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निवेश के लिए गर खरीदना है घर तो छोटे मझोले शहरों पर डालें नजर

तिनेश भसीन और संजय कुमार सिंह /  June 24, 2019

अगर आप किसी महानगर में रहते हैं और आवासीय संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो आपको अपनी तलाश का दायरा बढ़ाना चाहिए। आपको आसपास के मझोले और छोटे शहरों में भी संपत्ति खोजने के बारे में विचार करना चाहिए। हाल में रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी एनारॉक ने अखिल भारतीय ग्राहक रुझान का सर्वेक्षण किया है, जिसमें 26 फीसदी लोगों ने मझोले और छोटे शहरों में निवेश को तरजीह दी।

यह सर्वेक्षण में 2,797 लोगों को शामिल किया गया था। बहुत से महानगरों में रियल एस्टेट बाजारों में ऊंची कीमतों और जगह की सीमित उपलब्धता के कारण संभावनाएं कम होती जा रही हैं, इसलिए आने वाले समय में इन महानगरों के आसपास के छोटे एवं मझोले शहरों के रियल एस्टेट बाजारों में तेजी आ सकती है। निवेशकों की नजर जिन मझोले और छोटे शहरों पर है, उनमें अहमदाबाद, जयपुर, चंडीगढ़, नासिक और कोच्चि शामिल हैं। लखनऊ में भी अच्छी संभावनाएं हैं। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, 'बेंगलूरु, हैदराबाद, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और चेन्नई में खुद रहने और निवेश के लिए खरीदारी बनी रहेगी। मझोले और छोटे शहरों के रियल एस्टेट बाजार तेजी से बढ़ेंगे, जहां आगामी वर्षों में ज्यादातर रियल एस्टेट गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।' 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आवास ऋण के आंकड़े भी इस बात पर मुहर लगाते हैं कि इन छोटे शहरों में रियल एस्टेट क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। जेएलएल इंडिया में मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान  प्रमुख सामंतक दास ने कहा, 'वर्ष 2013 से 2018 के बीच इन छोटे शहरों में से कई ने तेज वृद्धि दर्ज  की है।' मुंबई में रियल एस्टेट क्षेत्र की सालाना वृद्धि दर 9 फीसदी रही है, जबकि ठाणे में यह 22 फीसदी से अधिक रही है। हैदराबाद की वृद्धि 10 फीसदी रही है, जबकि रायगढ़ में 24 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली और सोनीपत के आंकड़े क्रमश: 9 फीसदी और 20 फीसदी हैं। 

वृद्धि का आकर्षण 

निवेशकों के बीच मझोले एवं छोटे शहरों का आकर्षण बढऩे की कई वजह हैं। पहली, यहां दाम लोगों के बूते से बाहर नहीं हैं। अगर आप मुंबई जैसे महानगर में निवेशक करना चाहते हैं तो आपको यहां 2बीएचके फ्लैट खरीदने के लिए कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। वहीं मझोले और छोटे शहरों में 20 से 40 लाख रुपये में बहुत से विकल्प मिल जाते हैं और यह बोझ ज्यादातर निवेशक उठा लेते हैं। 

ज्यादातर महानगरों में आबादी का दबाव है। आम तौर पर आबादी में बढ़ोतरी के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास की कोशिश की जाती है, लेकिन यह अमूमन 'बहुत कम और बहुत देरी' से होता है। दूसरी ओर मझोले और छोटे शहरों में भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सकता है, जिससे रोजगार बढ़ सकता है। इसलिए पूंजी और किराये में इजाफा होता है। उदाहरण के लिए लखनऊ के रियल्टी बाजार में मेट्रो नेटवर्क और दिल्ली-आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास से तेजी आ रही है। नागपुर और कोच्चि जैसे शहरों में मेट्रो के छोटे खंडों के उद्घाटन से उन क्षेत्रों में रियल एस्टेट बाजार में तेजी आई है। 

एनारॉक के मुताबिक स्मार्ट सिटी मिशन और अमृत (अटल मिशन फॉर रिजूवनैशन ऐंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) जैसी पहलों से इन छोटे शहरों में खरीदारी बढ़ी है। अहमदाबाद, चंडीगढ़ और कोच्चि  जैसे शहरों को स्मार्ट सिटी का तमगा मिलने से उनके रियल एस्टेट बाजारों को सहारा मिला है। 

