बिजनेस स्टैंडर्ड - संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और ऊर्जा दक्षता पर पहल हो
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, August 22, 2019 08:29 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और ऊर्जा दक्षता पर पहल हो

श्रेया जय और शाइन जैकब / नई दिल्ली July 04, 2019

आर्थिक समीक्षा में इस बार बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय संसाधन को युक्तिसंगत बनाने और ऊर्जा दक्षता पर जोर दिया गया है। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि भारत को ब्रिटेन और आइसलैंड जैसे अन्य तमाम देशों की तरह संसाधन दक्षता में निवेश करना चाहिए। इसके लिए पुनर्चक्रण, दोबारा उपयोग करने, खपत घटाने और नुकसान घटाने पर जोर देना होगा। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की थी और कुछ योजनाओं का नाम भी बदल दिया था। घरों तक बिजली पहुंचाने वाली योजना सौभाग्य और मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने की योजना उज्ज्वला इसके उदाहरण हैं। अप्रैल 2019 तक उज्ज्वला योजना के तहत करीब 7.18 करोड़ परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन दिए गए जबकि इस दौरान सौभाग्य योजना के तहत 99 फीसदी परिवारों तक बिजली पहुंचा दी गई।
 
इन योजनाओं के प्रभाव के बारे में आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने पर काफी जोर दिया गया है जिससे पर्यावरण पर दबाव और उसकी निरंतरता संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक संस्था- संसाधन दक्षता ब्यूरो (बीआरई)- बनाने का सुझाव दिया गया है जो विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल स्थापित करेगी। समीक्षा में कहा गया है, 'विभिन्न अध्ययन में संसाधन दक्षता के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण किया गया है और पाया गया कि विनिर्माण क्षेत्र में इससे 6,000 करोड़ रुपये की बचत की जा सकती है। प्रभावी कचरा प्रबंधन नीतियों से 14 लाख रोजगार सृजित हो सकते हैं और गाडिय़ों के कबाड़ से करीब 80 लाख टन इस्पात तैयार किया जा सकता है।' संसाधन दक्षता के लिए एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए समीक्षा में इसके लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि संसाधनों की खपत घटाने, कचरा उत्पादन में कमी लाने और ग्रीनहाउस गैस का उत्पादन घटाने के लिए स्थायी सार्वजनिक खरीद पर एक नीति बनाने और संसाधन दक्षता के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत है।
 
भारत सरकार ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने वाली योजनाओं के साथ-साथ विभिन्न ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम पहले से ही चला रही है। समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2017-18 में ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों से लागत में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 11 करोड़ टन की कमी आई। आर्थिक समीक्षा में ऊर्जा दक्षता के लिए विभिन्न उपायों को सुझाते हुए कहा गया है कि भारत को कोयला एवं अक्षय ऊर्जा के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक ऊर्जा नीति तैयार करने की जरूरत है। 
 
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन के बजाय बुनियादी ढांचा जरूरी
 
आर्थिक समीक्षा में विभिन्न अध्ययन के हवाले से कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहन के विनिर्माताओं और उपयोगकर्ताओं को प्रोत्साहन देने के बजाय चार्जिन बुनियादी ढांचा कहीं अधिक जरूरी है। इससे देश में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बल मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बैटरी से चलाने की क्षमता जीवाश्म ईंधन के मुकाबले काफी कम है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने यह सुझाव ऐसे समय में दिया है जब उद्योग और सरकार की नीतियों पर विचार करने वाली संस्था नीति आयोग ने इसकी रूपरेखा के बारे में परस्पर विरोधी विचार व्यक्त किए हैं। समीक्षा में कहा गया है, 'हमने पाया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी काफी हद तक चार्जर की उपलब्धता पर निर्भर है और चार्जर पॉइंटों की उपलब्धता इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से संबंधित है। चार्जिंग बुनियादी ढांचे की उपलब्धता बढऩे के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।' समीक्षा में कहा गया है कि भारत में चार्जिंग बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सीमित है और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की राह में इसे एक बड़ी बाधा मानी जा रही है। हालांकि तमाम चुनौतियों के बावजूद समीक्षा में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहन भारत का भविष्य है और अनुकूलन नीतियों की मदद से भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र के तौर पर उभर सकता है।
Keyword: economy survey, parliament, budget, nirmala sitaraman,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नरमी के बीच कर संग्रह का लक्ष्य हासिल कर पाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.