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लॉजिस्टिक नीति को अंतिम रूप

शुभायन चक्रवर्ती और मेघा मनचंदा / नई दिल्ली June 27, 2019

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के मसौदे को अंतिम रूप दे रहा है, जिसका मकसद लॉजिस्टिक्स लागत घटाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 10 प्रतिशत करना है। इसे जल्द ही मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। 

इस समय लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी की 14 प्रतिशत है, जिसे सरकार ने 2022 तक घटाने की योजना बनाई है। देश भर में वस्तुओं की ढुलाई की रफ्तार बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स चैनलों को जोडऩे के साथ इस नीति में लॉजिस्टिक लागत कम करने व कुछ खास जिंसों का निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इस मकसद के लिए नीति में एक राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स ई मार्केटप्लेस के गठन का लक्ष्य रखा गया है, जो निर्यातकों व आयातकों के लिए एक स्थल पर सुविधाएं देने वाला मार्केटप्लेस होगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में स्टार्टअप के लिए अलग फंड बनाने और इस क्षेत्र में रोजगार दोगुनी करने का भी लक्ष्य रखा गया है। 

बहरहाल इसे लेकर अंतरमंत्रालयी खींचतान जारी है क्योंकि सरकार ने अन्य विभागों की कई योजनाओं का बड़ा हिस्सा प्रस्तावित लॉजिस्टिक विभाग में शामिल करने की बात कही गई है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन होगा। ऐसा माना जा रहा है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की कुछ अहम परियोजनाएं भी अब वाणिज्य मंत्रालय के लॉजिस्टिक्स विभाग में जा सकती हैं। उदारहण के लिए भारतमाला योजना के तहत कई लॉजिस्टिक्स पार्क सड़क परिवहन मंत्रालस के हाथ से निकलकर उद्योग भवन जा सकते हैं। 

यह मसौदा रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय की सलाह से बनाया गया है। नीति पर विचार करते समय 46 साझेदार सरकारी एजेंसियों (पीजीए) के इनपुट का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हमने लॉजिस्टिक्स नीति का मसौदा फरवरी में प्रकाशित किया था और हमें बड़ी संख्या में लोगों की प्रतिक्रिया मिली। इसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा।' सरकार ने क्षेत्रवार समस्या के अध्ययन के लिए इंडिया इंस्टीट्यूट आफ फॉरेन ट्रेड (आईआईएफटी) का गठन किया था, जिससे लॉजिस्टिक क्षेत्र में ज्यादा मूल्य के, श्रम आधारित क्षेत्रों की कठिनाइयों का आकलन किया जा सके। पहले चरण में इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पादों, परिधान, कृषि, रत्न एवं आभूषण, रसायन, इंजीनियरिंग के सामान और दवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। 

आईआईएफटी के निदेशक और कारोबार के विशेषज्ञ मनोज पंत ने कहा, 'उत्पाद केंद्रित अध्ययन बहुत जरूरी है क्योंकि वस्तुओं के बड़े बॉस्केट में एक ही नीति सबके लिए उचित नहीं हो सकती। यह सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिससे निर्यात को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाया जाए और लागत में कमी लाई जा सके।' उन्होंने कहा कि इससे मिली जानकारी फरवरी 2020 में सरकार के सामने पेश की जाएगी। 

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र बहुत बिखरा हुआ और जटिल है। 20 से ज्यादा सरकारी एजेंसियां, 40 पीजीए, 37 एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, 500 सर्टिफिकेशंस और 10,000 जिंस इससे जुड़े हैं। इससे 1.2 करोड़ लोगों का रोजगार, 200 शिपिंग एजेंसियां, 36 लॉजिस्टिक्स सेवाएं, 129 इनलैंड कंटेनर टिपो, 168 कंटेनर फ्रेट स्टेशन, 50 इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के साथ बैंक और बीमा एजेंसियां जुड़ी हैं। सरकार ने गुरुवार को कहा कि इसके साथ ही 81 प्राधिकरण और कारोबार के  लिए 500 प्रमाणपत्रों की जरूरत होती है।

Keyword: Road, Logistics, Transport, रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय, आभूषण, रस,
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