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शहरी गैस वितरण नियमों में बदलाव पर सरकार कर रही विचार

शाइन जैकब / नई दिल्ली June 26, 2019

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के साथ शहरी गैस वितरण (सीजीडी) नियमों में बदलाव लाने के लिए बातचीत कर रहा है। मौजूदा नियमों के मुताबिक यदि प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने वाला कोई ब्लॉक नए सीजीडी भौगोलिक क्षेत्र में आता है तो उस ब्लॉक से मिलने वाला गैस सीजीडी परिचालक को दिया जाना चाहिए।

सरकार का मानना है कि इससे खोजे गए छोटे क्षेत्रों (डीएसएफ) के तहत आने वाले छोटे उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। साथ ही इससे कोल बेड मीथेन उत्पादक भी प्रभावित होंगे। नई ओपन एकरेज लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत पहले से ही उन्हें कर की कम दरों के साथ विपणन और मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता सहित आसान शर्तों की पेशकश की जा रही है।

सीजीडी का कारोबार मॉडल परिवारों के लिए पाइप्ड प्राकृतिक गैस और परिवहन क्षेत्र के लिए संपीडि़त प्राकृतिक गैस की सस्ती दर पर घरेलू आपूर्ति करने पर आधारित है। मौजूदा गैस आवंटन नीति व्यवस्था में सिटी गैस सस्ती दर पर घरेलू गैस के आवंटन को प्राथमिकता देती है जिसके बाद उर्वरक क्षेत्र का स्थान है।

इस साल फरवरी में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता वाली एक समिति ने संपीडि़त प्राकृतिक गैस उपयोगकर्ताओं को रियायती दरों पर गैस आपूर्ति रोकने की सिफारिश की थी और केवल घरेलू रसोई को ही सीधे सब्सिडी देने का प्रस्ताव दिया था। समिति का मानना था कि सीजीडी नेटवर्कों को छूट नहीं दी जा सकती है क्योंकि इससे बाजार मूल्य आधारित गैस डीजल या अन्य वैकल्पिक ईंधनों के मुकाबले सस्ती हो जाएगी।  

एक सूत्र ने कहा, 'यदि उन कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर बाजार दर से कम कीमत पर गैस दी जाती रही तो नए उत्पादकों का अस्तित्व मुश्किल में पड़ जाएगा। इसलिए हम सीजीडी नियमों में बदलाव करने की मांग कर रहे हैं।' दसवें दौर के पूरा होने के बाद सीजीडी की उपलब्धता 228 भौगोलिक क्षेत्रों में हो जाएगी। इसका मतलब होगा कि इसके दायरे में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 402 जिले आ जाएंगे। इसके दायरे में भारत की करीब 70 फीसदी आबादी होगी और इसमें 53 फीसदी इसका भौगोलिक क्षेत्र भी होगा। इसके मुकाबले पहले आठ दौर में भारत का 11 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र और केवल 19 फीसदी आबादी ही कवर हुआ था।     

सीजीडी के नौंवे और दसवे दौर में अगले 10 वर्ष में लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जताई जा रही है। अन्वेषण उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि डीएसएफ और कोल बेड मीथेन दोनों की आपूर्ति सीजीडी कंपनियों को करने का प्रावधान है यदि वे मौजूदा नियमों के तहत बाजार दर के बराबर अदायगी करती हैं। उन्होंने कहा, 'किसी विवाद की स्थिति में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएस) एक तीन सदस्यीय समिति का गठन करेगा जो मामले का निपटारा करने के लिए अधिकृत होगी।' 

भारत अपने पर्यावरण हितैषी छवि को बरकरार रखने के लिए गैस के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। भारत कार्बन उत्सर्जन पर सीओपी21 प्रतिबद्घता को पूरा करना चाहता है। यह पेट्रोल और डीजल जैसे तरल ईंधनों के मुकाबले सस्ता भी है। हाल के वर्षों में गैसे के क्षेत्र में कई उम्दा शोध हुए हैं। मार्च में डीएसएफ बोली के दूसरे दौर में 23 ठेका क्षेत्र में ठेका देने के लिए 14 कंपनियों को सूचीबद्घ किया गया था जिसमें से आठ अन्वेषण क्षेत्र में कदम रखने वाली नई कंपनियां थी।
Keyword: CGD, DGS, Niti Aayog, Rajiv Kumar, Subsidy, CNG, PNG,
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