बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रमुख क्षेत्र की वृद्धि दर मामूली घटी
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प्रमुख क्षेत्र की वृद्धि दर मामूली घटी

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली July 01, 2019

मई महीने में अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों की वृद्धि दर मामूली गिरकर 5.1 प्रतिशत रह गई है, जो अप्रैल के 6.3 प्रतिशत की तुलना में कम है। इस दौरान बिजली उत्पादन व स्टील उत्पादन बढ़ा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में कम या नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि प्रमुख क्षेत्र के 8 उद्योगों- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर मई महीने में कम हुई है, जो अप्रैल में बढ़ी थी। अप्रैल में वृद्धि के आंकड़े बदलकर अब 6.3 प्रतिशत कर दिए गए हैं, जो सरकार द्वारा पहले 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसे इस आधार पर तार्किक करार दिया गया है कि इसमें एचपीआरओ को शामिल किया गया है, जो तैयार स्टील के उत्पादन के अंतर्गत आता है। इस पर अप्रैल 2019 और मई 2019 के दौरान स्टील की वृद्धि दर का असर पड़ा है। 
 
देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष के अंत के लगातार 4 महीनों में कम रही है। परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 19 में वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही, जो पिछले साल के बराबर है।  लेकिन उसके बाद सूचकांक में दूसरे और तीसरे बड़े क्षेत्र बिजली उत्पादन व स्टील उत्पादन में तेज बढ़ोतरी देखी गई है।  मई महीने में स्टील उत्पादन 19.9 प्रतिशत बढ़ा है, जो अप्रैल में हुई 19 प्रतिशत वृद्धि से ज्यादा है। इस क्षेत्र की तेजी से देश के  निर्माण व बुनियादी ढांचा क्षेत्र की सेहत का भी पता चलता है। सीमेंट क्षेत्र में उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा है, जो अप्रैल में 2.3 प्रतिशत बढ़ा था। मार्च महीने में इस क्षेत्र में 15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जो 11 महीने का उच्चतम स्तर है। 
 
वहीं बिजली क्षेत्र में 7,2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अप्रैल के 5.9 प्रतिशत से ज्यादा है। जनवरी महीने में बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले 71 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इससे अर्थशास्त्रियों को आश्चर्य हुआ था और इसके लिए कोयले की निम्न वृद्धि दर को जिम्मेदार बाताया गया था। बहरहाल उसके बाद से इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।  इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में कम कीमत से कच्चे तेल के उत्पादन के साथ साथ रिफाइनरी उत्पादों का निर्यात लगातार प्रभावित हो रहा है। अप्रैल में कच्चे तेल की कीमत में 6.7 फीसदी की गिरावट हुई थी। इस क्षेत्र में वित्त वर्ष 2019 के प्रत्येक महीने में दबाव देखा गया। प्राकृतिक गैस के उत्पादन में अ्रपैल में 0.8 प्रतिशत की गिरावट के बाद इसमें भी शून्य वृद्घि देखी गई। मार्च तक प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 5 महीने लगातार तेजी देखी गई थी।
 
इसके बाद रिफाइनरी उत्पाद जिसका प्रमुख क्षेत्र सूचकांक में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी है, मार्च से 2 महीने तक वृद्घि के बाद मई में 1.5 प्रतिशत गिराट आई। इसने तब दिसंबर 2018 से सुस्ती में फंसे इस क्षेत्र को इससे बाहर निकाला था। कोयला उत्पादन की वृद्घि भी नरम पड़ चुकी है। मई में इसमें महज 1.8 फीसदी की वृद्घि हुई। मार्च में उत्पादन में 9.1 प्रतिशत का उछाल आया लेकिन अप्रैल में यह 3.2 प्रतिशत पर ठहर गया। केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'कोयला और बिजली क्षेत्र ने तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है जो कि एक अच्छा संकेत है। इसका यह भी मतलब है कि औद्योगिक उत्पादन वृद्घि सूचकांक या आईआईपी वृद्घि 2-2.5 प्रतिशत के बीच रहेगी।'
Keyword: india, economy, GDP,,
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