बिजनेस स्टैंडर्ड - खुद बैंक तय कर सकेंगे वेतन
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खुद बैंक तय कर सकेंगे वेतन

रघु मोहन और अभिजित लेले / मुंबई 06 30, 2019

नया फॉर्मूला

बेहतर सरकारी बैंक दे सकेंगे ज्यादा वेतन
कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अलग-अलग पैकेज
बजट के बाद होगी अगले दौर की वार्ता
1966 से चली आ रही परंपरा को मिलेगी तिलांजलि

बिजनेस स्टैंडर्ड खुद बैंक तय कर सकेंगे वेतनइंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और सरकारी बैंकों के बीच चल रही 11वीं द्विपक्षीय वेतन समझौता वार्ता में एक नए फॉर्मूले को शामिल किया गया है। इसके तहत बैंक अपने मुनाफे और वेतन बढ़ोतरी के बोझ को वहन करने की क्षमता के मुताबिक कर्मचारियों का वेतन बढ़ा सकेंगे। बैंक यूनियनों और बैंक प्रबंधनों के बीच 21 जून से बहाल हुई वार्ता में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। आईबीए के तत्वावधान में हो रही इस बातचीत को लोकसभा चुनावों के कारण तीन महीने के लिए रोक दिया गया था। अगले दौर की वार्ता आम बजट के बाद होगी। 

यह प्रस्ताव वेतन बढ़ोतरी के बोझ को वहन की बैंकों की क्षमता पर केंद्रित है और अब तक की परंपरा से हटकर है। करीब 54 साल पहले 19 जनवरी 1966 को पहली वार्ता में बैंकिंग उद्योग में सभी स्तरों पर सबको बराबर वेतन का प्रस्ताव रखा गया था जो एक अप्रैल, 1966 को लागू हुआ था। तबसे यही परंपरा चल रही है।  वार्ता में शामिल रहे एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'वेतनमान में बढ़ोतरी का फैसला करते समय इसकी लागत वहन करने की क्षमता सबसे अहम घटक है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

प्रस्तावित फॉर्मूले के मुताबिक सभी बैंक कर्मचारियों के वेतन में एक निश्चित प्रतिशत तक न्यूनतम बढ़ोतरी होगी और उसके ऊपर बैंक अपने मुनाफे और भुगतान क्षमता के मुताबिक बढ़ोतरी करेंगे।' हालांकि अभी इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन वेरिएबल वेतन के बारे में एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह परिसंपत्तियों और परिचालन मुनाफे पर बैंकों के रिटर्न पर आधारित है लेकिन यूनियन के कुछ नेताओं ने इसे तुरंत खारिज कर दिया।

इस महीने बहाल हुई वार्ता में बैंक अधिकारियों की चार अन्य यूनियनें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन (एआईबीओसी), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), इंडियन नैशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) और नैशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (एनओबीओ) ने आईबीए के साथ अलग से बातचीत की। यह इस तरह की पहली वार्ता है। इसमें पेच यह है कि भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नैशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक ने वरिष्ठï प्रबंधक के स्तर तक वार्ता (तीसरी श्रेणी) की अनुमति दी है जबकि बाकी सरकारी बैंकों ने महाप्रबंधक तक सभी सात श्रेणियों को इसमें शामिल किया है।

सबसे पहले बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों के महासंगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियर्स और आईबीए के बीच वार्ता में मतभेद उभरने शुरू हुए। एआईबोओसी और एनओबीओ का कहना था कि इसमें केवल सहायक महाप्रबंधक तक के अधिकारी शामिल होंगे। अधिकारी यूनियनें चाहती थीं कि इसमें उप महाप्रबंधक और महाप्रबंधकों को भी शामिल किया जाए। आईबीए का कहना था कि ये वरिष्ठï अधिकारी यूनियनों का हिस्सा नहीं हैं। एआईबीओए और आईएनबोओसी की भी यही राय है।

सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों की पांच यूनियनों ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉयीज एसोसिएशन, नैशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक एम्पलॉयीज, बैंक एम्पलॉयीज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन बैँक एम्पलॉयीज फेडरेशन और नैशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और अधिकारियों के संगठनों एआईबीओसी, एआईबीओए, आईएनबीओसी तथा एनओबाीओ के लिए अलग-अलग पैकेज पर काम किया जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कर्मचारी और अधिकारी यूनियनों के मुद्दे पूरी तरह अलग हैं। 11वीं द्विपक्षीय वेतन समझौता वार्ता मई 2017 से चल रही है। मई 2015 में दसवें दौर की वार्ता में वेतन में 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। इस दौर में 8 फीसदी वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। यूनियनों की मांग है कि 10वें दौर की तरह उन्हें 15 फीसदी वेतन बढ़ोतरी मिलनी चाहिए लेकिन वे अपने इस रुख में बदलाव ला सकती हैं। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, IBA,,
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