीडरेशन' शब्द ठीक से परिभाषित नहीं था, इसलिए खरीदार केवल घर की कीमत पर ही टीडीएस काटते थे। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 'कंशीडरेशन' में अचल संपत्ति के लेनदेन से जुड़े सभी शुल्क भी शामिल होंगे जैसे क्लब सदस्यता, कार पार्किंग, रखरखाव शुल्क आदि।  

भारतीय निवासी से उपहार 

बजट में आयकर अधिनियम की धारा 9 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। यह धारा उन आयों से संबंधित है, जिन्हें आम तौर पर भारत में पैदा हुई माना जाता है। माना कि एक्स भारत का एक निवासी है और वाई अमेरिका में रहने वाला अप्रवासी है। एक्स वाई को एक संपत्ति उपहार में देता है। वाई यह मान सकता है कि वह अप्रवासी है और उसे संपत्ति उपहार के रूप में मिली है, इसलिए उसे इस पर कर चुकाने की जरूरत नहीं है। कानून के मुताबिक उपहारों पर कर केवल उसी स्थिति में नहीं लगता है, जब वे किसी संबंधी (आयकर अधिनियम में परिभाषित) की तरफ से दिए जाते हैं, शादी के समय मिलते हैं या विरासत में मिलते हैं। 

अगर कोई उपहार इन शर्तों के बाहर से प्राप्त होता है तो यह प्राप्तकर्ता के लिए आय (यहां आय का मतलब उपहार की कीमत से है) बन जाता है। जिस संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है, उसके मुताबिक ऐसी आमदनी को भारत में पैदा हुई माना जाता है और अप्रवासी व्यक्ति इस पर कर देने से नहीं बच सकता है। उसे भारत में कर रिटर्न भरना होगा, तभी वह दोहरा कराधान बचाव समझौता (डीटीएए) के तहत राहत का दावा कर सकता है। शाह ने कहा, 'इससे भारतीयों के गैर-संबंधियों को उपहार के रूप में पैसा बाहर भेजने की गतिविधि पर अंकुश लगेगा।' 

50 लाख रुपये से अधिक के काम के ठेके पर टीडीएस 

इस समय व्यक्तियों या हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए निजी उद्देश्य के लिए काम ठेके पर देने पर टीडीएस काटने की बाध्यता नहीं है। इसी तरह जो व्यक्ति या एचयूएफ ऑडिटिंग के दायरे में नहीं आते हैं, उनके लिए कारोबार या पेशवेर उद्देश्य के लिए ठेके पर काम देने पर भी टीडीएस काटना जरूरी नहीं है। इससे कर चोरी की गुंजाइश छूट जाती है। अब अगर व्यक्ति या एचयूएफ एक साल में 50 लाख रुपये से अधिक के काम का ठेका देते हैं तो उन्हें 5 फीसदी टीडीएस काटना होगा। शाह ने कहा, 'जब भुगतान करने वाला व्यक्ति टीडीएस काटता है तो कर विभाग को प्राप्तकर्ता की पहचान पता चल जाएगी। अगर प्राप्तकर्ता अपने कर रिटर्न में आय नहीं दिखाता है तो विभाग उसे नोटिस जारी कर सकता है।'
Keyword: Income Tax, TDS, Government, Return, PWC India, Personal Tax, Subsidy, ClearTax, Asset,
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