बिजनेस स्टैंडर्ड - एफडीआई की बढ़े आवक साथ आएं सभी अंशधारक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 16, 2019 07:55 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

एफडीआई की बढ़े आवक साथ आएं सभी अंशधारक

राजीव कुमार /  June 25, 2019

लगातार दो वर्ष तक 60 अरब डॉलर पर ठहरे रहने के बाद वर्ष 2018-19 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सकल आवक बढ़कर 64.37 अरब डॉलर हो गई। यह बात उल्लेखनीय है कि तमाम आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद विदेशी निवेशकों ने भारत में भरोसा बनाए रखा। वर्ष 2006-07 के बाद से एफडीआई निवेश में तीन गुना इजाफा इस बात का प्रतीक है। उस वक्त यह राशि 22.8 अरब डॉलर थी। बहरहाल शुद्ध एफडीआई आवक पर ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि ये वास्तव में हमारी बाहरी खाते को संतुलित बनाने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम करते हैं। 

अच्छी खबर यह है कि वर्ष 2018-19 में शुद्ध एफडीआई आवक भी 2017-18 के 39.43 अरब डॉलर से बढ़कर 45.28 अरब डॉलर हो गई। वर्ष 2019 में 15 फीसदी की वृद्धि दर के साथ यह बढ़ोतरी उल्लेखनीय तो है ही, बीते दो वर्ष के एकदम विपरीत भी है। उन दो वर्षों में शुद्ध एफडीआई आवक में क्रमश: 6 और 6.6 फीसदी की गिरावट आई थी। ऐसे में 2018-19 की शुद्ध आवक को अच्छी वापसी माना जा सकता है क्योंकि यह 2015-16 के 44.9 अरब डॉलर के अब तक के उच्चतम स्तर को भी पार कर गई। 

यह बात ध्यान देने लायक हो सकती है कि अंकटाड (वैश्विक निवेश रिपोर्ट) के मुताबिक भारत अब सर्वाधिक एफडीआई आवक करने वाले देशों में 10वें स्थान पर है। अमेरिका 2018 में 252 अरब डॉलर के एफडीआई के साथ शीर्ष पर है। वैश्विक सीमा पार निवेश आवक में भारत की हिस्सेदारी 2010 के 2 फीसदी से बढ़कर 2018 में 3.2 फीसदी हो गई। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि विश्व बैंक के विकास सूचकांक आंकड़ों के मुताबिक देश के जीडीपी में शुद्ध एफडीआई आवक की हिस्सेदारी बीते वर्षों में काफी कम हो गई। सन 1999 में जहां यह जीडीपी के 3.6 फीसदी के उच्चतम स्तर पर थी, वहीं 2017 में यह गिरकर 1.6 फीसदी रह गई।

वर्ष 2018-19 में इसने वापसी की और आज यह बेहतर स्थिति में है। जीडीपी में हिस्सेदारी के रूप में देश का प्रदर्शन 2017 में चीन और अमेरिका के समतुल्य नजर आ रहा है। हालांकि हकीकत यह है कि उनका जीडीपी भारत की अर्थव्यवस्था के पांच गुना के बराबर है। वर्ष 2018 में चीन 129 अरब डॉलर की एफडीआई जुटाने में कामयाब रहा। यह स्पष्ट है कि सन 1982 में साहसी ढांचागत सुधारों के बाद से चीन का शानदार आर्थिक प्रदर्शन काफी हद तक एफडीआई पर निर्भर रही है।

यही कारण है कि चीन के जीडीपी में एफडीआई की आवक सन 1982 के 0.6 फीसदी से बढ़कर 1993 में 6.2 फीसदी हो गई थी। इस अवधि में चीन की प्रति व्यक्ति आय 203 डॉलर से बढ़कर 377 डॉलर हो गई। यह तब से लगातार बढ़ रही है।

हमारे मामले में सन 1982 में यह बेहद कम थी। जीडीपी के प्रतिशत के रूप में एफडीआई सन 2008 में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। उच्चतम स्तर पर रहते हुए भी देश के जीडीपी में एफडीआई की हिस्सेदारी चीन के उच्चतम स्तर के आधे से थोड़ी ही ज्यादा थी। सन 1982 में दोनों का स्तर समान था। स्पष्ट है कि हमने अतिरिक्त रोजगार तैयार करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में विदेशी पूंजी निवेशकों पर निर्भरता चीन की तुलना में काफी पहले कम कर ली। इस संदर्भ में देखें तो शायद यह बात ध्यान देने लायक होगी कि सन 1991 में चीन और भारत की प्रतिव्यक्ति आय कमोबेश वैश्विक स्तर के 6-7 फीसदी के समान थी। सन 2018 तक चीन की प्रति व्यक्ति आय वैश्विक औसत के 85 फीसदी जबकि भारत की केवल 18 फीसदी रह गई थी। जाहिर सी बात है कि इससे हम काफी कुछ सीख सकते हैं।

