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पेट्रोलियम, पारंपरिक वाहन क्षेत्रों पर पड़ेगी चोट

शाइन जैकब / नई दिल्ली July 07, 2019

उपभोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रिक वाहन किफायती बनाने की खातिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रोत्साहन की घोषणा की है, लेकिन इससे इलेक्ट्कि वाहनों व पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के बीच संघर्ष देखने को मिलेगा। ईवी पर सरकार के जोर से गैस बुनियादी ढांचा व तेल रिफाइनरी क्षेत्रों में 45 अरब डॉलर के निवेश की योजना पर भी चोट पडऩे की संभावना है। इसके अलावा पारंपरिक र्ईंधन से चलने वाले वाहन बनाने वाली कंपनियां भी चिंतित हैं।

मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ईवी के मामले में सरकार सही दिशा में है, लेकिन उसने चुनौतियां भी पेश की है। हमें भी इलेक्ट्रिक वाहन की ओर बढऩा होगा। हमें स्वच्छ तकनीक की दरकार है और तेल का संरक्षण करना होगा। कोई भी इसे ना नहीं कर सकता। हालांकि कुछ चुनौतियां हैं जिनमें कारों की उच्च कीमत और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

शुक्रवार को पेश बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त ऐसे वाहनों की खरीद पर लिए गए कर्ज के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक की आयकर कटौती का प्रस्ताव है। इस कदम से करदाताओं को पांच साल में करीब 2.5 लाख रुपये का कर लाभ हो सकता है। इस बजट में ईवी में विशेष तौर से इस्तेमाल होने वाले कलपुर्जे पर सीमा शुल्क घटाया गया है, जिसमें ई-ड्राइव असेंबली, ऑन बोर्ड चार्जर, ई-कम्प्रेशर और चार्जिंग गन शामिल है, जिस पर सीमा शुल्क शून्य कर दिया गया है।

ऐंजल ब्रोकिंग की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, यह ईवी विनिर्माताओं मसलन टाटा मोटर्स व एमऐंडएम के लिए सकारात्मक होगा। वाहन क्षेत्र के लिए मौके व फेम-2 योजना पर नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक होने वाली इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री से 47.4 करोड़ टन तेल यानी 15 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी और इनके पूरे जीवनकाल तक परिचालन से 84.6 करोड़ टन शुद्ध कार्बन डाइऑक्साइड के सृजन से राहत मिलेगी।

सरकार की तरफ से पेट्रोल व डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर का शुल्क बढ़ाने के बाद भी ईवी के लिए प्रोत्साहन की घोषणा हुई। हालांकि ईवी को व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की खातिर लागत चुनौती होगी। वाहन उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 5 लाख रुपये की पेट्रोल कार को अगर इलेक्ट्रिक में बदला गया तो इसकी लागत 10 लाख रुपये होगी। ऐसे में छोटी कार का विकल्प चुनने वाले मध्य वर्ग को इस कदम का क्या फायदा होगा? दूसरी ओर, 10 लाख रुपये की छोटी कार शायद अमीरों की पसंद नहीं होगी। इसके अतिरिक्त बीएस-6 र्ईंधन के लिए वाहन कंपनियों व रिफाइनरों की तरफ से किया गया निवेश बेकार चला जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रस्तावित क्रांति पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए भी चिंताजनक है। डेलॉयट के लीडर (एनर्जी, रिसोर्सेस व इंडस्ट्रियल) देवाशिष मिश्रा ने कहा, गैस बुनियादी ढांचा (एलएनजी टर्मिनल, नैशनल गैस ग्रिड व सीजीडी) के लिए 25 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनी है। भारत भी देसी रिफाइनिंग क्षमता साल 2035 तक बढ़ाकर 450 एमएमटीपी करने की योजना बनाई है। इन निवेशकों को देखना होगा कि क्या इसका मतलब बनता है क्योंकि सरकार भविष्य के लिए इलेक्ट्रिक वाहन को तरजीह दे रही है।

Keyword: Budget, Union Budget, Nirmala Sitaraman, Automobile, Toyota, Electric Vehicle, EV, Tata Motors, Maruti Suzuki,
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