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बिड़ला एएमसी रियल्टी फंड को एनबीएफसी संकट का झटका

जश कृपलानी / मुंबई June 28, 2019

आदित्य बिड़ला सन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के रियल एस्टेट फंड-1 ने अपने 13 में से 8 रियल एस्टेट निवेश से बाहर होने में असमर्थता के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) क्षेत्र में नकदी संकट को जिम्मेदार ठहराया है। इस एएमसी ने एक निवेशक नोट में कहा है, 'एनबीएफसी क्षेत्र के हालिया नकदी संकट के कारण वित्तीय प्रणाली में नकदी प्रवाह कम होने से रियल एस्टेट क्षेत्र पर दबाव बढ़ गया है। परिणामस्वरूप रियल एस्टेट के संभावित खरीदार कहीं अधिक सतर्क हो गए हैं जिससे मांग काफी घट गई है।'

इस फंड का मूल्यांकन फिलहाल इसके शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) से भी कम है। नोट में कहा गया है कि एक स्वतंत्र आकलनकर्ता ने इस फंड के निवेश का मूल्यांकन इसके एनएवी का 0.89 गुना किया। मुंबई की रियल एस्टेट परियोजनाओं में इस फंड के कई निवेश हैं। जबकि कुछ निवेश चेन्नई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर की रियल एस्टेट परियोजनाओं में हैं।

यह फंड अब तक अपने चार निवेश से सुरक्षित और एक निवेश से आंशिक (98 फीसदी रकम प्राप्त हो चुकी है) तौर पर बाहर निकल चुका है। इससे फंड को अपने निवेशकों को 601 करोड़ रुपये लौटाने में मदद मिली जो शुरुआती निवेश का 57 फीसदी हिस्सा है। साल 2010 में इस फंड ने निवेशकों से 1,056 करोड़ रुपये जुटाए थे।

इस फंड की परिपक्वता अवधि छह वर्ष निर्धारित की गई थी लेकिन उसमें एक-एक साल के लिए दो बार विस्तार दी गई है। इस प्रकार फंड की विस्तारित परिपक्वता अवधि 31 अगस्त 2018 को खत्म हो चुकी है। ऐसे में फंड अब 31 जुलाई 2019 तक अपने पूरे निवेश पोर्टफोलियो को भुनाना चाहता है।

यदि जरूरत पड़ी तो इसमें एक महीने का विस्तार यानी 31 अगस्त 2019 तक का विस्तार भी दिया जा सकता है। बहरहाल, इस एएमसी का कहना है कि एनबीएफसी नकदी संकट के अलावा मांग में सुस्ती के कारण अनबिके मकानों की इन्वेंटरी बढ़ गई है। उसने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) जैसे कदम दीर्घावधि में फायदेमंद साबित होंगे लेकिन फिलहाल इनसे मांग को झटका लगा है।

Keyword: GST, RERA, Fund, Investment Portfolio, NAV, Aditya Birla, NBFC,
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