इन बातों के बीच देश में एफडीआई आवक के एक गुणधर्म को चिह्नित करने की आवश्यकता है। सकल एफडीआई आवक में मौजूदा परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने वाले ब्राउनफील्ड और नए रोजगार और नई क्षमता का निर्माण करने वाली ग्रीनफील्ड आवक शामिल होती है। पाठक ब्राउनफील्ड निवेश के हालिया उदाहरणों से परिचित होंगे। मिसाल के तौर पर फ्लिपकार्ट में वॉलमार्ट का 16 अरब डॉलर का निवेश, गैजप्रॉम द्वारा एस्सार रिफाइनरी का 12.9 अरब डॉलर में अधिग्रहण, जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10.8 अरब डॉलर में रिलायंस कम्युनिकेशंस का अधिग्रहण। ऐसे 25 सौदों का आंकड़ा बताता है कि वर्ष 2007-08 से ऐसे ब्राउनफील्ड निवेश में 166 अरब डॉलर की राशि का प्रयोग किया गया।

यह यकीनन कम अनुमानित है। वर्ष 2008 से 2018 के बीच अनुमानित ग्रीनफील्ड एफडीआई की राशि 255 अरब डॉलर रही। जबकि इस अवधि में ब्राउनफील्ड एफडीआई 262 डॉलर रहा। वास्तविक आंकड़े अनुमानित आंकड़ों से कमजोर रहे। एक विचित्र बात यह है कि दोनों तरह के एफडीआई की आवक को अलग-अलग करने वाले आंकड़े घरेलू तौर पर सरकारी या निजी स्रोतों से उपलब्ध नहीं हैं। एफडीआई के आंकड़ों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के आंकड़ों की तरह उपलब्ध कराने के लिए कुछ सुधार करना आवश्यक है।

एफडीआई की आवक को घरेलू निवेशकों पर विशेष तरजीह दिए जाने की आवश्यकता है। हमारी स्थिति चीन से काफी अलग है। चीन में निजी संपदा पर तीन दशकों तक लागू रही पुरातनपंथी रोकथाम के बाद उद्यमी प्रतिभाओं और निवेश करने लायक संसाधनों को तवज्जो मिली जबकि हमारे यहां उद्यमिता का समुदाय हमेशा फलता-फूलता रहा। इस समुदाय को निवेश भी मिला जो आम तौर पर घरेलू जमा पर आधारित था। एफडीआई का फाइनैंस हमारी कुल आय के बमुश्किल 5 फीसदी के लिए उत्तरदायी है।

अब हमें व्यापक तौर पर यह चर्चा करनी होगी कि ऐसी नीति को जारी रखने के क्या लाभ अथवा नुकसान हैं जो ग्रीनफील्ड एफडीआई आवक को आकर्षित करने का काम करती है। इस मामले में हमें अपनी स्थिति सुस्पष्ट करनी होगी ताकि सभी अंशधारक एक साथ आ सकें। इससे नीतिगत सुनिश्चितता तय होगी और एफडीआई को लेकर सभी स्तरों पर सटीक अनुमान लगाना संभव हो सकेगा। इस बहस में हमें निर्यात आधारित एफडीआई और टैरिफ को लेकर भी भेद करना होगा। इस विषय में अब तक जो भी जानकारी उपलब्ध है उसके मुताबिक निर्यातोन्मुखी एफडीआई का अर्थव्यवस्था पर कहीं अधिक व्यापक प्रभाव पड़ता है। अगर हमें देश की अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो ऐसी स्पष्ट, एकीकृत करने वाली और सटीक अनुमान लगाने वाली नीति अवश्य फायदा पहुंचाएगी। 

(लेखक नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं। लेख में प्रस्तुत विचार निजी हैं।)
Keyword: FDI, tariff, Economy, Investor,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या डीएचएफएल समाधान में बढ़ेगी बैंकों की मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.