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गलती करने वालों के साथ अच्छे लोग दंडित न हों

सोमशेखर सुंदरेशन /  June 25, 2019

'अशुरंस इंडस्ट्री' संकट में है। इस स्तंभ में इस जुमले का इस्तेमाल हम सनदी लेखाकारों और अंकेक्षकों के पेशे और साथ ही साथ क्रेडिट रेटिंग की गतिविधियों के लिए करेंगे। ये सभी इन दिनों भरोसे के संकट से जूझ रहे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात नहीं है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि व्यवस्थागत रूप से महत्त्वपूर्ण वित्तीय संस्थान दबाव में हैं। नियामकों ने बिना सोचे समझे जो कदम उठाए हैं उनके चलते भी ये संस्थान प्रभावित हुए हैं और निवेशकों का विश्वास एकदम निचले स्तर पर है। 

यह नियामकीय व्यवस्था के लिए भी बहुत ही संवेदनशील और नाजुक मोड़ है। कॉर्पोरेट और कारोबारी जगत में किसी भी तरह की भूमिका वाले हर व्यक्ति का इस उद्योग के अच्छा या बुरा होने के बारे में अपना नजरिया है। हालात से निपटने के लिए ऐसे कौशल संपन्न लोगों की आवश्यकता है जो शांतिपूर्ण ढंग से हालात से निपटने में सक्षम हों। 

हालात से निपटने के लिए जंगी तौर तरीके अपनाने की आवश्यकता नहीं है। जंग महंगी होती है और उसके साथ यह भावना स्वाभाविक रूप से आती है कि मुहब्बत और जंग में सब जायज होता है। यहां मुहब्बत समाज के संरक्षण से होती है और नफरत उन लोगों से जो समाज विरोधी होते हैं। युद्घ के समय कोई इस बात की परवाह नहीं करता कि खुद उसे कितना नुकसान हो रहा है, कितने मासूम मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं। अगर युद्घ लोगों को पसंद हो तो लोग इस कीमत को स्वीकार कर लेते हैं। नियामक और राजनीतिक सत्ताधारी भी इंसान होते हैं और मानवीय भावनाओं से परे भी नहीं होते।

ऐसे में इस बात की काफी आशंका रहती है कि अवांछित चीजों के साथ कुछ मूल्यवान चीजें भी नष्टï हो जाएं। जब ऐसे आरोप लगते हैं कि अंकेक्षक मिलीभगत से बहीखातों में छेड़छाड़ करते हैं या फिर रेटिंग एजेंसियां धोखाधड़ी कर रही हैं तो इसके गहन और गंभीर परिणाम होना तय है। ऐसा केवल आरोपितों के खिलाफ ही नहीं बल्कि समाज के शेष तबके पर भी लागू होती है। सूचना और बाजार के समक्ष उपलब्ध सूचना की सत्यनिष्ठता अहम निर्णय लेने के लिए निर्णायक है। फिर चाहे मामला निवेश का हो, ऋण के निर्णय का, बुनियादी कारोबार या कारोबारी निर्णयों का अथवा नीतिगत निर्णयों का। ऐसे में इन एजेंसियों के खिलाफ लगाने वाले आरोपों को लेकर अतिरिक्त सावधानी और संवेदना बरतनी होगी। अगर इन आरोपों के समर्थन में ज्यादा कुछ नहीं है और ये आरोप हल्के फुल्के ढंग से लगाए जा रहे हैं तो न केवल उनको नुकसान पहुंचता है बल्कि हर उस व्यक्ति को नुकसान पहुंचता है जिसकी निर्णय प्रक्रिया उनकी सेवाओं से प्रभावित होती है। 

अगर उद्योग जगत में उनके द्वारा किया गया काम अच्छी गुणवत्ता वाला नहीं है तो निर्णय प्रक्रिया की गुणवत्ता पर भी बुरा असर होगा और इसका व्यापक सामाजिक असर होगा। यही कारण है कि इस उद्योग की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील हो चुकी है। शायद यही वजह है कि ऐसी गतिविधियों के लिए लाइसेंस प्रदान करने और पंजीयन का काम अत्यंत सख्त निगरानी के बाद किया जाता है। बाजार नियामक के लिए ब्रोकिंग लाइसेंस जारी करना आसान है लेकिन क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का लाइसेंस हासिल करना काफी मुश्किल है। अगर ऐसी एजेंसियों पर किसी तरह की गड़बड़ी करने का शक हो तो भी उन पर हमले करते समय जुबान फिसलने और नाटकीयता बरतने से बचना चाहिए। 

अगर सरकार के प्रति नफरत इसी प्रकार बढ़ती गई तो सड़कों पर उतरने वाली भीड़ सरकार को ही उखाड़ फेंकना चाहेगी। यह रूमानी प्रतीत हो सकता है या कम से कम उचित तो प्रतीत हो ही सकता है। परंतु इस प्रक्रिया में भी अराजकता का सामना करना पड़ सकता है। इसी प्रकार अगर अश्युरंस क्षेत्र के लोगों के प्रति असंतोष बहुत ज्यादा हो तो इससे अफरातफरी का माहौल बन सकता है। 

ऐसी नियामकीय परिस्थितियों में नियामक की भूमिका को लेकर एक विवाद उत्पन्न हो सकता है कि वह अपने लक्ष्यों तक समझदारी से कैसे पहुंचे और गलत आचरण करने वालों के खिलाफ उसकी भूमिका क्या हो? दोनों लक्ष्यों के बीच द्वंद्व उचित है और वह अहम भी है। उदाहरण के लिए अगर किसी बैंक के खिलाफ बहुत सख्त कदम उठाए जाते हैं तो बैंक में आम जनता का भरोसा समाप्त हो जाएगा। दूसरी ओर अगर किसी गलती करने वाले बैंक को आसानी से छोड़ दिया जाएगा तो ऐसा गलत आचरण करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। इससे ऐसी आश्वस्ति पैदा होगी कि बैंक इतने बड़े हैं कि वे कभी नाकाम नहीं हो सकते। 

इन दोनों लक्ष्यों के बीच का अंतर और द्वंद्व इतना तीक्ष्ण है कि ब्रिटेन ने बाकायदा एक नियामकीय डिजाइन के माध्यम से इस नियामकीय ढांचे को आचरण प्राधिकार और विवेक प्राधिकार के रूप में दो हिस्सों में बांट दिया है। हमारे देश में अशुरंस उद्योग का नियमन इतने विशिष्ट तरीके से नहीं किया जाता है। हालांकि हकीकत में ऐसा किया जाना चाहिए। किसी गलत काम में संस्थागत या संगठनात्मक संबद्घता के बावजूद नियम ऐसे होने चाहिए कि बिना व्यक्तिगत रूप से गलती के जिम्मेदार लोगों को बचाए, संस्थान को बचाया जा सके। गलती करने वालों को कारोबार से बाहर करने से सुर्खियां तो मिलेंगी लेकिन इसका असर उतना ही तात्कालिक होगा जितना कि सुर्खियों का। 

(लेखक अधिवक्ता और स्वतंत्र सलाहकार हैं। वह पेशेवर रूप से अशुरंस उद्योग का प्रतिनिधित्व करते हैं।)
Keyword: CA, Chartered Accountant, Auditor, Corporate, Business, Regulator, Bank,
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