बिजनेस स्टैंडर्ड - दो साल बाद भी न सहज और न ही सरल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, August 21, 2019 11:05 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

दो साल बाद भी न सहज और न ही सरल

इंदिवजल धस्माना /  June 30, 2019

जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में राष्ट्रीय मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण (एनएए) के कार्यकाल में दो वर्षों का विस्तार, वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि में दो महीने का विस्तार और लॉटरी पर जीएसटी दरों के विवादास्पद मुद्दे को टालकर वोटिंग से बचने जैसे फैसले लिए गए। इन सब मुद्दों से साफ तौर पर पता चलता है कि देश में नई अप्रत्यक्ष कर  व्यवस्था के लागू होने के तीन साल बाद भी तमाम मामलों को निपटाना अभी बाकी है। इसके अलावा अथॉरिटीज ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) से संबंधित मामले भी हैं जहां कई मामलों में परस्पर विरोधाभासी फैसले दिए गए हैं। हालांकि यह कहना भी सही नहीं होगा कि पूरी जीएसटी व्यवस्था में समस्या है और अब तक कोई प्रगति नहीं हुई। यदि ऐसा होता तो दरों में कटौती के बावजूद पिछली तिमाही के दौरान कर संग्रह का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये के पार नहीं जाता।

 
एनएए का कार्यकाल इसी साल नवंबर में खत्म होना था जिसे दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है क्योंकि वह फिलहाल करीब 254 मामलों की जांच कर रहा है। अपना लगभग आधा कार्यकाल पूरा करनेके बावजूद एनएए ने अब तक मुनाफाखोरी के आकलन के लिए कोई स्पष्ट मानदंड तैयार नहीं किया है। इससे विभिन्न अदालतों में मुकदमेबाजी बढ़ रही है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'मुनाफाखोरी को निर्धारित करने के लिए किसी स्पष्ट ढांचे के अभाव में मुनाफाखोरी की मात्रा की गणना करना कठिन है।' उन्होंने बताया कि ऐसे दर्जनों मामले अदालत में लंबित हैं। बुनियादी समस्या कीमतों में 'आनुषंगिक' कमी की व्याख्या को लेकर है जो केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम, 2017 की धारा 171 के अनुसार कंपनियों को जीएसटी दरों में कटौती अथवा इनपुट टैक्स क्रेडिट लाभ के रूप में उपभोक्ताओं को देना होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में 'आनुषंगिक' कमी कर की दरों में कुल कटौती और क्रेडिट में इजाफे के बराबर नहीं हो सकती है।
 
हालांकि वार्षिक रिटर्न- जीएसटीआर9- दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है लेकिन कंपनियों को ये फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है। वर्ष 2017-18 के लिए रिटर्न दाखिल करने की मूल तिथि 31 दिसंबर 2018 थी जिसे कई बार टाल दिया गया था। क्लियरटैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता के अनुसार, जीएसटीआर-9 कारोबारियों के लिए लगातार एक चुनौती बनी हुई है क्योंकि उन्हें फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी (ये फॉर्म फिलहाल भरे जा चुके हैं) में किस प्रकार तालमेल बिठाया जाए और अंतर दिखने पर उससे किस प्रकार निपटा जाए। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2019 में प्रभावी तौर पर कुछ लेनदेन की रिपोर्टिंग की गई लेकिन जीएसटीआर-9 में वित्त वर्ष 2018 से संबंधित कुछ मामलों को स्पष्ट नहीं किया गया जैसे उपयोगकर्ताओं द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की वापसी, रिवर्स चार्ज के तहत भुगतान किए गए कर और वस्तुओं के आयात पर भुगतान किए गए आईजीएसटी पर आईटीसी।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि जीएसटी नेटवर्क से संबंधित समस्याएं भी बरकरार हैं। जीएसटी नेटवर्क पूरी जीएसटी प्रणाली के आईटी ढांचे के लिए जिम्मेदार है। ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर रंजीत महतानी ने कहा कि (शुरुआती चरण के अलावा) आईटी ढांचे की क्षमता जबरदस्त नहीं रही है और वह नियमों में होने वाले बदलावों के अनुरूप पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाता (आईटीसी के निपटान ढांचे में संशोधन को जीएसटीएन पर अपडेट नहीं किया गया था जिससे उसे लागू होने में काफी देरी हुई) है। शुरू में फॉर्म दाखिल करने के लिए समय-सीमा को निलंबित कर दिया गया था क्योंकि जीएसटीएन प्रणाली लोड नहीं ले पा रही थी। साथ ही पोर्टल के ध्वस्त होने के कारण शुरू में ईवे बिलों को लागू नहीं किया जा सका था।
 
