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कंपनियों को कराना होगा जल ऑडिट

रुचिका चित्रवंशी /  July 02, 2019

कंपनियों को निकट भविष्य में अपने यहां जल ऑडिट कराना पड़ सकता है। सरकार ऐसी नीति बनाने पर विचार कर रही है जिसके तहत प्रति यूनिट जल खपत का आकलन किया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह पहल सरकार के देश में टिकाऊ जल स्रोत तैयार करने के प्रयास का हिस्सा है। जल शक्ति मंत्रालय सीमेंट, कोयला, इस्पात और बिजली जैसे क्षेत्रों में जल खपत के मानक को तय करने के लिए नीति का मसौदा तैयार करने की खातिर विचार विमर्श के आरंभिक चरण में है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'फिलहाल यह उभरती हुई चर्चा है, लेकिन हमें उद्योगों द्वारा जल खपत की एक स्पष्ट स्थिति चाहिए। कंपनियां अपने खाता बही में जल पर स्पष्टीकरण दे सकती हैं।' 

 
इस पहल के पहले चरण में खपत के मौजूदा स्तर का निर्धारण किया जाएगा और उसके बाद प्रत्येक उद्योग के लिए लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'लक्ष्यों के आधार पर हम खपत को प्रोत्साहित या हतोत्साहित करने के लिए एक तंत्र तैयार कर सकते हैं।' सरकार ऊर्जा खपत को विनियमित करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में मौजूद प्रदर्शन-प्राप्ति-लक्ष्य योजना से आंकड़े जुटाएगी। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के मुताबिक 'प्रदर्शन-प्राप्ति-लक्ष्य योजना एक नियामकीय तरीका है जिसके जरिये अत्यधिक ऊर्जा खपत वाले उद्योगों में विशिष्ट ऊर्जा खपत को कम किया जाता है। इसके लिए अतिरिक्त ऊर्जा बचत जिसे बेचा जा सकता है, के सत्यापन से लागत प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए इससे जुड़ा बाजार आधारित तंत्र काम करता है।' 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कंपनियां मूल्य-शृंखला का विश्लेषण करती हैं तो कम कीमत के कारण पानी को सूची के अंत में रखा जाता है। जल विशेषज्ञ विश्वनाथन एस ने कहा, 'ऊर्जा के मुकाबले जल उपयोग की रॉयल्टी बहुत सस्ती है। यदि ठीक से इसकी कीमत लगाई जाए तो उद्योग को इसे सीमित पारिस्थितिक स्रोत के तौर पर देखना होगा।' फिलहाल औद्योगिक जल खपत पर ज्यादातर आंकड़ों का प्रबंधन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा किया जाता है लेकिन इनमें काफी अंतर है। उद्योगों से जुटाए गए आंकड़ों से जल संरक्षण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने में मदद मिलेगी, इसके अलावा जल शक्ति मंत्रालय सिंचाई की वजह से जल स्रोतों पर पडऩे वाले दबाव का सामना करने के लिए कृषि मंत्रालय के साथ भी बातचीत कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रति फसल पानी का इस्तेमाल असंगत है। यहां फसलों की सिंचाई चीन, अमेरिका और इजरायल से तीन से पांच गुना अधिक होती है। 
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