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निजी निवेश में मजबूती के लिए अच्छी नीति, कम ब्याज दर जरूरी

देव चटर्जी / मुंबई July 04, 2019

निजी क्षेत्र की कंपनियां नई क्षमता पर निवेश नहीं करना चाह रही हैं। ऐसे में आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि ब्याज दरों में कमी लाने और बचत को प्रोत्साहित करने के अलावा सरकार को अच्छी नीतियां सुनिश्चित करनी चाहिए जो क्रियान्वयन के चरण में निरंकुशता कम करे ताकि भारतीय कंपनी जगत निवेश का फैसला ले सके। समीक्षा में सुझाव दिया गया है, यह पहले से ही तय होना चाहिए कि किसी खास अवधि तक नीतियों में बदलाव नहीं होगा ताकि निवेशकों को भविष्य की नीतियों के प्रति भरोसा हो सके। रिपोर्ट में कहा गया है, खास तौर से निजी निवेश मांग में इजाफा करने, क्षमता सृजित करने के लिए अहम है और यह श्रम उत्पादकता में इजाफा करता है, नई तकनीक लागू करता है और रोजगार का सृजन करता है।
 
इसमें कहा गया है कि साल 2008 से करीब एक दशक तक निवेश स्थिर रहने के बाद भारत की निवेश गतिविधियां 2017-18 की पहली तिमाही से सुधरी हैं। वास्तव में जीडीपी के अनुपात के लिहाज से सकल फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 2007-08 के 37 फीसदी के मुकाबले 10 साल में घटकर 27 फीसदी रह गया, लेकिन उसके बाद यह सुधरा है और अभी करीब 28 फीसदी पर है। आर्थिक नीति में अनिश्चितता बढऩे से करीब पांच तिमाही से भारत में निवेश की रफ्तार को क्षदित पहुंची है, ऐसे में समीक्षा में कहा गया है कि सरकार राजकोषीय नीति, कर नीति, मौद्रिक नीति, व्यापार नीति और बैंकिंग नीति को शामिल करने की खातिर आर्थिक नीति अनिश्चितता सूचकांक बना सकती है। ऐसे सूचकांकों पर नजर डालने से आर्थिक नीति की अनिश्चितता की निगरानी हो पाएगी और इस पर नियंत्रण भी हो सकेगा।
 
समीक्षा में कहा गया है कि वास्तविक ब्याज दर में कटौती से निवेश बढ़ सकता है और इस तरह से निवेश, बढ़त, निर्यात और नौकरियों में अच्छा दौर आ सकता है। भारतीय कंपनी जगत के सीईओ ने कहा, समीक्षा की दिशा हालांकि सही है, लेकिन उपभोक्ताओं की तरफ से मांग का अभाव और उच्च ब्याज दर उन्हें नई क्षमताओं में निवेश से रोक रहा है। हाल के समय में देश में हुआ नया निवेश नकदी संपन्न कंपनियों ने दिवालिया कंपनियों के अधिग्रहण के जरिये हुआ है। टाटा स्टील ने भूषण स्टील के अधिग्रहण पर 35,400 करोड़ रुपये निवेश किया, वहीं आर्सेलरमित्तल एस्सार को 42,000 करोड़ रुपये में खरीदने पर सहमत हुई है। इसी तरह आदित्य बिड़ला समूह ने जेपी व बिनानी सीमेंट की परिसंपत्तियां खरीदकर अपनी उत्पादन क्षमता में इजाफा गिया है। भारतीय कंपनियों की तरफ से नया निवेश नहीं हुआ है क्योंकि उपभोक्ता की मांग पिछले साल सितंबर से ही घटनी शुरू हो गई है, जिससे दोपहिया व कारों की बिक्री को झटका लगा है।
 
डीएलएफ के सीईओ व एमडी राजीव तलवार ने कहा, नकदी बढ़ाने और देश में मांग बहाल करने के लिहाज से नीतिगत दरों में कटौती का फायदा बैंकों की तरफ से दिया जाना अहम होगा।  एक स्टील फर्म के सीईओ ने कहा कि भारत में उच्च ब्याज लागत निवेश का अहम रोड़ा है और वह आगामी महीनों में नए निवेश पर विचार करेंगे जो ब्याज लागत पर आधारित होगा और इस पर भी कि विलय-अधिग्रहण का कोई मौका उपलब्ध है या नहीं। समीक्षा में कहा गया है कि कंपनियों के निवेश पर कई चीजों का असर पड़ रहा है। उधारी की लागत का निवेश पर नकारात्मक असर हो सकता है क्योंकि यह ज्यादा इनपुट लागत में प्रतिंबिबित होता है। रिपोर्ट में कहा गया है, उम्मीद के मुताबिक फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट का सहसंबंध रीपो दर, भारांकित औसत उधारी दर और एसबीआई के एमसीएलआर के साथ नकारात्मक है। दूसरा महत्वपूर्ण कारक निवेश को प्रोत्साहित करने का है और समीक्षा में कहा गया है कि इसके लिए उत्पादक को अपने उत्पादों की सही कीमत मिलनी जरूरी है। कीमतों में बढ़ोतरी से ज्यादा निवेश हो सकता है क्योंकि कारोबार करने वाले इसे तब तक लाभकारी पाएंगे जब तक कि उपभोग की मांग मजबूत हो। निवेश पर असर डालने वाला तीसरा महत्वपूर्ण कारक क्षमता इस्तेमाल है। किसी एक तिमाही में क्षमता इस्तेमाल का सकारात्मक असर आगामी तिमाही में निवेश की बढ़त पर पड़ सकता है क्योंंकि पिछली तिमाही में क्षमता के अतिरिक्त इस्तेमाल से मौजूदा तिमाही में नए निवेश की जरूरत कम हो सकती है। अभी भारतीय कंपनियां औसतन 75 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल कर रही हैं और यह भारतीय कंपनी जगत को अतिरिक्त क्षमता पर निवेश के मामले में मुश्किल बना रहा है।
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