हालांकि जीएसटी नेटवर्क के एडमिनिस्ट्रेटर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार के अनुसार, अब इस पोर्टल में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने पूछा, 'क्या पिछले कुछ महीनों के दौरान आपने कोई समस्या देखी है?' उत्पादन इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों के लिए अग्रिम कर संबंधी प्रावधान काफी मायने रखते हैं। हालांकि उद्योग का मानना है कि जीएसटी प्रणाली के तहत एएआर और उसकी अपीलीय निकाय एएएआर में केवल कर अधिकारियों को ही सदस्य बनाया गया है और इसलिए अधिकतर मामलों में फैसले सरकार के पक्ष में ही होते हैं।
 
साथ ही, एएआर के कई फैसलों को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी हुई है। एएआर के नई दिल्ली पीठ ने पिछले साल मार्च में अपने एक फैसले में कहा था कि हवाई अड्डों पर मौजूद शुल्क मुक्त दुकानें यात्रियों से जीएसटी वसूल सकती हैं। इससे उलझन पैदा हो गया क्योंकि पुरानी व्यवस्था के तहत इन दुकानों को सेवा कर एवं केंद्रीय बिक्री कर से छूट मिली थी। इसी प्रकार, सौर ऊर्जा उद्योग का उलझन उस समय बढ़ गया जब महाराष्ट्र एएआर ने कहा कि संयंत्र स्थापित करने संबंधी कार्यों पर जीएसटी की दर 18 फीसदी होगी लेकिन कर्नाटक एएआर ने इसे 5 फीसदी कहा।
 
इस स्थिति से निपटने के लिए जीएसटी परिषद ने एक केंद्रीयकृत एडवांस रूलिंग अथॉरिटी की स्थापना को मंजूरी दी है जो एएआर के आदेशों में विरोधाभास संबंधी मुद्दों को निपटाएगा। हालांकि इसे स्थापित करना अभी बाकी है। केपीएमजी के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा, 'इसमें दो गंभीर समस्याएं हैं। पहला, शुल्क मुक्त दुकानों, सौर ऊर्जा परियोजनाओं आदि पर राज्य के अधिकारियों द्वारा विरोधाभासी फैसले देना। दूसरा, कोरम नॉन-जुडिस यानी एडवांस रूलिंग प्राधिकरणों में न्यायिक सदस्यों का अभाव।'
 
लॉटरी पर जीएसटी दरों का मामला अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को हस्तांतरित कर दिया गया है। उनकी सलाह भले ही कुछ भी हो लेकिन इस मुद्दे पर जीएसटी परिषद में मतभेद बरकरार है कि एकसमान दर लागू किया जाए अथवा राज्य द्वारा संचालित लॉटरी पर 12 फीसदी और राज्य द्वारा प्राधिकृत पर 28 फीसदी की अलग-अलग दरों वाली मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा जाए। जीएसटी परिषद में विभिन्न मुद्दों पर सर्वमान्य निर्णय लेना नई वित्त मंत्री के लिए आसान नहीं होगा।
Keyword: gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पैसे जमा करने से पहले खाताधारकों की अनुमति लेने से बंद होगी धोखाधड़ी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.