बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल का खेल: खपत में कटौती, पंप बढ़े
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तेल का खेल: खपत में कटौती, पंप बढ़े

शाइन जैकब /  06 25, 2019

व्यावहारिकता पर आशंका के बादल

ऑल इंडिया पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (एआईपीडीए) की जुलाई के अंत में गोवा में बैठक होने जा रही है। इस बैठक का एजेंडा यह है कि खुदरा तेल कारोबार में व्यापक विस्तार के मद्देनजर अपना कारोबार कैसे बचाया जाए। एआईपीडीए का दावा है कि वह देश के 64,703 पेट्रोल पंपों में से करीब 50 हजार का प्रतिनिधित्व करता है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) 90 हजार करोड़ रुपये के निवेश से कम से कम 78,493 नए पेट्रोल पंप खोलने की तैयारी में हैं। रूस की तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट की अगुआई वाली नयारा एनर्जी (एनईएल) 2020 तक 7 हजार और पेट्रोल पंप खोलेगी। इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और उसकी साझेदार बीपी पीएलसी भी अपने बेड़े में और 2,000 पेट्रोल पंप जोडऩे की तैयारी में हैं। इसके अलावा रॉयल डच शेल भी सैकड़ों पेट्रोल पंप खोलने की योजना बना रही है।

कुल मिलाकर अगले कुछ वर्षों में करीब 85,000 नए पेट्रोल पंप खुलने जा रहे हैं जिससे इस कारोबार की व्यावहारिकता पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं। एआईपीडीए के आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल पंपों को मिलने वाले तेल की औसत मात्रा 2010 में 170 किलोलीटर प्रति माह थी जो 2018 में घटकर 155 किलोलीटर रह गई। आरआईएल और शेल के मामले में यह करीब 300 किलोलीटर है लेकिन एनईएल के मामले में यह औसत से कम है।

पेट्रोल डीलरों का कहना है कि मुनाफा कमाने के लिए उन्हें प्रति माह कम से कम 170 किलोलीटर तेल की जरूरत है। तेल उद्योग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने स्वीकार किया कि पेट्रोल पंपों की संख्या दोगुना करने से औसत आपूर्ति घटकर 70-80 किलोलीटर रह सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि शुरुआत में 16 हजार नए पेट्रोल पंप खोलने की योजना थी लेकिन तेल विपणन कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्‍पर्धा के कारण यह संख्या 78,493 पहुंच गई। 

देश में डीलरशिप के तीन तरह के मॉडल हैं: कंपनी के स्वामित्व और डीलर द्वारा संचालित (सीओडीओ), डीलर के स्वामित्व और उसके द्वारा संचालित (डीओडीओ) और कंपनी के स्वामित्व और उसके द्वारा संचालित (सीओसीओ)। कंपनियां टैंक और डिस्पेंसिंग यूनिट लगाने में 25 लाख रुपये का न्यूनतम निवेश करती हैं। डीलर आमतौर पर आपूर्ति और एक तय मार्जिन के आधार पर अपने निवेश और परिचालन लागत की वसूली करते हैं। लेकिन आपूर्ति घटने से उनका मुनाफा प्रभावित होगा। 

हालांकि इस मामले में प्रतिस्पद्र्घा ही चिंता का विषय नहीं है। वैकल्पिक ईंधन की बढ़ती मांग भी एक खतरा है। एआईपीडीए के अध्यक्ष अजय बंसल कहते हैं, 'शहरों में गैस नेटवर्क का व्यापक विस्तार हो रहा है और सरकार ने 2030 तक सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा है। इतना ही नहीं वाहनों की बिक्री भी घट रही है और पेट्रोल तथा डीजल की खपत मामूली बढ़ रही है।'

