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विश्व बैंक की रैंकिंग में स्थान पाने की कवायद में कारोबार सुगमता की राह पर भारत

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली July 03, 2019

विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट में पिछले साल 23 स्थान ऊपर उठकर 77वें स्थान पर पहुंचने के बाद अब भारत ने इस साल की रिपोर्ट में 50 प्रमुख देशों में आने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार ने पिछले 12 महीनों में कम से कम 35 नए सुधार लागू किए हैं, जिससे देश में कारोबार शुरू करने में लगने वाले समय, लागत, प्रक्रिया व दस्तावेजीकरण में कमी आएगी। इन सुधारोंं में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान करना, छोटे कारोबारियों के लिए इनकॉर्पोरेशन शुल्क माफ करना, ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता 2016 (आईबीसी) के तहत वसूली की दर में बढ़ोतरी, सीमा शुल्क संबंधी मंजूरी में लगने वाले वक्त पर निगरानी सहित अन्य सुधार शामिल हैं। 
 
कारोबार सुगमता (ईओडीबी) के लिए नोडल एजेंसी औद्योगिक एवं आंतरिक कारोबार नीति विभाग (डीपीआईआईटी) के अधिकारियोंं समेत राजस्व विभाग, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी), आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने विश्व बैंंक (डब्ल्यूबी) के प्रतिनिधियों के साथ मई महीने में मुलाकात की थी। इस बैठक में अधिकारियों ने इन नए सुधारों का खाका पेश किया, जिससे कार्यकुशलता और पारदर्शिता आई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम इस साल अपनी रैंकिंग में अहम सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। हमने इस साल सुधार की दिशा में बढ़ाए गए कदमों के साक्ष्य व उससे जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। हमें उम्मीद है कि इस साल हम 50 देशों में शामिल हो जाएंगे।'
 
पिछले कुछ साल के दौरान भारत ने कारोबार सुगमता रिपोर्ट में विभिन्न सूचकों में अपनी स्थिति मेंं सुधार की है। उदाहरण के लिए निर्माण को अनुमति मिलने के मामले में पिछले 4 साल के दौरान देश 132 अंक ऊपर आया है और 2018 में 52वेंं स्थान पर पहुंच गया। बिजली कनेक् शन देने के मामले में भारत इस समय 24वें स्थान पर है, जबकि 2014 में 137वेंं स्थान पर था। सीमा पार कारोबार के मामले में भारत इस समय 80वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि 2014 में 126वेंं स्थान पर था। 
 
सीमा पार कारोबार के मामले में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने आईसीईडीएएसएच लागू किया, जिसके माध्यम से हर बंदरगाह पर रियल टाइम के मुताबिक डैशबोर्ड के माध्यम से रोज की मंजूरियों की निगरानी की जाती है। प्रेषित माल को मंजूरी में लगने वाले वक्त के मुताबिक लाल, अंबर और हरे मेंं इसका वर्गीकरकण किया जाता है। अधिकारी ने कहा, 'इससे सीमा अधिकारियोंं को उन प्रेषित मालों को चिह्नित करने मेंं सहूलियत होती है, जिन्हें मंजूरी मिलने में ज्यादा वक्त लगता है और इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।' 
 
सीमा शुल्क विभाग ने जेएनपीटी पर चौबीस घंटे सेवा देने की भी सुविधा शुरू की है, जो प्रेषित माल को मंजूरी दने के मामले में एकल खिड़की की तरह काम करता है। हाल ही में शुरू की घई स्कैनर सेवा के मुताबिक प्रति घंटे 100 कंटेनरों की स्कैनिंग की जा सकती है, जबकि मोबाइल स्कैनर के माध्यम से प्रति घंटे 8-10 कंटेनर की जांच की जा सकती थी। जीएसटी के तहत कर भुगतान करना आसान हुआ है और उसे बाद में और तेज बना दिया गया है। पिछले साल विश्व बैंक की रिपोर्ट में पाया गया था कि रिटर्न दाखिल करने में लगने वाला वक्त बढ़ा है। लेकिन अब जीएसटी कर भुगतान करने वालों को 3 की जगह 2 कर रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी का पूरा असर इस साल की विश्व बैंक की रिपोर्ट में नजर आएगा। इसकी वजह यह है कि जीएसटी 2017 में लागू किया गया था, ऐसे में पिछले साल की विश्व बैंक की रिपोर्ट में इस सुधार को उसी अनुपात के आधार पर समायोजित किया गया था। 
 
अन्य सुधार भी हुए हैं। कारोबार की शुरुआत करने के मामले में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 15 लाख रुपये तक की अधिकृत पूंजी वाली कंपनियों के लिए इनकॉर्पोरेशन शुल्क खत्म कर दिया है।  इसके अलावा राजस्व विभाग ने जीएसटी पंजीकरण के लिए बैंक खाते का ब्योरा देने की जरूरत खत्म कर दी है, इसकी वजह से इस सूचकांक के तहत दो प्रक्रियाएं खत्म हो गईं। निर्माण को अनुमति देने में सुधार की वजह से दिल्ली और मुंबई में गोदाम की लागत घटी है। दिल्ली में गोदाम के इस्तेमाल के लिए भवन के इस्तेमाल पर लगने वाले परमिट शुल्क को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 2 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। अधिकारियों ने उन 13 सुधारों का भी ब्योरा दिया है, जो पहले के वर्षों में किए गए हैं लेकिन विश्व बैंंक ने उसको संज्ञान में नहीं लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'तमाम ऐसे सुधार हैं, जिनकी गणना पिछले साल की रैंकिंग करते समय नहींं की गई, क्योंकि फैसला लेने व उसके असर में कमी थी। हम उम्मीद करते हैं कि इस साल नए सुधारों के साथ इन पर भी विचार किया जाएगा।' 
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