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संपत्ति पट्टे पर देगी आर-इन्फ्रा

अमृता पिल्लई और पवन लाल / मुंबई July 01, 2019

अपनी मौजूदा परिसंपत्तियों को भुनाकर समूह के ऋण बोझ को हल्का करने की हालिया कोशिश के तहत अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (आरइन्फ्रा) मुंबई में अपने मुख्यालय की प्रॉपर्टी को लंबे समय के लिए पट्टे पर देने की संभावनाएं तलाश रही है। लेकिन ऐसा करना कंपनी के लिए संभवत: आसान नहीं होगा क्योंकि उस संपत्ति को लेकर विद्युत ट्रिब्यूनल में कानूनी लड़ाई चल रही है। आरइन्फ्रा ने आज कहा कि उसने मुंबई के सांताक्रूज स्थित अपनी प्रमुख प्रॉपर्टी रिलायंस सेंटर ऑफिस को बेचने की योजना बनाई है। वह प्रॉपर्टी 15,514 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 6.95 लाख वर्ग फुट क्षेत्र है। कंपनी ने अपने बयान में कहा, 'रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर उस परिसर पर अपना स्वामित्व बरकरार रखेगी और दीर्घावधि पट्टे के जरिये पैसा जुटाने की योजना बनाई गई है। इससे प्राप्त शत प्रतिशत रकम का इस्तेमाल कंपनी ऋण बोझ घटाने में करेगी।'
 
आरइन्फ्रा ने अपने बयान में यह नहीं बताया है कि इस सौदे से उसे कितनी रकम प्राप्त होने की उम्मीद है। हालांकि मई 2018 में जारी एक सार्वजनिक सूचना में कंपनी ने कहा था कि आरइन्फ्रा ने सांताक्रूज में चार भूखंडों को वर्ष 2017-18 के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों के आधार पर 250 करोड़ रुपये में अपने पास रखा है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगरों में वाणिज्यिक किराये से प्राप्तियां 6 से 10 फीसदी के दायरे में हैं। उस दौरान कंपनी ने अदाणी ट्रांसमिशन को अपने बिजली वितरण कारोबार की प्रस्तावित बिक्री संबंधी खुलासे के लिए वह नोटिस जारी किया था।
 
आरइन्फ्रा ने 2003 में राज्य यूटिलिटी बीएसईएस लिमिटेड से मुंबई में बिजली वितरण कारोबार का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण के तहत 15,514 वर्ग मीटर के भूखंड भी आरइन्फ्रा को हस्तांतरित किए गए थे। पिछले साल अगस्त में कंपनी ने अपना बिजली वितरण कारोबार अदाणी ट्रांसमिशन को बेच दिया लेकिन भूखंड को अपने पास बरकरार रखा। उसी भूखंड पर कंपनी का मुख्यालय है। पहले भी इस प्रॉपर्टी को भुनाने की कोशिश की गई थी लेकिन सौदे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इस मामले से अवगत लोगों का कहना है कि इस परिसंपत्ति को खरीदने में समर्थ निजी इक्विटी कंपनियों की संख्या सीमित होगी और उनमें ब्लैकस्टोन ग्रुप, जीआईसी, ब्रुकफील्ड ऐसेट मैनेजमेंट एवं मैपलवुड इन्वेस्टमेंट जैसी कुछ ही पीई फर्म शामिल हैं।
 
सूत्रों ने संकेत दिया कि ब्लैकस्टोन की नजर इस सौद पर नहीं है जबकि ब्रुकफील्ड ने सौदे का आकलन किया लेकिन मूल्यांकन को लेकर मतभेद के कारण अपना कदम वापस खींच लिया। हालांकि किसी भी संभावित सौदे पर ब्रुकफील्ड की नजर बनी हुई है। प्रॉपर्टी विशेषज्ञों ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि पट्टा-पुनर्खरीद व्यवस्था के तहत इस प्रॉपर्टी को लेने से पहले पूरी जांच पड़ताल की जाएगी कि वे भुगतान करने में समर्थ होंगे या नहीं और यही निर्णायक कारक भी होगा।
 
बहरहाल, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की इस योजना को भी विद्युत अपीलीय ट्रिब्यूनल में उपभोक्ता समूहों द्वारा दायर मुकदमे से झटका लग सकता है। सौदे के तहत अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को भूखंड हस्तांतरित न किए जाने का विरोध करने वाले एक उपभोक्ता समूह का प्रतिनिधित्व करने वाली फर्म एपीटी लीगल के मैनेजिंग पार्टनर आनंद वर्मा ने कहा, 'यह भूखंड आरइन्फ्रा को प्रशासनिक उद्देश्यों से और जरूरत पडऩे पर सब-स्टेशन स्थापित करने के लिए हस्तांतरित किया गया था।' वर्मा ने कहा, 'भविष्य में यदि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को मुंबई में वितरण कारोबार का विस्तार करने की जरूरत पड़ेगी तो वह कोई नया भूखंड किराये पर लेगी अथवा खरीदेगी जिससे शुल्क दरों में इजाफा होगा।' फिलहाल यह मामला एपीटीईएल में सुनवाई के लिए लंबित है और अगली सुनवाई अगस्त में होनी है। उसी भूखंड पर फिलहाल अनिल अंबानी समूह का मुख्यालय है।
 
समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी ने पिछले महीने कहा था कि उनके समूह ने अप्रैल 2018 और इसी साल मार्च के बीच 14 महीनों के दौरान 35,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। मार्च 2018 के अनुसार, समूह का समेकित ऋण बोझ 1.72 लाख करोड़ रुपये है।
Keyword: RINFRA, reliance, ambani,,
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