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सरकार का जीएसटी संग्रह का नया लक्ष्य भी कठिन

नितिन सेठी और अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली July 07, 2019

वित्त वर्ष 2020 के लिए केंद्र सरकार ने अपने कर राजस्व संग्रह को तर्कसंगत बनाया है। अंतरिम बजट में 25.52 लाख करोड़ रुपये कर संगग्रह का अनुमान लगाया गया था, लेकिन शुक्रवार को पेश किए गए बजट में सरकार ने सकल कर राजस्व संग्रह का लक्ष्य 24.62 लाख करोड़ रुपये रखा है। 

कर कम आने के अनुमान का बड़ा हिस्सा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से लक्षित राजस्व से जुड़ा है। वित्त वर्ष 2020 के लिए जीएसटी का लक्ष्य 6.63 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसे अंतरिम बजट में 7.61 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। 

अंतरिम बजट की तुलना में नए लक्ष्य से हर विशेषज्ञ सहमत है, जो ज्यादा तार्किक लगता है। लेकिन यह अभी भी महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य नजर आता है। डेलॉयट में अप्रत्यक्ष कर के वरिष्ठ सलाहकार यशोधन परांदे ने कहा, 'निश्चित रूप से यह ज्यादा तार्किक लक्ष्य है। क्या यह अभी भी महत्त्वाकांक्षी है? अगर अनंतिम वास्तविक आंकड़ों से तुलना करें तो अभी भी उम्मीद ज्यादा रखी गई है। यह संग्रह इस अवधारणा पर निर्भर होगा कि सरकार अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाएगी और अनुपालन स्तर में सुधार होने से जीएसटी संग्रह बढ़ेगा। वर्तमान में कई वजहें हैं, जो इस पर प्रभाव डालेंगी।'

जीएसटी वित्त वर्ष 18 में पेश किया गया था। यह उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है और इसे अभी स्थिर होना बाकी है। बेहतर तरीके से स्थापित कर व्यवस्था में उछाल का अनुमान लगाया जा सकता है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि के अनुपात में कर संग्रह में कितनी बढ़ोतरी होती है। लेकिन जीएसटी के साथ ऐसा नहीं है। अभी भी इसमें तमाम बदलाव हो रहे हैं। सरकार को ढांचागत के साथ साथ प्रशासनिक खामियों के कारण बदलाव करने पड़ रहे हैं। 

पहले की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की तुलना में राजस्व निरपक्ष बदलाव के बारे में अनुमान व राज्यों के जीएसटी राजस्व में वृद्धि को लेकर स्थिरता अभी भी सवालों के घेरे में है। अगर इन सब जटिलताओं को छोड़ दें तो सबसे पहले वित्त वर्ष 2020 के लक्ष्य की तुलना वित्त वर्ष 19 के संग्रह से होगी। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) संग्रह 5.04 लाख करोड़ रुपये रहा है। लेकिन आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने वित्त वर्ष 2019 के कुल कर राजस्व बहुत कम रहने का अनुमान लगाया है। इसमें अनंतिम वास्तविक जीएसटी का सही आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन अगर शुद्ध कर राजस्व और सीजीएसटी के बीच वही अनुपात बरकरार रखा जाए तो सीजीएसटी का अनंतिम वास्तविक संग्रह 4.06 लाख करोड़ रुपये होगा, जो बजट के पुनरीक्षित अनुमान से 97,979 करोड़ रुपये कम है। 

इन आंकड़ों से अंतरराज्यीय वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) के बाद सीजीएसटी का पता चलता है और यह पता चलता है कि केंद्र व राज्य के खजाने में कितना धन आया है। इसका मतलब यह है कि सरकार अब भी उम्मीद कर रही है कि सीजीएसटी संग्रह इस साल 29.58 प्रतिशत बढ़ेगा। 

एक और सामान्य सा मापक मार्च और जून के बीच हुआ संग्रह है। वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में सीजीएसटी संग्रह औसतन प्रति महीने 33,257 करोड़ रुपये रहा है। यह वास्तविक की तुलना में ज्यादा वाला हिस्सा है। इसमें अप्रैल में माह के हिसाब से हुई बढ़ोतरी भी शामिल है और जून में किया गया रिफंड भी समाहित नहीं है। 

इसकी तुलना में अब शेष 9 महीने के दौरान औसतन हर महीने 47,358 करोड़ रुपये कर संग्रह करना होगा। यह पहली तिमाही में संग्रह के औसत की तुलना में 42 प्रतिशत ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना संग्रह भी बड़ा लक्ष्य है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च के मुताबिक, 'केंद्र के अनुमान के मुताबिक कुल जीएसटी संग्रह में सीजीएसटी, आईजीएसटी, मुआवजा उपकर करीब 12.7 लाख करोड़ रुपये होगा। यह 1.06 लाख करोड़ रुपये मासिक है। यह वित्त वर्ष 2020 के पहले तीम महीने के 89,100 करोड़ रुपये की तुलना में बहुत ज्यादा है।' 

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में कर संग्रह कम रहने की कुछ अहम वजहे हैं। अधिकारी ने कहा, 'दरअसल वित्त वर्ष 19 की पहली तिमाही में 28 प्रतिशत कर के दायरे में ज्यादा सामान आते थे। इसलिए हमें यह उम्मीद थी कि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में कर संग्रह कम रहेगा क्योंकि कर की दरें कम हुई हैं। लेकिन आधार कम होने की वजह से शेष वर्ष में वृद्धि बेहतर रहेगी। साथ ही आर्थिक गतिविधियों के बहाल होने के भी अनुमान लगाए जा रहे हैं।' 

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वित्त वर्ष 20 की पहली तिमाही में चुनाव चल रहा था, जिससे सार्वजनिक निवेश की गतिविधियां सुस्त थीं और नए टेंडर रुके हुए थे। उन्होंने कहा, 'दरों का स्थिर होना अहम है। अनुपालन उत्प्रेरक की तरह है, जो अप्रैल से जून तिमाही में सुधरा है।'
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