बिजनेस स्टैंडर्ड - ऊर्जा व तेल क्षेत्र में विलय व अधिग्रहण की होगी कवायद
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ऊर्जा व तेल क्षेत्र में विलय व अधिग्रहण की होगी कवायद

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली July 07, 2019

नरेंद्र मोदी सरकार इस साल सरकारी कंपनियों के विलय व अधिग्रहण (एमऐंडए) की ओर संभावनाएं तलाश रही है। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अतानु चक्रवर्ती ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। चक्रवर्ती ने कहा कि कुछ मामलों में, अगर जरूरत पड़ती है, तो केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) का पुनर्गठन करेगी और उनके  विभिन्न विभाजनों को खत्म करेगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र सरकार 2019-20 में पीएसयू के और ज्यादा विलय एवं अधिग्रहण पर जोर देगी, चक्रवर्ती ने कहा, 'रणनीति के रूप में सरकारी कंपनियों का एकीकरण हमेशा जारी रहेगा क्योंकि हम जाहते हैं कि आर्थिक पैमाने पर वे लाभदायक बनी रहें। हम तेल एवं गैस और ऊर्जा क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ मामलों में मूल्य शृंखला में सुधार का विचार है और इसका मतलब विभाजन हो सकता है। अगर कहीं मात्रा का पैमाना नहीं आता है तो हम विभाजन देख सकते हैं।'

बहरहाल चक्रवर्ती ने कोई नाम बताने से इनकार किया बिजली क्षेत्र में सरकार की कवायद है कि एनटीपीसी लिमिटेड एसजेवीएन लिमिटेड का अधिग्रहण कर ले। तेल एवं गैस क्षेत्र में गेल इंडिया के मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन को अलग अलग करने की योजना है, जिसमें से एक की बिक्री होगी।

पिछले दो साल के दौरान बिजली, तेल और गैस, बुनियादी ढांचा क्षेत्र की पीएसयू में कई अधिग्रहण हुए हैं।  2017-18 में ओएनजीसी ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम में केंद्र सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी 36,900 करोड़ रुपये में खरीद ली और दीपम को विनिवेश प्रक्रिया से 1 लाख करोड़ रुपये जुटाने में मदद की। 2018-19 में पॉवर फाइनैंस कॉर्पोरेशन ने ग्रामीण विद्युतीकरण मिशन में केंद्र की 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण 14,500 करोड़ रुपये भुगतान करके किया। 

शुक्रवार को अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चुनिंदा केंद्रीय पीएसयू में रणनीतिक विनिवेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा, 'मौजूदा वृहद आर्थिक मानकों को देखते हुए सरकार न सिर्फ एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया फिर से शुरू करेगी बल्कि और ज्यादा सीपीएसई में निजी क्षेत्र को साझेदार बनाने के लिए रणनीतिक साझेदारी की पेशकश करेगी।' इसके बारे में विस्तार से पूछे जाने पर चक्रवर्ती ने कहा, 'तमाम कंपनियों पर काम चल रहा है। आप अगले सप्ताह पवन हंस के रुचि पत्र की उम्मीद कर सकते हैं। इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड के लिए भी रुचि पत्र जल्द आएगा। हम सेल लिमिटेड के 3 संयंत्रों को बेचने की योजना बना रहे हैं। हम निवेशकों के लिए पेशकश और आकर्षक बनाने पर काम कर रहे हैं।'

उन्होंने कहा, 'पिछले साल जिन कंपनियों के मामले में बोली असफल रही थी, हमने उनमें बहुत ज्यादा शुरुआती रुचि देखी थी। यह प्रक्रिया बहुत लंबी है। हमारा लक्ष्य है कि इस प्रक्रिया को छोटा किया जाए। हमारा मकसद है कि निजीकरण की प्रक्रिया 4 से 6 महीने में पूरी कर ली जाए। हम इस दिशा में तेजी से बढऩे को इच्छुक हैं।'

Keyword: Prime Minister, Narendra Modi,DIPAM, Merger, Acquistion, PSU,
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