बिजनेस स्टैंडर्ड - घर से किराया आय बढ़ाने के नए उपाय
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घर से किराया आय बढ़ाने के नए उपाय

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  June 23, 2019

भारत विश्व के उन देशों में से एक है, जहां आवासीय रियल एस्टेट बाजार में किराया सबसे कम है। यह औसतन  2 से 3 फीसदी है। इसका मतलब है कि अगर आपके घर की कीमत 50 लाख रुपये है तो आप इससे हर महीने 9,000 रुपये से 12,500 रुपये किराया मिलने की उम्मीद उम्मीद कर सकते हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों के दौरान को-लिविंग और यात्रियों को किराये पर देने के नए मॉडल उभरे हैं, जो प्रॉपर्टी के मालिकों को ज्यादा किराया दे सकते हैं। मैजिकब्रिक्स के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सुधीर पई ने कहा, 'नए तरीकों, विशेष रूप से को-लिविंग में 8 फीसदी तक किराया मिल सकता है, जो मकान को सीधे किराये पर देने से मिलने वाली औसत आमदनी 3 फीसदी से काफी अधिक है।' 

हालांकि इन मॉडलों से आपको ज्यादा किराया आमदनी अर्जित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन हर किसी में कुछ शर्तें हैं। ऐसे में सभी प्रॉपर्टी मालिक अपने मकान से ज्यादा किराया हासिल नहीं कर पाएंगे। यात्रियों को मकान किराये पर देना तभी कारगर साबित होगा, जब आपका घर शहर के बीचोंबीच हो या पर्यटन स्थल पर हो। बेंगलूरु स्थित कोलिव के संस्थापक और सीईओ सुरेश रंजराजन ने कहा, 'को-लिविंग में प्रॉपर्टी मालिक के पास पूरी इमारत जैसी बड़ी जगह होनी जरूरी है, जिसमें कम से कम 50 से 60 कमरे हों।' किसी भी आवासीय संपत्ति के मालिक को परंपरागत तरीकों या नए तरीकों में से किसी एक का चयन संपत्ति के आकार, अवस्थिति, वह कितना नियंत्रण चाहता है, सोसाइटी के नियम, अग्रिम पूंजी निवेश की जरूरत और रोजमर्रा के मामलों में भागीदारी के आधार पर करना चाहिए।

को-लिविंग में कमाएं 50 फीसदी ज्यादा 

को-लिविंग के मॉडल को चुनकर प्रॉपर्टी मालिक सीधे किराये देने की तुलना में अपनी आमदनी 50 फीसदी या उससे अधिक बढ़ा सकता है। ग्रेक्सटर के सह-संस्थापक प्रातुल गुप्ता ने कहा, 'को-लिविंग क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां एकल इमारतों को तरजीह देती हैं ताकि वे अपनी जरूरतों के मुताबिक उनमें कुछ बदलाव कर सकें और छत जैसी साझा जगह को बिना किसी अड़चन के इस्तेमाल कर पाएं।' ये कंपनियां उन प्रॉपर्टी को तरजीह देती हैं, जो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पार्कों, शहर के कारोबारी केंद्र और कार्यालयों के नजदीक हैं। कोई जोखिम न लेने वाले प्रॉपर्टी मालिक निश्चित किराये के मॉडल को चुन सकते हैं, जबकि जोखिम लेने की क्षमता रखने वाले मालिक राजस्व साझेदारी के विकल्प को अपना सकते हैं। को-लिविंग प्लेटफॉर्म संपत्ति के मालिकों के साथ 9 से 10 साल के लंबी  अवधि के करार करते हैं। वे आम तौर पर संपत्ति की मरम्मत एवं रखरखाव की जिम्मेदारी लेते हैं। वे पुलिस सत्यापन और किरायेदारों के साथ करार जैसी सभी औपचारिकताएं पूरी करते हैं। 

