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आचार्य के पद छोडऩे पर मिश्रित प्रतिक्रिया

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली June 24, 2019

कार्यकाल पूरा होने के 6 महीने पहले रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे पर विशेषज्ञों की मिली जुली प्रतिक्रिया आई है। यह इस्तीफा ऐसे समय  हुआ है, जब वित्तीय क्षेत्र में पिछले एक साल में कई बदलाव हुए हैं। पिछले तीन साल में रघुराम राजन और ऊर्जित पटेल को अचानक रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद छोडऩा पड़ा है। अब विरल आचार्य ने रिजर्व बैंक छोड़ा है, जो आर्थिक और नीति शोध विभाग में अन्य लोगों के साथ मौद्रिक नीति विभाग के प्रभारी थे। 

नोमुरा में प्रमुख अर्थशास्त्री और प्रबंध निदेशक सोनल वर्मा ने लिखा है, 'डॉ आचार्य का जाना पूरी तरह आश्चर्यजनक नहीं है। सरकार के साथ केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर खींचतान से जुड़े मसले सामने थे।' अनूप नंदी के साथ लिखी रिपोर्ट में वर्मा ने कहा है कि जल्द ही उत्तराधिकारी ढूंढने की कवायद हो सकती है और वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य माइकल पात्र दो संभावित दावेदार हैं। 

केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि यह घटना आश्चर्यजनक है और रिजर्व बैंक को डॉ आचार्य का विकल्प खोजने की कवायद तेज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी गवर्नर एन विश्वनाथन के कार्यकाल को विस्तार देने से मौजूदा नीति को जारी रखने में मदद मिल सकती है। सबनवीस ने कहा, 'हमें उनकी जगह भरने के लिए तत्काल काम करने की जरूरत है। डॉ आचार्य की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य के रूप में अहम भूमिका थी।' 

रिजर्व बैंक में हुई हलचल से इक्विटी बाजार बेफिक्र नजर आ रहा है। अब जुलाई में आने वाले बजट, मॉनसून की प्रगति, प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक कारकों पर बाजार की नजर है। अवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट्स अल्टरनेटिव स्ट्रेटेजीज के सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी वैभïव सांघवी ने कहा, 'आर्थिक आंकड़े और वैश्विक परिस्थितियों का असर अब बाजार पर पड़ सकता है। नकदी से जुड़ी समस्या अब कम होगी। खासकर आम चुनाव के परिणाम के बाद बाजार में सकारात्मक संकेत गए हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगस्त में रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में 25 आधार अंक की कटौती करेगा और बाजार का मौजूदा रुख इसे मानकर चल रहा है।'

Keyword: Reserve Bank, Viral Acharya, विरल आचार्य, RBI, Governor, Policy, Economist,
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