उन्होंने कहा कि अगर पेट्रोल पंपों को प्रति माह 70-80 किलोलीटर तेल मिलता है तो उनका मुनाफा खत्म हो जाएगा क्योंकि करीब 10 हजार सीएनजी, बायो-सीएनजी और एलएनजी पंप भी खुल रहे हैं और कुछ शहरों में डीजल पर प्रतिबंध लगाने की भी तैयारी है। ये उपाय एक व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके तहत 2022 तक कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में 10 फीसदी कटौती की जानी है। साथ ही सरकार प्रदूषण की समस्या से भी निपटना चाहती है। 

पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर इसका प्रभाव दिखने लगा है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठï (पीपीएसी) के मुताबिक 2017-18 की तुलना में 2018-19 में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में महज 8 और 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। क्रिसिल रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 2023 तक तेल की लगातार बढ़ती मांग में 5 फीसदी और 2030 तक 3.8 फीसदी की कमी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति के मौजूदा स्तर को बनाए रखने के लिए आधे से कम अतिरिक्त पेट्रोल पंपों की गुंजाइश है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'अगर केवल प्रस्तावित पेट्रोल पंपों में से 30 फीसदी यानी 30 हजार खोले जाएं तो अगले 12 साल तक आपूर्ति का मौजूदा स्तर बरकरार रहेगा। इससे डीलरों को आपूर्ति 160 किलोलीटर प्रति माह के स्तर पर बनी रहेगी और डीलरों को 12 से 15 फीसदी का रिटर्न मिलता रहेगा।'

तो फिर कंपनियां व्यापक विस्तार क्यों कर रही हैं? आईओसी के एक अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद आम आदमी की तेल तक पहुंच आसान बनाना और एक करोड़ से लेकर डेढ़ करोड़ रोजगार पैदा होंगे। एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित पेट्रोल पंपों में से एक तिहाई ग्रामीण इलाकों में होंगे। रिकॉर्ड के मुताबिक भूमि अधिग्रहण सहित विभिन्न समस्याओं के कारण प्रस्तावित पेट्रोल पंपों में से केवल 30 फीसदी ही स्थापित होंगे। 

हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण के मुताबिक यह विस्तार वास्तव में पिछड़े इलाकों में पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ाना नहीं है। 78,493 प्रस्तावित पेट्रोल पंपों में से 48 फीसदी यानी 37,693 सर्वाधिक खपत वाले पांच राज्यों राजस्थान (9,621), उत्तर प्रदेश (9,027), मध्य प्रदेश (7,285), महाराष्टï्र (6,645) और तमिलनाडु (5,115) में स्थापित किए जाएंगे। पेट्रोलियम उत्पादों की मौजूदा खपत में इन राज्यों का योगदान 38 फीसदी है और कुल पेट्रोल पंपों में से 43.4 फीसदी इन्ही राज्यों में हैं। 

द बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के पार्टनर और निदेशक अनिर्वाण मुखर्जी ने कहा, 'अगर दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों सहित वैकल्पिक स्रोतों की तरफ बढ़ रही है तो गैर जीवाश्म राजस्व को तरजीह देकर पेट्रोल पंपों के कारोबार पर नए सिरे से काम किया जाना चाहिए। यह बाजार आधारित सूक्ष्म योजना होनी चाहिए जिसे उस इलाके के उपभोक्ताओं की जरूरत के मुताबिक बनाया जाना चाहिए।' साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंप कुछ और कारोबार कर सकते हैं।

बिग बाजार और रिलायंस रिटेल जैसी सुपरमार्केट शृंखलाओं को तेल बेचने की अनुमति देने की योजना की भी चर्चा है। एक तेल विपणन कंपनी के अधिकारी ने कहा कि 60 किलोलीटर आपूर्ति में ही डीलर मुनाफा कमा सकते हैं बशर्ते वे तेल के इतर कारोबार बढ़ाएं। लेकिन 60 हजार से अधिक डीलरों और 17 लाख कर्मचारियों के लिए इस तरह की योजना उनकी तात्कालिक आशंकाओं को दूर करने के लिए दूर की कौड़ी है।

Keyword: AIPDA, BPCL, HPCL, IOC, NEL, नयारा एनर्जी, OIL, RIL, Petrol Pump,
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