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जी-20 में आर्थिक स्थिरता पर बात

शुभायन चक्रवर्ती /  June 27, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14वें जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को ओसाका (जापान) पहुंचेंगे। उनके एजेंडे में जो प्रमुख मुद्दे होंगे, उनमें बढ़ते शुल्क टकरावों के कारण वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन के खतरे और बढ़ता आतंकवाद शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि भारत ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधार, बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए ऋण को प्राथमिकता और भगोड़े आर्थिक अपराधियों की वापसी को आसान बनाने की बातचीत को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। 

सूत्रों ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध तेज हो रहा है, इसलिए मोदी के लिए वैश्विक नेताओं के बीच व्यापार को संरक्षण मुक्त रखने की सहमति बनाना अहम होगा। वैश्विक व्यापार में वृद्धि का परिदृश्य कमजोर बना हुआ है और माल की मुक्त आवाजाही  के लिए बढ़ते अवरोधों का जिक्र भारत पहले भी कर चुका है। 

सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को आगामी बैठक के अपने एजेंडे का एक अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। वह सम्मेलन में 100 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा और 70 हजार मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की भारत की प्रतिबद्धता के बारे में बात करेंगे। देश ने फ्रांस के साथ मिलकर नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन बनाने में अहम भूमिका अख्तियार की है। इस सप्ताह के प्रारंभ में जी-20 के शेरपा सुरेश प्रभु ने कहा था, 'भारत ऊर्जा स्रोतों में बदलाव के क्षेत्र में अपनी अहम उपलब्धियां दुनिया के सामने रखेगा, जिनसे वैश्विक स्तर पर भी ऊर्जा स्रोतों में अहम बदलाव आ सकता है।' 

भारत डब्ल्यूटीओ में सुधार का मुद्दा इस संगठन में कई बार उठा चुका है। अब वह अपनी इस मांग को जापान में उठाएगा। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री को भारत के रुख के बारे में बताया गया है। भारत का रुख है कि डब्ल्यूटीओ में समय-समय पर सुधार हों ताकि विकासशील देशों को समान मौके मुहैया कराए जा सकें और विवाद निपटान की प्रक्रिया को स्पष्ट बनाया जाना चाहिए। 

मोदी भारत के इस रुख को फिर दोहराएंगे कि वैश्विक वृद्धि के लिए गुणवत्तायुक्त बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि इसी से मांग में इजाफा होगा। भारत ने यह मुद्दा 2014 में ऑस्ट्रेलिया में जी20 की बैठक में उठाया था। अधिकारियों ने कहा कि अन्य देशों के साथ बुनियादी ढांचे को ऋण मुहैया कराने के मॉडलों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत भगोड़े आर्थिक अपराधियों की वापसी से संबंधित बातचीत को भी जी-20 की बैठक में आगे बढ़ा सकता है।  

बैठकों का दौर 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठी बार जी-20 की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। वह इस सम्मेलन से इतर अन्य नेताओं के साथ कम से कम 10 द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। हालांकि जिस बैठक पर लोगों की सबसे अधिक नजर है, वह शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने वाली बैठक है। भाजपा की अगुआई वाले राजग के नई सरकार बनाने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच यह पहली मुलाकात होगी। 

यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देेशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तल्खी आ रही है। दोनों नीतिगत स्तर पर कई घोषणाएं कर चुके हैं। भारत को बार-बार धमकियां मिल रही हैं कि अगर वह रूसी सैन्य उपकरण खरीदने की दिशा में आगे बढ़ा तो उस पर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध लगा देगा। यह मुद्दा भारत के लिए बहुत अहम है। दूसरी तरह अमेरिकी पक्ष के भारत के साथ अपने व्यापार घाटे और अमेरिका से आयातित 29 वस्तुओं पर ऊंचे शुल्क पर बात करने के आसार हैं। 

वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि दोनों नेताओं पर अपने मुद्दों को उठाने का दबाव होगा क्योंकि फिलहाल बैठक के लिए आधे घंटे का समय तय है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो बुधवार सुबह मोदी से मिले हैं। इस बैठक से ट्रंप और मोदी के बीच बैठक का एजेंडा तय होने की संभावना है। मोदी, ट्रंप और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक भी होगी। सूत्रों ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन का आक्रामक रुख से संबंधित मुद्दों और कारोबारी विवादों पर बेहतर समन्वय की प्रतिबद्धता पर चर्चा होने की संभावना है। 

भारत जापान पर भी बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर सहायता जारी रखने के लिए निर्भर है। भारत रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ऐक्विजिशन ऐंड क्रॉस-सर्विसिंग एग्रीमेंट (एसीएसए) पर अग्रिम बातचीत शुरू करने के बारे में भी विचार कर रहा है। इसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट हब के रूप में एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया जाता है। 

एक अन्य त्रिपक्षीय बैठक का हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग होंगे। अब द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय बैठकों का प्रारूप काफी लोकप्रिय बन गया है। यह बातचीत बढ़ते संरक्षणवाद, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और आधिकारिक ब्रिक्स एजेंडा की चर्चा के आसपास केंद्रित रहने की संभावना है।
Keyword: G20, Prime Minister, Narendra Modi, Japan, OSAKA, WTO, US, China, India, Climate,
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