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आईएलऐंडएफएस डेरिवेटिव मामले का निपटान करे सेबी : सैट

समी मोडक / मुंबई July 03, 2019

निफ्टी ऑप्शंस के अनुबंध के निपटान का जटिल मामला बाजार नियामक सेबी के पास पहुंच गया है, जिससे क्लियरिंग मेंबर आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज सर्विसेज, ब्रोकर-ट्रेडर अलायड फाइनैंशियल सर्विसेज और कई अन्य बाजार प्रतिभागी जुड़े हुए हैं। बुधवार को सैट ने बाजार नियामक सेबी को निर्देश दिया कि वह इसमें शामिल सभी पक्षकारों को सुनने के बाद 17 जुलाई तक अंतिम आदेश पारित करे। सैट के निर्देश के मुताबिक, इससे जुड़े सभी पक्षकार 8 जुलाई को सेबी के पास अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद बाजार नियामक 10 जुलाई से 16 जुलाई के बीच व्यक्तिगत सुनवाई करेगा। इसके बाद सेबी फैसला लेगा कि इसका निपटान कैसे किया जाए। सैट ने कहा है कि डेरिवेटिव ट्रेड का निपटान 22 जुलाई तक स्थगित रहेगा।
 
यह मामला अब प्रतिबंधित ब्रोकर अलायड फाइनैंशियल की तरफ से क्लियरिंग मेंबर आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज के जरिए डेरिवेटिव पर दांव से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी के जरिये हस्तांतरित 365 करोड़ रुपये की म्युचुअल फंड यूनिट का इस्तेमाल किया गया। ये यूनिट डालमिया भारत सीमेंट, ओसीएल इंडिया और नोवजॉय एम्पोरियम के थे। 26 और 27 दिसंबर को अलायड ने निफ्टी ऑप्शन अनुबंध बेच दिए थे, जो 28 मार्च व 27 जून को एक्यपायर होने थे और इसके जरिए 380 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रीमियम कमाया। इस ट्रेड के लिए अलायड ने म्युचुअल फंड यूनिट आईएलऐंडएफएस को कोलेटरल के तौर पर दिए। चूंकि ये कोलेटरल मूल रूप से अलायड सिक्योरिटीज के क्लाइंटों के थे, लिहाजा आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज 28 मार्च व 27 जून को एक्सपायर हुए डेरिवेटिव ट्रेड के निपटान की खातिर एमएफ यूनिट को भुना नहीं सकी।
 
20 मार्च को आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज ने सेबी के पास आवेदन जमा कर कहा कि वह अलायड फाइनैंशियल की तरफ से की गई धोखाधड़ी की शिकार बनी है और ब्रोकर की तरफ से हुए ट्रेड को रद्द किया जाना चाहिए। 29 मार्च को बाजार नियामक ने कहा कि यह काम एनएसई करेगा, जहां यह कारोबार हुआ है। 24 जून को एनएसई क्लियरिंग ने आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज की याचिका खारिज कर दी और कहा कि वह सेबी व आर्थिक अपराध शाखा जैसे प्राधिकरणोंं की तरफ से धोखाधड़ी के आरोपों की सभी जांच पूरी होने के बाद ही ऐसा कर सकती है। इसके बाद आईएलऐंडएफएस सिक्योरिटीज ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की और अदालत ने ट्रेड के निपटान पर रोक लगाते हुए मामला सैट के पास भेज दिया।
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