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सेबी के नियमों से प्रवर्तकों की मुश्किल बढ़ी

जश कृपलानी / मुंबई June 28, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा प्रवर्तकों को ऋण पर सख्त नियमों से नकदी किल्लत से जूझ रहे उन प्रवर्तकों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने म्युचुअल फंड (एमएफ) फंडिंग हासिल की है। नियामक द्वारा न्यूनतम सुरक्षा कवर 'शेयरों पर ऋण' के लिए निर्धारित किया गया है और ऋण सीमा से मौजूदा ऋणों के पुनर्वित्त की स्थिति में म्युचुअल फंडों के लिए अल्पावधि जोखिम बढ़ सकता है। 

टाटा एमएफ के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (फिक्स्ड इनकम) अखिल मित्तल ने कहा, 'कुछ नियामकीय बदलावों से प्रवर्तकों को अपने ऋणों को आगे ले जाने के लिए गिरवी शेयरों पर रकम जुटाने वाले प्रवर्तकों को समस्या पैदा होगी। विकल्प समझी जाने वालीं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अपनी स्वयं की चुनौतियों की वजह से परेशान हैं।' गुरुवार को अपनी बोर्ड बैठक में बाजार नियामक ने गिरवी शेयर जैसे विकल्पों के जरिये डेट योजनाओं में निवेश करने वाले फंडों के लिए सीमाएं निर्धारित कीं। ऐसे निवेश के लिए सीमा डेट पोर्टफोलियो के 10 प्रतिशत पर तय की गई है। नियामक ने समान समूह से संबंधित कंपनियों में योजना के ऋण स्तर पर 5 प्रतिशत की सीमा भी लागू की है। 

एक फंड प्रबंधक ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ कहा, 'प्रवर्तकों ऋणों के कई मामलों में, एमएफ ने समान समूह या प्रवर्तक से संबंधित कई गैर-सूचीबद्घ कंपनियों को ऋण दिए हैं।' प्रवर्तकों को ऋण देते वक्त म्युचुअल फंड पर्याप्त सतर्कता बरतते हैं। इस नजरिये को ध्यान में रखकर नियामक ने कहा है कि ऐसे निवेश तभी किए जा सकते हैं जब गिरवी शेयरों ने ऋण मात्रा को लेकर चार गुना सुरक्षा कवर मुहैया कराया हो। 

उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि इक्विटी कवर बढ़ाकर चार गुना किए जाने से प्रवर्तकों के लिए एमएफ फंडिंग का आकर्षण घटेगा। एक फंड हाउस के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'प्रवर्तकों के लिए म्युचुअल फंडों की उधारी 1.5 गुना-1.6 गुना के शेयर कवर से संबंधित है। नए नियमों के अनुसार कर्ज में फंसे कुछ प्रवर्तकों के पास अपना इक्विटी कवर दोगुना करने के लिए पर्याप्त शेयर मौजूद नहीं हो सकते हैं।' 

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा कवर प्रवर्तक फंडिंग से संबंधित विभिन्न जोखिमों को दूर करने के लिहाज से पर्याप्त साबित नहीं हो सकता है। जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए नियामक चाहता है कि म्युचुअल फंड सिर्फ एक्सचेंजों पर सूचीबद्घ गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) में ही निवेश करें। मित्तल ने कहा, 'अभी भी ऐसे एनसीडी की तादाद अच्छी खासी है जो गैर-सूचीबद्घ प्रवर्तकों से संबंधित हैं। इस बीच, सीपी गैर-सूचीबद्घ बने हुए हैं। नया नियम इन्हें खुलासा जरूरतों के दायरे में लाएगा जिस पर सूचीबद्घ कंपनियों को अमल करने की जरूरत होगी।'

शेयरों पर ऋण व्यवस्था इस साल के शुरू में उस वक्त भी नियामकीय जांच के घेरे में आ गई थी जब म्युचुअल फंडों ने एस्सेल गु्रप के प्रवर्तकों के साथ समझौता किया था। इस समझौते के तहत फंडों और अन्य ऋणदाताओं ने प्रवर्तकों को पूरा बकाया चुकाने के लिए सितंबर तक का समय दिया था।

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