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सेबी के निर्देश से म्युचुअल फंडों की वितरण लागत में आई कमी

जश कृपलानी / मुंबई June 25, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फंड हाउसों को योजनाओं में सभी खर्चों का बहीखाता तैयार करने के निर्देश दिया है जिससे कुछ परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) के लिए वितरण संबंधित लागत में कमी आई है। परिसंपत्ति के संदर्भ में भारत के सबसे बड़े फंड हाउस एचडीएफसी एएमसी के शुल्क और कमीशन खर्च 2018-19 में 26 प्रतिशत घटकर 240 करोड़ रुपये पर दर्ज किए गए। 

फंड हाउस ने हाल में प्रकाशित अपनी 2018-19 की सालाना रिपोर्ट में कहा है, 'नियामकीय बदलावों की वजह से कंपनी द्वारा 22 अक्टूबर 2018 से बिक्री पर कोई कमीशन नहीं चुकाया गया। इस मद में बचत के परिणामस्वरूप कमीशन खर्च में कमी आई है।'

फंड हाउस ने कहा, 'वितरकों को चुकाए जाने वाले कुछ खास योजना-आधारित खर्च और कमीशन को 21 अक्टूबर 2018 तक कंपनी द्वारा वहन किया गया था।' अन्य सूचीबद्घ एएमसी रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी ने भी अपने शुल्क एवं कमीशन खर्चों में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है। पूर्ववर्ती वर्ष के 310 करोड़ रुपये की तुलना में 2018-2019 में ये खर्च घटकर 258 करोड़ रुपये पर रह गए।

विश्लेषकों का कहना है कि पिछले महीनों में सेबी द्वारा उठाए गए कुछ कदमों से फंड हाउसों  को अच्छा मार्जिन हासिल करने में मदद मिलेगी। उद्योग के एक विश्लेषक ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ कहा, 'इसके अलावा नियामक ने अग्रिम कमीशन भी समाप्त कर दिया है। इन नियमों से फंड हाउसों के लिए मुनाफे में सुधार आएगा।'

कुल खर्च अनुपात (टीईआर) में संशोधन के बाद जहां बड़े फंड हाउसों की शुल्क आय में बड़ी कमी का अनुमान है, वहीं विश्लेषकों का कहना है कि ये फंड हाउस टीईआर कटौती के प्रभाव को सीमित करने में सक्षम होंगे। एक फंड हाउस के अधिकारी ने कहा, 'ज्यादातर बड़े फंड हाउसों का कहना है कि इस कटौती का बड़ा असर वितरकों पर पड़ेगा।' नए मानकों में बड़े आकार की योजनाओं को कम टीईआर रखने की जरूरत होगी जिससे कि इसका फायदा निवेशकों को मिल सके।

उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, टीईआर में कटौती सभी पक्षों के लिए अच्छा संकेत है, क्योंकि निवेश की कम लागत से म्युचुअल फंड योजनाओं में ज्यादा पूंजी आकर्षित होगी। हालांकि स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों ने प्रमुख फंड हाउसों के अधिकारियों को पत्र लिखकर यह सवाल पूछा है कि टीईआर कटौती का बोझ वितरकों को क्यों वहन करना चाहिए।

म्युचुअल फंड उद्योग निवेशक प्रवाह में नरमी आने की आशंका जता रहा है। नवंबर 2018 और फरवरी 2019 के बीच उद्योग ने इक्विटी प्रवाह में चार महीने की मंदी का सामना किया था। मार्च में सुधार दर्ज करने के बाद, इक्विटी प्रवाह पिछले महीने 5,000 करोड़ रुपये के फरवरी के स्तर पर वापस लौटा है। 

आईएलऐंडएफएस संकट की वजह से डेट बाजार में पैदा हुई अनिश्चितता से आय योजनाओं में 2018-19 की दूसरी छमाही में लगभग 68,000 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।

Keyword: SEBI, AMC, Fund house, Asset, Regulatory,
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