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'नल से जल' कितनी सफल!

रुचिका चित्रवंशी /  June 25, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव में किए गए वादे 'नल से जल' को पूरा करने के लिए जल मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर योजना को आर्थिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर काम कर रहा है जिससे साल 2024 तक सभी घरों में नल से पीने योग्य पानी पहुंचाया जा सके। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पिछले सप्ताह आधिकारिक तौर पर गठित जल शक्ति मंत्रालय शहरी और ग्रामीण गरीबी उत्थान तथा ग्रामीण विकास मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करेगा जिससे देश भर में इस योजना की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। पीने योग्य पानी की आपूर्ति के लिए कीमतों पर विचार करने के साथ-साथ सरकार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण की लागत को पूरा करने के तरीकों के बारे में भी चर्चा करेंगे। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के केवल 18 प्रतिशत हिस्से में नल से पीने योग्य पानी की आपूर्ति होती है और 40 लाख से अधिक घर इसकी पहुंच से बाहर हैं। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में टंकी लगे पानी की आपूर्ति 5 प्रतिशत से भी कम है। 

देश में स्वच्छ भारत अभियान में प्रत्येक घर के लिए अलग से 12,000 रुपये की राशि रखी गई है जिससे पीएम आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत शौचालयों का निर्माण किया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर ही केंद्र सरकार सभी घरों तक नल से पीने योग्य पानी पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। 

अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान में सीनियर फेलो भरत शाह कहते हैं, 'हम पहली बार ढांचागत निर्माण अच्छे तरीके से करते हैं लेकिन इसे बनाए रखने में विफल हो जाते हैं। अभी तक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं है लेकिन पानी के रिसाव और टूटी पाइपलाइनों से बचने के लिए मजबूत संरचनाएं बनाई जानी चाहिए।'

सरकार घरों में पानी की आपूर्ति को समय सीमा में बांधने पर भी विचार कर रही है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगर देश के सभी घरों में 24 घंटे पानी की आपूर्ति होगी तो पानी की बरबादी संबंधी चिंताएं सामने आने लगेंगी। हमें आदतें बदलने के लिए जोर देना होगा जिससे तेजी से घट रहे पानी के संसाधनों को भी बचाया जा सके।'

नीति आयोग के एक अध्ययन के अनुसार साल 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति की दोगुनी हो जाएगी जिसके चलते लाखों लोगों के लिए पानी की भारी किल्लत होगी और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 6 प्रतिशत का नुकसान होगा। 

जल शक्ति मंत्रालय सतही और भू-जल के उपयोग की योजना बना रहा है और यह क्षेत्र विशेष में पीने के पानी की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। हालांकि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में पानी के इन दोनों संसाधनों की भारी कमी है और परिवहन द्वारा पानी उपलब्ध कराना दूसरी जटिल चुनौती होगी। 

नीति आयोग की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2020 तक देश के 21 शहरों में भूजल लगभग समाप्त हो जाएगा। जल संसाधन विभाग के अनुसार देश में प्रति व्यक्ति पानी उलब्धता साल 1950 के 5,000 घन मीटर से घटकर वर्तमान में 1,400 घन मीटर पर आ गई है। 

एकीकृत जल संसाधन विकास के लिए राष्ट्रीय आयोग के अनुसार अधिकतम उपयोग के संदर्भ में वर्ष 2050 तक पानी की आवश्यकता 1,180 अरब घन मीटर (बीसीएम) होगी जो फिलहाल 695 बीसीएम है। 
हालांकि बिहार में सामान्य दरों पर दो करोड़ घरों को पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने की पहल को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने इस महत्त्वाकांक्षी योजना के लिए सभी राज्यों से अंतिम योजना रणनीति बनाने के लिए कहा है। 
2019 लोकसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में भाजपा ने वादा किया था कि पार्टी 'जल जीवन मिशन' शुरू करेगी जिसके तहत साल 2024 तक सभी घरों में नल से पीने योग्य पानी पहुंचाया जाएगा। घोषणापत्र में यह भी कहा गया था कि सरकार 'ग्रामीण जल निकायों और भूजल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के लिए पानी की सतत आपूर्ति' सुनिश्चित करेगी। 
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय को बदलकर जल शक्ति मंत्रालय नाम किया गया है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय भी जल शक्ति मंत्रालय का ही हिस्सा होगा।
Keyword: Niti Ayog, Nal Jal, Piped Water, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, Prime Minsiter, Narendra Modi, Poverty Line,
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