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ईवी पर जोर, वाहन उद्योग की मिश्रित प्रतिक्रिया

शैली सेठ मोहिले / मुंबई July 07, 2019

देसी वाहन कंपनियों ने इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले को सराहा, लेकिन वैश्विक वाहन निर्माताओं की स्थानीय इकाइयों ने कहा कि राजकोषीय प्रोत्साहन में अन्य स्वच्छ वाहन तकनीक के विकल्प को छोड़ दिया गया है, लिहाजा किसी औसत खरीदार के लिए विकल्प सीमित हो जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बजट में की गई घोषणाओं पर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने कहा, एक उद्योग के तौर पर हम इससे ज्यादा मांग भी नहीं रहे थे। अब इसका क्रियान्वयन हमारे ऊपर है। टाटा मोटर्स के अध्यक्ष (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बिजनेस व कॉरपोरेट रणनीति) शैलेश चंद्रा ने कहा, ईवी पर प्रोत्साहन सरकार की प्रतिबद्धता बताती है ताकि तेज गति से विद्युतीकरण हो सके। उन्होंने कहा कि कर्ज के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक आयकर छूट से खरीदार व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए ईवी खरीदने के लिए उत्साहित होंगे। ये खरीदार अभी तक फेम-2 योजना की समीक्षा तक ही सीमित थे, जिसकी घोषणा इसी साल की गई थी।

इलेक्ट्रिक वाहन और इंटरनल कम्बस्टन इंजन वाले वाहनों के बीच कीमत का अंतर घटाने के मकसद से बजट प्रस्ताव में ईवी पर जीएसटी की दर मौजूदा 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की बात कही गई है। बजट पर एक नोट में क्रिसिल रिसर्च के निदेशक एच. गांधी ने लिखा है, जीएसटी में कमी इलेक्ट्रिक दोपहिया व इलेक्ट्रिक टैक्सी खरीदने के लिहाज से हालांकि अनुकूल है, लेकिन फेम-2 सब्सिडी के अभाव के चलते व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक छोटी कार अभी भी प्रतिकूल बनी हुई है।

उधर, मर्सिडीज बेंज और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के आला अधिकारियों की राय अलग थी। लक्जरी कार बाजार की अग्रणी मर्सिडीज बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी मार्टिन श्वेंक ने कहा, बजट में हालांकि हरित र्ईंधन वाले वाहनों को मजबूती दी गई है, पर हमने शुल्क छूट में प्लग-इन हाइब्रिड को भी शामिल करने की मांग की थी, जिससे हरित र्ईंधन वाले वाहनों को आगे बढ़ाने की कोशिश को और बल मिलता।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के वाइस चेयरमैन एस विश्वनाथन ने कहा, इलेक्ट्रिक वाहन से हालांकि जीवाश्म तेल संरक्षण के फायदे मिलेंगे और कार्बन उत्सर्जन कम होगा, लेकिन अन्य विकल्प भी हैं, जिससे सरकार को यही मकसद हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, सरकार को अपनी कराधान नीतियों का जुड़ाव ऐसी हरित र्ईंधन वाले वाहनों से करना चाहिए, जो जीवाश्म र्ईंधन में कमी को बढ़ावा देती है और पर्यावरण को बेहतर बनाती है। उपभोक्ताओं को यह चुनने का मौका मिलना चाहिए कि वह कौन सा स्वच्छ वाहन तकनीक उसके लिए बेहतर है।

वैश्विक वाहन फर्मों की भारतीय इकाइयां खास तौर से जापान की कंपनियां एक ऐसे देश में उत्सर्जन पर लगाम कसने के लिए उत्सर्जन कम करने की खातिर विभिन्न तकनीक पर जोर देती हैं। ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर हैं। देसी कंपनियां मसलन टाटा व महिंद्रा सरकार के ईवी मिशन में सक्रियता से भागीदारी कर रही हैं और मौजूदा मॉडलों का इलेक्ट्रिक संस्करण पेश कर रही हैं। वैश्विक फर्मों का मानना है कि एक ऐसे देश के लिए इलेक्ट्रिक सबसे अच्छा समाधान नहीं है जहां बिजली उत्पादन का स्रोत कोयला है और बुनियादी ढांचे की समस्या है। इसके बजाय वे बेहतर समाधान के तौर पर हाइब्रिड पर जोर दे रहे हैं और होंडा व टोयोटा की स्थानीय इकाइयों ने साल 2021 में भारत में पेश करने के लिए हाइब्रिड मॉडल की तैयारी की है। फेम-2 योजना के तहत 20,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के मुकाबले यह प्रोत्साहन हालांकि कम है, लेकिन इसके रफ्तार पकडऩे की उम्मीद है।

सन मोबिलिटी के सह-संस्थापक और वाइस चेयरमैन चेतन मैनी ने कहा, ईवी पर जीएसटी में कटौती व आयकर का फायदा भविष्य में ईवी की ओर बढऩे की प्रतिबद्धता जताता है। यह इस्तेमाल करने वालों के लिए और फायदेमंद होगा अगर सरकार चार्जिंग व बैटरी स्वैपिंग सेवाओं पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दे। इस बीच, वाहन निर्माताओं के संगठन सायम ने कहा है कि ईवी को बढ़ावा देने के कदम का उद्योग स्वागत करता है, लेकिन प्रदूषित करने वाले पुराने वाहनों को तोडऩे के लिए कोई प्रोत्साहन नीति इस बजट में नहीं घोषित हुई। 
Keyword: Budget, Union Budget, Nirmala Sitaraman, Automobile, Toyota, Electric Vehicle, EV, Tata Motors,
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