यात्रियों को किराये पर देने में आमदनी घट-बढ़ सकती है 

एयरबीनबी और ओयो जैसी कंपनियां आम तौर पर यात्रियों को प्रॉपर्टी पर किराये देने की सहूलियत देती हैं। इसमें घर के आकार और जगह का कोई प्रतिबंध नहीं होता है। वे यहां तक कि एक कमरे को किराये पर देने की भी सुविधा देती हैं। लेकिन प्रॉपर्टी के लोकप्रिय होने के लिए जरूरी है कि यह सिटी सेंटर, किसी पर्यटन स्थल या सप्ताहांत में छुट्टियां मनाने की जगह के नजदीक हो। एयरबीएनबी में ज्यादा कमाई हो सकती है, लेकिन इसमें घर की मार्केटिंग और आगंतुकों की उम्मीदें पूरी करने में मेजबान की भागीदारी की ज्यादा जरूरत होती है। एयरबीएनबी में मीनाक्षी दहिया (37 वर्ष) एक सुपरहोस्ट हैं, जिसका मतलब है कि आगंतुकों ने लगातार उन्हें ऊंची रेटिंग दी है। उनके पास तीन जगहों पर करीब 55 कमरे हैं। दहिया ने कहा, 'एयरबीएनबी पर प्रोफाइल बनाने में समय लगता है। लेकिन जब आगंतुक मजेबान को ऊंची रेटिंग देते हैं तो उसका प्रचार और कारोबार बढ़ता है। मैं अपने घर में बदलावों के लिए आगंतुकों की प्रतिक्रिया और विचार लेती हूं।' बहुत से मेजबान संपत्तियों को लंबी अवधि के लिए लीज पर लेते हैं और उसे एयरबीएनबी पर किराये पर दे देते हैं। इसके बावजूद कमाई करते हैं। प्रत्येक बुकिंग के लिए एयरबीएनबी भुगतान का 3 फीसदी वसूलता है। दहिया कहती हैं कि उनकी लोकप्रियता की वजह से वह अपने संपत्ति को किराये पर देने से होने वाली आमदनी से 140 फीसदी अधिक कमाती हैं। 

पीजी आवास से बढ़ता है किराया 

अगर आपके पास टू या थ्री बीएचके फ्लैट है तो अपनी किराया आमदनी को बढ़ाने का एक विकल्प इसे पेइंग गेस्त (पीजी) आवास में तब्दील करना है। उमा सुब्रमण्यन (आग्रह पर नाम में बदलाव) के पास चेन्नई में तीन फ्लैट हैं, जिन्हें उन्होंने पीजी आवास के रूप में किराये पर दिया हुआ है। वह कहती हैं कि चेन्नई आईटी हब के रूप में उभर रहा है, इसलिए आईटी पेशेवरों की पीजी आवास की खूब मांग है। ये पेशेवर काफी अच्छा पैसा देने को तैयार होते हैं। उन्होंने बताया कि चेन्नई में थ्री बीएचके प्लैट किसी परिवार को किराये पर देने से 16,000 रुपये से 17,000 रुपये से ज्यादा कमाई नहीं होती है। लेकिन एक थ्री बीएचके फ्लैट में पीजी के रूप में छह लोगों को रखा जा सकता है। प्रत्येक के हर महीने 6,000 रुपये देने से उन्हें 36,000 रुपये की कमाई होती है। पीजी में मालिक को किराये पर देने से पहले कागजी कार्रवाई में कुछ समय खर्च करना पड़ता है। इसमें किराये में बदलाव भी होता रहता है। अगर कोई व्यक्ति रहना छोड़ देता है तो उसकी जगह दूसरा व्यक्ति आने तक मिलने वाला किराया कम बना रहता है। 

सीधे किराये का मतलब ज्यादा नियंत्रण 

किसी परिवार को सीधे किराये पर देने से किराया आमदनी ज्यादा नहीं मिलती है, लेकिन यह आमदनी लगातार बनी रहती है। मालिक इस पर ज्यादा नियंत्रण रहता है कि वह कैसा किरायेदार रखना चाहता है। हो सकता है कि कुछ मकान मालिक पालतू जानवर रखने वाले या धूम्रपान करने वाले किरायेदारों को रखना पसंद न करें। उनके पास ऐसे किरायेदार को रखने का विकल्प होता है, जो उनकी पसंद से मेल खाता हो। हालांकि कुछ बदलावों के साथ प्रॉपर्टी मालिक उस क्षेत्र के किराये से बेहतर किराया हासिल कर सकते हैं। नोब्रोकर डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ अमित अग्रवाल ने कहा, 'एक तरीका यह है कि मकान को फर्निश कराने पर खर्च किया जाए। अगर आप पूरा फर्निश नहीं करा सकते तो कम से कम कपबोर्ड, लॉफ्ट और मॉड्यूलर किचन जरूर लगवाएं। आपको किराये में थोड़ी बढ़ोतरी करते समय कम डिपॉजिट लेने के बारे में विचार करना चाहिए। युवाओं के पास आम तौर पर नकदी की किल्लत होती है। कम डिपॉजिट से प्रॉपर्टी की मांग बढ़ सकती है।' ग्रेक्सटर के गुप्ता ने कहा, 'घर को फर्निश कराने से आपको को 25 फीसदी तक ज्यादा किराया मिल सकता है क्योंकि बहुत से युवा परिवार या अविवाहित लोग अगर किसी शहर में थोड़े समय के लिए जाते हैं तो वे फर्नीचर और अन्य यूटिलिटीज पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते हैं।' मकान मालिकों के कर के प्रावधान समान हैं, भले ही किसी भी मॉडल को अपनाएं। उन्हें किराये को 'आïवासीय संपत्ति से आय' के तहत दिखाना होता है। 
Keyword: Co-living, CEO, Magicbricks, Property, Model, Rent, Utilities, Renter,
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