आई से जुड़ी सेवाओं से भी मझोले और छोटे शहरों के रियल एस्टेट बाजार में तेजी आ रही है। दास ने कहा, 'बहुत से मझोले शहरों में अच्छे पेशेवर संस्थान हैं, जिसका मतलब है कि वहां कुशल कर्मचारी उपलब्ध हैं। जमीन की कम कीमतों से बड़े कैंपस बनाने में मदद मिलती है। हाल के वर्षों में ये शहर तकनीकी रूप से तैयार हो गए हैं।' 

जांच-पड़ताल करें 

सभी मझोले और छोटे शहर एकसमान आकर्षक नहीं हैं। किसी शहर के रियल एस्टेट बाजार का प्रदर्शन उसकी रोजगार संभावनाओं में बढ़ोतरी पर निर्भर करेगा। रोजगार की संभावनाएं इस बात से तय होंगी कि शहर देसी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने कार्यालय स्थापित करने के लिए कितना लुभा पा रहा है। किसी छोटे शहर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कितनी तेजी से पूरा किया जाता है, इसका असर संपत्ति की कीमत में बढ़ोतरी और निवेशक को मिलने वाले किराये पर पड़ेगा। विशेष रूप से बड़े निवेशक अपने लिए यह मूल्यांकन करने की खातिर किसी भरोसेमंद संपत्ति सलाहकार कंपनी की सलाह ले सकते हैं। एनारोक के मुताबिक भुवनेश्वर, चंडीगढ़, अहमदाबाद, मोहाली, इंदौर और अमृतसर में 2015 से 2018 के बीच 1.37 अरब डॉलर का प्राइवेट इक्विटी निवेश हुआ है। बड़े निवेशक काफी जांच-पड़ताल करते हैं, इसलिए उनके फैसलों से संकेत लेना एक अच्छी रणनीति साबित हो सकता है। 

व्यावसायिक संपत्तियों का निर्माण की रफ्तार और उनकी लीज की गतिविधियों से भी यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या किसी छोटे बाजार में आवासों की मांग है। कॉलियर्स इंटरनैशनल के राष्ट्रीय निदेशक (पूंजी बाजार एवं निवेश सेवाएं) गगन रणदेव ने कहा, 'कंपनियां तब नए कार्यालय लेती हैं, जब वे और लोगों की भर्ती कर रही होती हैं। उन शहरों में ज्यादा रोजगार का मतलब है कि उस क्षेत्र में आवासों की ज्यादा मांग आएगी।' वह सुझाव देते हैं कि शहर में आवासों की आपूर्ति का भी आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'पहले से मौजूद आपूर्ति खत्म होनी शुरू होने पर डेवलपर नई परियोजनाएं शुरू करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि शहर बढ़ रहा है और संपत्ति की कीमतें बढ़ सकती हैं।'

जोखिमों से सुरक्षा 

इन छोटे शहरों में भूमि को लेकर मुकदमेबाजी एक प्रमुख मुद्दा है। दूसरा मुद्दा यह जांचना है कि डेवलपर को प्राधिकरणों से मंजूरियां मिली हैं या नहीं। दास ने कहा, 'आप जांच-पड़ताल कराने के लिए स्थानीय वकील की सेवाएं लें, भले ही उसकी फीस पर आपको कुछ पैसा खर्च करना पड़े। इन शहरों के बहुत से डेवलपरों के पास रियल एस्टेट विकसित करने की सीमित या कोई योग्यता नहीं हो। डेवलपर की वित्तीय स्थिति का भी पता लगाएं। 

रियल एस्टेट विकसित करने का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले और देश भर में काम करने वाले डेवलपर अब इन छोटे शहरों में भी परियोजनाएं ला रहे हैं। उनसे संपत्ति खरीदने से विकास का जोखिम कम हो जाएगा। भारत का रियल एस्टेट बाजार परिपक्व हो रहा है। इसलिए अब वे दिन लद चुके हैं, जब आपका निवेश तीन साल में दोगुना हो जाता था। अब आपको इसके लिए कम से कम 5 से 7 साल का समय लेकर चलना होगा। निवेशकों को हर साल 8 से 10 फीसदी से अधिक प्रतिफल मिलने भी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

Keyword: भुवनेश्वर, चंडीगढ़, अहमदाबाद, मोहाली, इंदौर, House, Investment, Survey, Real Estate, RBI,
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