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बॉन्ड बाजार से धन जुटाएगी एयर इंडिया

अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली June 30, 2019

सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया बॉन्ड बाजार से 22,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। यह कदम कंपनी की बिक्री के पहले बैलेंस शीट दुरुस्त करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। सॉवरिन गारंटी द्वारा आंशिक रूप से समर्थित धन जुटाने का काम दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 7,000 करोड़ रुपये और दूसरे चरण में 15,000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जिनका इस्तेमाल भारतीय व विदेशी कर्जदाताओं के कर्ज के भुगतान में किया जाएगा, जिनसे एयरलाइंस ने 58,000 करोड़ रुपये लिए हैं। 
 
भारतीय स्टेट बैंक की निवेश बैंक संबंधी सहायक इकाई एसबीआई कैप्स को पूरी प्रक्रिया के लिए सलाहकार बनाया गया है। यह कंपनी के इतिहास में सबसे ज्यादा धन जुटाने की कवायद है।  इस प्रक्रिया के तहत 15,000 करोड़ रुपये के जारी बॉन्डोंं की परिपक्वता अवधि करीब 10 साल होगी, जबकि 7,000 करोड़ रुपये के छोटे खंड की परिपक्वता अवधि तुलनात्मक रूप से कम, करीब 3 साल होगी। वित्त मंत्रालय 15,000 करोड़ रुपये के लिए बिना किसी शर्त के गारंटी देने पर सहमत हो गया है, वहीं 7,000 करोड़ रुपये के लिए शर्तें रखी जाएंगी और एयरलाइंस से कहा जाएगा कि वह पुनर्भुगतान की राशि अपनी संपत्तियों की बिक्री व सहायक इकाइयों से जुटाए। बहरहाल इसके लिए बजट आवंटन किया जाएगा जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनी समय पर कर्ज का भुगतान करने में सक्षम होगी। 
 
इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'धन जुटाने की योजना को सरकार ने हरी झंडी दे दी है। यह एयर इंडिया असेट होल्डिंग कंपनी (एआईएएसएल) के माध्यम से किया जाएगा। कुल 22,000 करोड़ रुपये 7,000 करोड़ रुपये और 15,000 करोड़ रुपये के दो चरणों में जुटाए जाएंगे। इस सिलसिले में एसबीआई कैप्स ने संभावित निवेशकों जैसे भारतीय कर्मचारी भविष्य निधि, म्युचुअल फंडों व बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। उनकी ओर से यह कहा गया है कि बेहतीन प्रतिक्रिया के लिए बाजार में पर्याप्त नगदी उपलब्ध है।' 
 
ग्राहकों के लिए एयर इंडिया की खरीद को लुभावना बनाने के लिए बैलेंस सीट के पुनर्गठन की योजना के मुताबिक  धन जुटाना जरूरी था। इस योजना के तहत कंपनी के 29,464 करोड़ रुपये कर्ज को एआईएएसएल को स्थानांतरित किया जाएगा, जिसका गठन कार्यशील पूंजी कर्ज और कंपनी की रियल एस्टेट, कलाकृतियों और 4 सहायक कंपनियों जैसी गैर प्रमुख संपत्तियोंं के लिए विशेष उद्देश्य इकाई (एसपीवी) के रूप में किया गया है।  कंपनी के लिए बाजार से बेहतर प्रतिक्रिया अहम है क्योंकि भारत सरकार ने अपना इरादा साफ कर दिया है कि वह एयरलाइंस कारोबार में नहीं रहना चाहती है और कंपनी को बेचने से उसे खुशी होगी, जिसका पिछले तीन साल मेंं घाटा 19,435 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी के 15 एयरक्राफ्ट बेकार पड़े हुए हैं क्योंकि इनके लिए स्पेयर नहीं हैं और कंपनी वेंडरों को भुगतान करने में सक्षम नहीं है। 
 
कंपनी को वित्त वर्ष 19 में 7,635 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो उसके इतिहास में सबसे बड़ा घाटा है। सरकार ने कहा है कि वह जल्द ही एयर इंडिया की बिक्री की प्रक्रिया फिर से शुरू करेगी। बॉन्ड बाजार के कारोबारियों ने कहा कि 15,000 करोड़ रुपये की सॉवरिन गारंटी होने की वजह से बॉन्ड को बाजार में बेहतरीन प्रतिक्रिया मिलेगी। एक कारोबारी ने कहा, 'सरकार की गारंटी वाले बॉन्ड को ईपीएफओ, सरकार के मालिकाना वाले बीमा फंडों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी क्योंकि वे सुरक्षित कारोबार करना चाहते हैं और सरकारी सिक्योरिटी आश्वासन देती है। बहरहाल यह बॉन्ड के कूपन रेट पर भी निर्भर होगा।'  2012 में कंपनी ने करीब 7,400 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसे मुख्य ररूप से भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और ईपीएफओ ने लिया था। 
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