बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत के अनुकूल विकास का मॉडल पेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, November 20, 2019 12:00 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

भारत के अनुकूल विकास का मॉडल पेश

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली July 04, 2019

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने आर्थिक समीक्षा 2018-19 में आर्थिक विकास के पारंपरिक सिद्धांत पर आधारित मानकों को पीछे छोड़ते हुए निवेश, रोजगार सृजन, मांग, निर्यात और आर्थिक विकास में तालमेल पर आधारित मॉडल पेश किया। इस मॉडल के आधार पर सुब्रमण्यन ने अर्थव्यवस्था को 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ाने की रणनीति के बारे में विस्तार से बताया ताकि 2024-25 तक जीडीपी का आकार 5 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना है।
 
हालांकि आर्थिक समीक्षा में मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की रफ्तार महज 7 फीसदी रहने की बात कही गई है, जो 2018-19 के 6.8 फीसदी के मुकाबले सिर्फ 0.2 फीसदी ज्यादा है। समीक्षा में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था हमेशा असंतुलित रही है, या तो अच्छी रही है या फिर बुरी। जब अर्थव्यवस्था सही चक्र में होती है तो निवेश, उत्पादकता की रफ्तार, रोजगार का सृजन, मांग और निर्यात एक दूसरे को सहारा देते हैं और अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने के लिए उनमें जिंदादिली भर देते हैं। इसके उळट जब अर्थव्यवस्था बुरे चक्र में होती है तो निवेश, उत्पादकता, रोजगार सृजन आदि एक दूसरे को क्षति पहुंचाते हैं, लिहाजा अर्थव्यवस्था में जिंदादिली नहीं रह जाती।
 
समीक्षा में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था को अच्छे दौर में बनाए रखने के लिए निवेश अहम होता है। राजेश चक्रवर्ती और एस मेका के साथ किए अपने अध्ययन के आधार पर सुब्रमण्यन ने कहा कि यह निवेश बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी व सरकारी दोनों हो सकता है।  समीक्षा पेश करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुब्रमण्यन ने कहा, हमारा इरादा दिशा बदलने का है और इसके लिए हम निवेश के जरिए अर्थव्यवस्था को अच्छे दौर में ले जाना चाहते हैं। आर्थिक समीक्षा कहा गया है कि परंपरागत तरीकों से निजात पाकर अधिक निवेश की वकालत की गई है। पुराने ढर्रे में रोजगार सृजन, मांग, निर्यात, आर्थिक वृद्धि जैसे मसलों को अलग समस्या के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट समीक्षा में कहा गया है कि ये आर्थिक घटनाएं विशेष पूरकता का प्रदर्शन करते हैं। इसलिए प्रमुख संकेतकों को पहचानने और उसे मजबूत बनाने से अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र एकसाथ आगे बढऩे में सक्षम होते हैं।
 
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक संकट ने परंपरागत आर्थिक सिद्धांतों से जुड़ी समस्याएं सामने ला दी। इसने पंचवर्षीय योजनाओं की नाकामी के लिए इसी मॉडल को जिम्मेदार ठहराया। इस बिंदु को साबित करने के लिए सुब्रमण्यन ने कहा कि बचत, निवेश और जीडीपी में बढ़ोतरी उच्च बढ़त वाली अर्थव्यवस्थाओं में अच्छे दौर में हुई  है, चाहे वह चीन हो या फिर पूर्वी एशिया की अन्य अर्थव्यवस्थाएं। सुब्रमण्यन ने कहा, जब अर्थव्यवस्था में बेहतरी शुरू हुई तो चीन ने बचत और ज्यादा निवेश शुरू किया। भारत को इससे सीखने और अच्छे दौर वाले चक्र अपनाने की जरूरत है।
 
अध्ययन का हवाला देते हुए समीक्षा में कहा गया है कि बचत व जीडीपी की रफ्तार के बीच सकारात्मक सह-संबंध निवेश व बढ़त के मुकाबले ज्यादा मजबूत होता है। इसकी वजह यह है कि निवेश जोखिम भरा होता है, उद्यमी के सामने कारोबार के नुकसान का विशेष जोखिम होता है, जिससे निवेशित पूंजी का नुकसान होता है। इसलिए निवेश के मुकाबले बचत में ज्यादा बढ़ोतरी करनी होगी ताकि एतहिताती बचत का संचय हो सके। इसमें निर्यात की अहमियत को रेखांकित किया गया है क्योंंकि निवेश के जरिये सृजित ज्यादा क्षमता का उपभोग अकेले देश में नहीं हो सकता कक्योंकि बचत में भी इजाफा होगा।
 
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, इसी वजह से निवेश के जरिए बढ़त वाले किसी मॉडल का हिस्सा निर्यात की आक्रामक रणनीति होनी चाहिए। यह सही है कि विश्व व्यापार अभी कुछ अवरोध का सामना कर रहा है, लेकिन वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी इतनी कम है कि उसे बाजार हिस्सेदारी पर ध्यान देने की जरूरत है। हम तर्क दे सकते हैं कि मौजूदा अवरोध भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में खुद को शामिल कराने का मौका उपलब्ध करा रहा है। समीक्षा में इस सिद्धांत को सही नहींं बताया गया है कि रोजगार की जगह निवेश ले लेता है और इससे नौकरियों का नुकसान होता है। 
Keyword: economy survey, parliament, budget, nirmala sitaraman,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या शुल्क वृद्घि से सुधरेगी दूरसंचार क्षेत्र की सेहत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.