बिजनेस स्टैंडर्ड - जालान समिति की रिपोर्ट में और देरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 14, 2019 09:19 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जालान समिति की रिपोर्ट में और देरी

अरूप रायचौधरी और सोमेश झा /  June 24, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा करने के लिए बनी विमल जालान समिति की रिपोर्ट केंद्रीय बैंक को पेश किए जाने में तीसरी बार देरी हो रही है। समिति अब जुलाई के मध्य में एक और बैठक करेगी और अपनी रिपोर्ट केंद्रीय बजट 2019-20 के बाद पेश करेगी। इसके साथ ही बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक जब रिपोर्ट पेश की जाएगी जो इसमें वित्त सचिव सुभाष गर्ग का असहमति नोट हो सकता है। गर्ग इस समिति में सरकार के प्रतिनिधि हैं।

छह सदस्यों की इस समिति में मुख्य मतभेद रिजर्व बैंक के अतिरिक्त पूंजी भंडार के हस्तांतरण को लेकर है। समिति के ज्यादातर सदस्यों की राय है कि रिजर्व बैंक का पूंजी भंडार केंद्र सरकार को धीरे धीरे कई वर्षों में हस्तांतरित किया जाए। वहीं सरकार की ओर से आवाज उठाते हुए गर्ग ने एकमुश्त हस्तांतरण का पक्ष लिया है। यही वजह है कि गर्ग का विचार इस रिपोर्ट में असहमति नोट के रूप में आ सकता है।

सोमवार को जालान समिति ने रिजर्व बैंक के नई दिल्ली स्थित कार्यालय में बैठक की। ऐसा माना जा रहा था कि यह इस सप्ताह के अंत तक रिपोर्ट पेश करने के पहले की आखिरी बैठक है। बहरहाल समिति के एक सदस्य ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि अभी एक और बैठक होगी और 5 जुलाई को निर्मला सीतारमण द्वारा आम बजट पेश किए जाने के बाद रिपोर्ट पेश की जाएगी। एक और सूत्र ने कहा कि अगली बैठक जुलाई के मध्य में होगी। सोमवार को हुई बैठक में गर्ग शामिल नहीं हुए। 

सूत्रों ने कहा कि समिति के सदस्यों के बीच इस बात को लेकर गतिरोध पैदा हुआ क्योंकि गर्ग चाहते थे कि समिति केंद्रीय बैंक के पुनर्मूल्यांकन खातों में 'अवास्तविक लाभ' पर रोक लगाने की सिफारिश करे, जबकि जालान इसके पक्ष में नहीं थे। 

अवास्तविक लाभ के इस्तेमाल को लेकर भी गतिरोध है। रिजर्व बैंक ने इस धन को सरकार के लाभांश का हिस्सा माने जाने के खिलाफ व्यापक प्रस्ताव पारित किया है। जून 2018 के आखिर में 'अवास्तविक लाभ', जो रिजर्व बैंक के बैलेंस शीट में मुद्रा और सोने के पुनर्मूल्यांकन भंडार के रूप में दिखाया गया है, केंद्रीय बैंक के 9.6 लाख करोड़ रुपये भंडार का 70 प्रतिशत है। 

रिपोर्ट पेश किए जाने में इस बार हुई देरी का मतलब है कि वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक से मिलने वाली अतिरिक्त राशि की किसी धारणा को बजट में शामिल नहीं कर पाएगी। 2019-20 के अंतरिम बजट के मुताबिक रिजर्व बैंक से मिलने वाला लाभांश और सरकारी वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली राशि 54,817 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। यह 2018-19 के पुनरीक्षित अनुमान में 51,623 करोड़ रुपये था, लेकिन यह इस साल के बजट अनुमान 74,901 करोड़ रुपये से बहुत कम है।

इसका मतलब यह हुआ कि नए मंत्री के अधीन वित्त मंत्रालय को कड़े वित्तीय संतुलन पर काम करना होगा। केंद्र सरकार पूïर्ण बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 3.4 प्रतिशत बरकरार रख सकती है। ऐसे समय में, जब वास्तविक कर राजस्व संग्रह को लेकर चिंता है और विनिवेश लक्ष्य में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है, बजट बनाने वालों को गैर कर राजस्व बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक से ज्यादा धनराशि पर निर्भर रहना पड़ेगा।

समिति के अन्य सदस्यों में रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन, रिजर्व बैंक केंद्रीय बोर्ड के सदस्य भरत दोषी और सुधीर मनकड और डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन शामिल हैं। इस समिति का गठन दिसंबर 2018 में किया गया था। उम्मीद थी कि 8 अप्रैल 2019 को रिपोर्ट आएगी, लेकिन उसके बाद समिति को 3 महीने का विस्तार दिया गया। समिति का एक प्रमुख काम रिजर्व बैंक द्वारा रखी जाने वाली अतिरिक्त राशि का निर्धारण है। 

रिजर्व बैंक सामान्यतया लाभांश के हस्तांतरण के लिए जुलाई-जून कैलेंडर का पालन करता है और बही खाता बंद होने के बाद अगस्त में धनराशि हस्तांतरित करता है। लाभांश हस्तांतरित करते वक्त केंद्रीय बैंक आर्थिक पूंजी ढांचे के मुताबिक विभिन्न जोखिमों का ध्यान रखता है। 

रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति के संचालन, मुद्रा में उतार चढ़ाव, बॉन्ड के मूल्य में संभावित गिरावट, खुले बाजार के परिचालन के स्टरलाइजेशन लागत, कर्जदाताओं के कर्ज से जुड़े जोखिम और अन्य अनपेक्षित जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी भंडार की जरूरत होती है।
Keyword: Reserve Bank, Monetary Policy, Bimal Jalan, Union Budget,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या तकनीकी टेक्सटाइल पर सरकार के जोर से उद्योग को मिलेगा फायदा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.